March 31, 2026

बिहार- नालंदा के शीतलाष्टमी मंदिर में भगदड़, 8 की मौत:6 से ज्यादा घायल; चैत्र के आखिरी मंगलवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी थी

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बिहार में नालंदा के मघड़ा में मंगलवार सुबह माता शीतलाष्टमी मंदिर में भगदड़ से 8 महिलाओं की मौत हो गई है। 6 से ज्यादा लोग घायल हैं। चैत्र महीने का आज आखिरी मंगलवार है, इसलिए मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। प्रशासन ने हादसे के बाद मंदिर और मेला को बंद करवा दिया है। 8 मृतकों में से 2 की पहचान हो पाई है। इनमें नालंदा निवासी रीता देवी (50) और रेखा देवी (45) हैं। घायलों को इलाज के लिए मॉडल अस्पताल भेजा गया है। हादसे के बाद पटना कमिश्नर को बिहारशरीफ भेजा गया है। सीएम ने मुख्य सचिव को जांच के निर्देश दिए हैं। हादसे के बाद की कुछ तस्वीरें देखिए… दर्शन करने की जल्दबाजी में भगदड़ मची महिला भक्तों ने बताया कि चैत्र महीने का ये आखिरी मंगलवार है। यहां मेला लगा था। भीड़ ज्यादा हो गई। मंदिर का गर्भगृह भी छोटा है। लोग जल्दी-जल्दी दर्शन करने के लिए एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश में थे। कोई लाइन में लगकर पूजा नहीं करना चाह रहा था। दूसरे श्रद्धालु ने बताया, ‘सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया गया था। मंदिर के अंदर भारी भीड़ थी। पुलिस का जवान अंदर तैनात नहीं था। भीड़ को डायवर्ट करने या दो लाइनों में बांटने की कोई व्यवस्था नहीं थी। मंदिर के पुजारी ही जल्दी-जल्दी दर्शन कर निकलने को कह रहे थे। इस बीच एक महिला को चक्कर आ गया, जिससे वो वहीं गिर पड़ी। कुछ लोग उसे संभालने लगे, और भीड़ को पीछे करने की कोशिश की। इस दौरान भगदड़ मच गई।’ 40 मिनट बाद पहुंची एंबुलेंस मंदिर में मौजूद एक श्रद्धालु ने बताया, ‘भगदड़ के बाद कई महिलाएं बेहोश पड़ीं थीं। कुछ दर्द से चिल्ला रहीं थीं। लोगों ने पुलिस को खबर की। पहले 2-3 पुलिस वाले पहुंचे। उनके साथ मिलकर श्रद्धालुओं ने घायल महिलाओं को किनारे लिटाया। कई बार एंबुलेंस के लिए फोन किया गया। घटना के करीबब 40 मिनट बाद पहली एंबुलेंस पहुंची और पुलिस के कुछ अफसर भी आए। इसके बाद घायलों को अस्पताल भिजवाया गया। महिलाओं को उठाते समय ही लग रहा था कि उनमें से कुछ की मौत हो गई है।’ मंदिर में आज खास पूजा होती है इसलिए भीड़ थी
ये मंदिर नालंदा के बिहारशरीफ से लगभग 5 किलोमीटर दूर मघड़ा गांव में है। चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी, यानी शीतला अष्टमी को मुख्य पूजा होती है।
इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलता है। भक्त माता को एक दिन पहले बने ठंडे भोजन का भोग लगाते हैं। इसलिए यहां भीड़ उमड़ती है। खबर लगातार अपडेट हो रही है….



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