March 27, 2026

तमिलनाडु में आदिवासियों ने बनाई खुद की कंपनी:100 से ज्यादा गांवों के हजारों लोगों ने जंगल के उत्पादों को बाजार तक पहुंचाया, 1.4 करोड़ रु. से ज्यादा टर्नओवर

0
new-project-55_1771227647.jpg




तमिलनाडु की नीलगिरी की पहाड़ियों में बसे 100 से ज्यादा आदिवासी गा‍ंवों ने मिलकर कंपनी बनाई है। आंवला, शिकाकाई, कॉफी, शहद और जंगल से मिलने वाली दूसरी प्राकृतिक चीजें जुटाते और कंपनी के जरिए शहरों में बेचते हैं। इस कंपनी से इन गांवों के 10 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं। इसमें इनकी मदद की कीस्टोन फाउंडेशन ने। फाउंडेशन ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर काम शुरू किया। ट्रेनिंग, प्रोसेसिंग सेंटर्स और बाजार बनाने की कोशिशों से नया मॉडल तैयार हुआ। 2013 में आदिमलाई पझंगुडियिनार प्रोड्यूसर कंपनी लि. की शुरुआत हुई, जिसे खुद यहां के आदिवासी ग्रामीण चलाते हैं। इसका टर्नओवर 1.4 करोड़ रु. से ज्यादा है। कंपनी बाजार से 20% ज्यादा दाम पर सामान बेचती है
आदिमलाई कंपनी नीलगिरी के कई गांवों को जोड़कर काम कर रही है। इसमें कुल 1,809 शेयरहोल्डर्स हैं। ज्यादातर ग्रामीण और आदिवासी समुदायों से आते हैं, जिनमें करीब आधी महिलाएं हैं। कंपनी के गांवों में बने प्रोसेसिंग सेंटर्स में शहद, आंवला, जामुन, कॉफी, बाजरा, काली मिर्च और जंगल से मिलने वाली दूसरी चीजों को सुखाते, पैक करते और स्टोर करते हैं। किसान और जंगल से उत्पाद जुटाने वाले लोग अपना सामान कंपनी को देते हैं, फिर कंपनी उसे प्रोसेस करके बाजार तक पहुंचाती है। दाम तय करने के लिए नियमित बैठकों में अलग-अलग क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। कोशिश रहती है कि सामान का भाव बाजार से कम से कम 20% ज्यादा रखा जाए। वजन के लिए इलेक्ट्रॉनिक तराजू इस्तेमाल किए जाते हैं ताकि किसानों को सही भुगतान मिले। शहद संग्राहकों का दुर्घटना बीमा, महिलाओं की हिस्सेदारी भी बढ़ी
इन गांवों में रहने वाले आदिवासी परिवारों की आमदनी बढ़ी है और पलायन पूरी तरह बंद हो गया है। कंपनी सालभर का मुनाफा स्टेकहोल्डर्स में उनके योगदान के हिसाब से बांटती है। खतरनाक जगहों पर काम करने वाले शहद संग्राहकों और दूसरे लोगों का दुर्घटना बीमा कराया जाता है। इसके अलावा कंपनी ने महिलाओं की भागीदारी पर खास ध्यान दिया है। कंपनी के 60 कर्मचारियों में से 52 महिलाएं हैं। घर-घर जाकर उत्पाद खरीदने की व्यवस्था ने उन महिलाओं को भी बाजार से जोड़ा है, जो बाहर नहीं जा पाती थीं। अपने सामुदायिक मॉडल के लिए आदिमलाई को इक्वेटर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *