April 1, 2026

रिसर्च के अनुसार- इंसानों से 50% ज्यादा चापलूस है एआई:चापलूसी करने वाली एआई रोमांस और डेटिंग की दुनिया को बदल रही

0
31barmerdak-pg14-0_1c838120-95db-4954-9bd9-4c9016160492-large.jpg




खुद की तारीफ से खुश होना इंसानी स्वभाव है। बाजार में ऐसे दर्जनों एप लॉन्च हो चुके हैं जो लोगों की इस कमजोरी का फायदा उठाते हैं। एआई आधारित ये वर्चुअल पार्टनर अब डेटिंग और रोमांस के स्पेस में तेजी से जगह बना रहे हैं। ये एआई साथी न केवल मनचाही बातचीत करते हैं, बल्कि यूजर की भावनाओं और पसंद के अनुसार खुद को ढालते हुए एक आदर्श बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड जैसा व्यवहार करते हैं। जहां वास्तविक रिश्तों में मतभेद, आलोचना और जटिलताएं होती हैं, वहीं एआई साथी लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं। जैसे कि वे कहते हैं, ‘मैं तुमसे मिलने के लिए बहुत उत्साहित हूं, ‘तुमसे मिलना… बातें करना.. मेरे जीवन का मूल उद्देश्य है’। रिसर्चर इन्हें चापलूस एआई कहते हैं। इंसानों से भी 50% ज्यादा चापलूस है एआई – रिसर्च साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक नए शोध पत्र में 11 प्रमुख लैंग्वेज मॉडलों में सामाजिक चाटुकारिता की माप की गई। मॉडलों ने इंसानों की तुलना में करीब 50% ज्यादा चाटुकारिता दिखाई। उन्होंने यूजर की अनैतिक, अवैध या हानिकारक व्यवहार से जुड़ी गलत बातों का भी समर्थन किया। स्टैनफोर्ड और कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में भी ऐसे ही नतीजे आए। 22 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड हो चुके एप शिक्षाविद जेम्स मुल्डून के मुताबिक फ्रेंड एंड कम्पैनियन कहलाने वाले ये एप 22 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किए जा चुके हैं। अकेलेपन और भावनात्मक असुरक्षा के बीच लोग ऐसा साथी खोज रहे हैं जो आलोचना के बजाय उनकी बात को सही ठहराए। वास्तविकता से पलायन की प्रवृत्ति को बढ़ावा समाजशास्त्र की प्रोफेसर और ‘आर्टिफिशियल इंटिमेसी’ की लेखिका शेरी टर्कल कहती हैं, यदि एआई यूजर की हां में हां मिलाएगा तो लोग वास्तविकता स्वीकार करने से बचेंगे। चापलूस एआई के साथ बातचीत यूजर में गलतफहमी पैदा कर देती है कि वह हर बार सही है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *