March 29, 2026

ट्रम्प बोले- फ्रांस पर 200% टैरिफ लगाऊंगा:फ्रांसीसी राष्ट्रपति के मैसेज का स्क्रीनशॉट शेयर किया; मैक्रों ने गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने से इनकार किया था

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ट्रम्प ने सोमवार को फ्रांस के वाइन और शैम्पेन पर 200% टैरिफ लगाने की धमकी दी है। यह चेतावनी उन्होंने फ्रांस के शांति बोर्ड में शामिल होने से इनकार करने के विरोध में दी। ट्रम्प ने कहा कि हम फ्रांसीसी राष्टपति इमेनुअल मैक्रों को शामिल भी नहीं करना चाहते, क्योंकि वे बहुत जल्द ऑफिस से बाहर होने वाले हैं। उन्होंने आगे कहा, ‘अगर मुझे लगा तो मैं फ्रांसीसी वाइन और शैम्पेन पर 200% टैरिफ लगाऊंगा और मैक्रोन शांति बोर्ड में शामिल हो जाएंगे।’ दरअसल गाजा पीस प्लान दूसरे चरण में पहुंच चुका है। ट्रम्प ने गाजा के प्रशासन और पुनर्निर्माण के लिए नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) के गठन का ऐलान किया है। ट्रम्प ने मैक्रों के एक मैसेज का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया। इसमें फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने ग्रीनलैंड पर चर्चा करने के लिए G7 की बैठक आयोजित करने और यूक्रेन के साथ-साथ डेनमार्क को भी बैठक में आमंत्रित करने का प्रस्ताव रखा था। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने ट्रम्प को G7 बैठक बुलाने का प्रस्ताव दिया ट्रम्प ने जो मैसेज शेयर किया उसमें इमेनुअल मैक्रों ने कहा था- सीरिया के मुद्दे पर हम पूरी तरह आपसे सहमत हैं। ईरान के मामले में हम काफी कुछ कर सकते हैं, लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा कि आप ग्रीनलैंड में क्या कर रहे हैं। एक मत तक पहुंचने के लिए मैक्रों ने एक औपचारिक बैठक का प्रस्ताव रखा। मैक्रों ने कहा, ‘मैं पेरिस में G7 की बैठक बुला सकता हूं। मैं यूक्रेन, डेनमार्क, सीरिया और रूस को भी इसमें आमंत्रित कर सकता हूं। ’मैक्रों ने अमेरिका लौटने से पहले ट्रम्प को साथ में डिनर करने का भी न्योता दिया। मैक्रों के मैसेज का स्क्रीनशॉट फ्रांस ने अमेरिका का मजाक उड़ाया था यह विवाद तब और तेज हो गया जब फ्रांस ने ट्रम्प के ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के प्रयास की आलोचना की। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने ट्रम्प की ग्रीनलैंड नीति का बचाव करते हुए कहा था कि भविष्य में रूस से ग्रीनलैंड में खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर रूस या किसी दूसके से ग्रीनलैंड पर हमला होता है, तो हम NATO के तहत इस जंग में शामिल हो जाएंगे। फ्रांस ने इस बयान का मजाक उड़ाया था। फ्रांस के यूरोप और विदेश मामलों के मंत्रालय के आधिकारिक X अकाउंट पर पोस्ट कर कहा कि बेसेंट का तर्क ऐसा है जैसे अगर कभी आग लग सकती है, तो बेहतर है घर को अभी जला दो। NCAG कमेटी के बारे में जानिए… गाजा में पुनर्निर्माण के लिए ट्रम्प ने कमेटी बनाई गाजा के प्रशासन और पुनर्निर्माण के लिए बनाई गई NCAG कमेटी की देखरेख करने, फंड जुटाने जैसे कामों के लिए ट्रम्प ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (शांति बोर्ड) का गठन किया गया है। ट्रम्प खुद इसकी अध्यक्षता कर रहे हैं। इसके अलावा गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड भी बनाया गया है। ट्रम्प ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को न्योता दिया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ को भी इस बोर्ड में शामिल होने का बुलावा दिया गया है। हालांकि, इजराइल इससे नाराज है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने शनिवार को कहा कि गाजा के लिए बनाए गए नए प्रशासनिक बोर्ड की घोषणा अमेरिका ने इजराइल से बिना बातचीत करे की है। इजराइल का कहना है कि यह फैसला उसकी सरकारी नीति के खिलाफ है। ट्रम्प ने किन-किन देशों को आमंत्रित किया ट्रम्प ने शांति बोर्ड में शामिल होने की अपनी योजना के लिए कई देशों को निमंत्रण भेजा है। व्हाइट हाउस ने उन देशों की एक लंबी सूची जारी की। इसमें रूस, कनाडा, तुक्रिए, मिस्र, परागुआ, अर्जेंटीना, अल्बानिया, भारत, जॉर्डन, ग्रीस, साइप्रस, पाकिस्तान और हंगरी शामिल हैं। इसके अलावा, कई अन्य नेताओं ने भी निमंत्रण प्राप्त होने की पुष्टि की है। इजराइल को ट्रम्प के पीस बोर्ड से क्या नाराजगी नेतन्याहू के ऑफिस के मुताबिक, विदेश मंत्री गिदोन सार इस मुद्दे को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने उठाएंगे। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि बोर्ड का कौन सा हिस्सा इजराइल को आपत्तिजनक लग रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य समस्या तुर्किए विदेश मंत्री हाकान फिदान को शामिल करने से है। तुर्किए को हमास का समर्थक माना जाता है और इजराइल के साथ इसका संबंध तनावपूर्ण हैं। तुर्किए के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगन ने इजराइल की गाजा कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। इजराइल का कहना है कि ऐसे देशों को गाजा के प्रशासन में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इजराइली राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने नेतन्याहू के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि गाजा को ‘कार्यकारी बोर्ड’ की जरूरत नहीं, बल्कि हमास को पूरी तरह खत्म करने और बड़े पैमाने पर खुद से पलायन की जरूरत है। रिपोर्ट- स्थायी सदस्यता पाने के लिए देशों को एक अरब डॉलर देने होंगे ट्रम्प की प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में सदस्यता को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है। ब्लूमबर्ग न्यूज ने शनिवार को रिपोर्ट किया कि बोर्ड के ड्राफ्ट चार्टर में कहा गया है कि देशों को परमानेंट सदस्यता पाने के लिए पहले साल में $1 बिलियन (एक अरब डॉलर) की फीस देनी होगी। ट्रम्प तय करेंगे कि किस देश को सदस्य बनने का निमंत्रण मिलेगा। सामान्य सदस्यता 3 साल की होगी, जिसे बाद में रिन्यू किया जा सकता है। अगर कोई देश चार्टर लागू होने के पहले साल में $1 बिलियन से ज्यादा (एक अरब डॉलर) कैश फंड देता है, तो उसकी 3 साल की समय सीमा लागू नहीं होगी यानी स्थायी सदस्यता मिल जाएगी। फंड का इस्तेमाल बोर्ड के खर्चों के लिए होगा, लेकिन कहां-कैसे खर्च होगा, इसकी स्पष्ट डिटेल नहीं है। व्हाइट हाउस ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट को गुमराह करने वाला बताया है। व्हाइट हाउस ने कहा, ‘यह गुमराह करने वाली रिपोर्ट है। बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए कोई न्यूनतम सदस्यता फीस नहीं है। यह सिर्फ उन पार्टनर देशों को स्थायी सदस्यता का ऑफर है जो शांति, सुरक्षा और समृद्धि के प्रति गहरी प्रतिबद्धता दिखाते हैं।’ बोर्ड के सदस्यों में भारतवंशी अजय बंगा भी शामिल व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को बोर्ड के सदस्यों की सूची जारी की। इस बोर्ड में 7 लोग शामिल हैं, जिनमें भारतवंशी अजय बंगा भी हैं। बंगा फिलहाल वर्ल्ड बैंक ग्रुप के अध्यक्ष हैं। बोर्ड के दूसरे सदस्यों में मार्को रुबियो (विदेश मंत्री), स्टीव विटकॉफ (विशेष राजदूत) समेत कई लीडर शामिल हैं। गाजा में पैनल बनाकर विकास की तैयारी इस पहल में ‘ट्रम्प इकोनॉमिक डेवलपमेंट प्लान’ भी शामिल है। इसके तहत मिडिल ईस्ट में आधुनिक ‘मिरेकल सिटीज’ विकसित करने से जुड़े विशेषज्ञों का पैनल बनाकर गाजा के पुनर्निर्माण और विकास की योजना तैयार की जाएगी। योजना के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समूहों से निवेश और विकास से जुड़े प्रस्ताव लिए जाएंगे। इनका मकसद सुरक्षा और शासन व्यवस्था को मजबूत करते हुए निवेश आकर्षित करना और रोजगार के मौके पैदा करना है। इसके साथ ही एक विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव भी है, जिसमें भाग लेने वाले देशों के साथ टैरिफ और एक्सेस रेट तय किए जाएंगे। योजना में साफ कहा गया है कि गाजा से किसी को जबरन नहीं निकाला जाएगा। जो लोग जाना चाहें, वे जा सकेंगे और लौटना चाहें तो उन्हें लौटने की आजादी होगी। योजना के मुताबिक, लोगों को गाजा में ही रहने और बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।



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