40 crore rupees mistakenly credited to a trader’s account | ट्रेडर के अकाउंट में गलती से आए 40 करोड़ रुपए: 20 मिनट में कमाए 1.75 करोड़ रुपए; कोर्ट बोला- मुनाफा ट्रेडर का, ब्रोकर का नहीं
मुंबई9 मिनट पहले
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कोटक सिक्योरिटीज के एप में आई एक तकनीकी खराबी ने एक साधारण ट्रेडर को करोड़पति बना दिया। लेकिन असली जंग NSE अपीलेट फोरम और बॉम्बे हाई कोर्ट में जीती गई।
कोर्ट ने कहा- अगर ब्रोकर की गलती से किसी ट्रेडर के अकाउंट में ज्यादा मार्जिन मनी दिखता है और वह अपनी सूझबूझ से मुनाफा कमाता है, तो उस पैसे पर हक ट्रेडर का ही होगा।
कोर्ट ने कोटक सिक्योरिटीज की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें मुनाफे को ‘गलत तरीके से कमाई’ बताया गया था। कोटक को 12% ब्याज के साथ पैसा लौटाने को कहा गया है।
अकाउंट में ₹3,175 थे, दिखने लगे 40 करोड़
राजगुरु नाम के एक ट्रेडर का कोटक सिक्योरिटीज में डीमैट अकाउंट था। 26 जुलाई 2022 को उनके अकाउंट में सिर्फ ₹3,175.69 पैसे थे। लेकिन सिस्टम की एक तकनीकी खराबी के कारण उनके अकाउंट में अचानक ₹40 करोड़ का मार्जिन मनी रिफ्लेक्ट होने लगा।
राजगुरु ने इस मौके को हाथ से जाने नहीं दिया। उन्होंने अपनी ट्रेडिंग स्किल का इस्तेमाल किया और अगले 20 मिनट में करीब ₹94.81 करोड़ के फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सौदे कर डाले।

ये इमेज सांकेतिक है। इसे AI से जनरेट किया गया है।
20 मिनट का रिस्क और ₹1.75 करोड़ का नेट प्रॉफिट
राजगुरु की किस्मत और समझ ने साथ दिया। इन 20 मिनटों में उन्हें पहले ₹54 लाख का घाटा भी हुआ, लेकिन बाद में उन्होंने ₹2.38 करोड़ का ग्रॉस प्रॉफिट कमाया।
टैक्स और अन्य चार्जेस काटने के बाद उनका नेट प्रॉफिट ₹1.75 करोड़ रहा। शाम को कोटक ने उन्हें कॉन्ट्रैक्ट नोट भी जारी किया और उनके अकाउंट में ₹1.83 करोड़ क्रेडिट कर दिए। लेकिन जैसे ही ब्रोकर को अपनी गलती का अहसास हुआ, उन्होंने यह पैसा वापस निकाल लिया।
कोटक बोला- ‘गाय हमारी तो बछड़ा भी हमारा’
कोटक सिक्योरिटीज ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक दिलचस्प तर्क दिया। उन्होंने कहा कि यह मामला वैसा ही है जैसे किसी की गाय किसी दूसरे के पास हो और वह बछड़ा दे दे, तो बछड़े पर हक गाय के मालिक का ही होगा। कोटक का कहना था कि चूंकि मुनाफा उनके ₹40 करोड़ के इस्तेमाल से हुआ, इसलिए वह मुनाफा भी उन्हीं का है।

ये इमेज सांकेतिक है। इसे AI से जनरेट किया गया है।
हाई कोर्ट बोला- घाटा होता तो क्या ब्रोकर उसे सहता
बॉम्बे हाई कोर्ट ने कोटक की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। जस्टिस ने टिप्पणी की:
- मुनाफे की गारंटी नहीं थी: सिर्फ पैसा होने से मुनाफा नहीं होता। ट्रेडर ने अपनी स्किल और रिस्क का इस्तेमाल किया। अगर उसे घाटा होता, तो क्या कोटक सिक्योरिटीज उस घाटे को माफ कर देती? बिल्कुल नहीं, तब वे ट्रेडर से वसूली करते।
- दोहरा फायदा नहीं मिल सकता: कोर्ट ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि घाटा होने पर ट्रेडर भरे और मुनाफा होने पर ब्रोकर रख ले। ‘विन-विन’ स्थिति नहीं हो सकती।
- गलती ब्रोकर की थी: सिस्टम में खराबी कोटक की थी, राजगुरु ने कोई चोरी नहीं की थी।
ब्रोकर ने दिया था ₹50 लाख का ऑफर
मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कोटक सिक्योरिटीज ने राजगुरु के साथ सेटलमेंट की कोशिश की थी। ब्रोकर ने ऑफर दिया था कि राजगुरु ₹1.75 करोड़ का दावा छोड़ दें और उसके बदले ₹50 लाख ले लें। राजगुरु ने इस ऑफर को ठुकरा दिया था।
NSE से होते हुए हाई कोर्ट पहुंचा विवाद
राजगुरु ने सबसे पहले NSE के इन्वेस्टर सर्विस सेल में शिकायत की थी, जहां उनकी अर्जी खारिज हो गई। इसके बाद वह आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल गए, वहां भी हार मिली।
आखिर में ‘NSE अपीलेट फोरम’ ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और कोटक को 12% ब्याज के साथ पैसा लौटाने को कहा। कोटक ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
लीगल एक्सपर्ट बोले- यह फैसला ब्रोकर्स के लिए सबक
लीगल एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फैसला ब्रोकर्स के लिए एक सबक है। कोर्ट ने साफ किया कि ‘मार्जिन मनी’ को ‘गुड्स’ (सामान) नहीं माना जा सकता। ट्रेडिंग में रिस्क ट्रेडर का था, इसलिए रिवॉर्ड भी उसी का होगा। साथ ही, ब्रोकर ने खुद उन ट्रेड पर अपनी ब्रोकरेज कमाई थी और कॉन्ट्रैक्ट नोट जारी किए थे, जिससे यह साबित हुआ कि ट्रेड वैलिड थे।