March 25, 2026

Iran Prefers J.D. Vance Over Trump for Talks

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नई दिल्ली56 मिनट पहले

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ईरान ने ट्रम्प सरकार को संकेत दिया है कि वह राष्ट्रपति की चुनी हुई टीम के बजाए जेडी वेंस के साथ बातचीत करना ज्यादा पसंद करेगा। CNN के मुताबिक सूत्रों का कहना है कि ईरान वेंस को युद्ध विरोधी मानता है।

ईरान ट्रम्प के दामाद और सलाहकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ के साथ बातचीत नहीं करना चाहता। ईरान का कहना है उनके साथ बातचीत चल रही थी तभी अमेरिका-ईजराइल ने हमला कर दिया था।

एक राजनयिक सूत्र ने CNN के हवाले से कहा-

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पुरानी टीम के साथ बातचीत की कोई संभावना नहीं है। ईरान को लगता है कि बातचीत का प्रस्ताव सिर्फ अमेरिका-इजराइल के लिए एक और चाल है, ताकि वे फिर से हमले के लिए कुछ और समय ले सकें।

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ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर (बाएं) और स्टीव विटकॉफ। (फाइल फोटो)

ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर (बाएं) और स्टीव विटकॉफ। (फाइल फोटो)

व्हाइट हाउस बोला- कौन बातचीत करेगा यह ट्रम्प तय करेंगे

इससे पहले ब्रिटिश अखबार गार्जियन ने भी मंगलवार को रिपोर्ट दी थी कि ईरान के अधिकारी स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर से बात नहीं करना चाहते। हालांकि व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह गलत बताया और इसे विदेशी प्रचार बताया।

व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि अमेरिका की तरफ से बातचीत कौन करेगा, इसका फैसला सिर्फ राष्ट्रपति ट्रम्प ही करेंगे। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने साफ कहा कि केवल राष्ट्रपति ट्रम्प ही तय करेंगे कि उनकी ओर से बातचीत कौन करेगा।

ट्रम्प ने भी कहा कि इस प्रक्रिया में वेंस के साथ-साथ मार्को रुबियो, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी शामिल हैं।

ईरान को ट्रम्प के दामाद पर भरोसा नहीं

ट्रम्प के करीबी लोगों के मुकाबले, वेंस को तेहरान में ऐसा नेता माना जा रहा है जो पश्चिम एशिया में सैन्य कार्रवाई को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं है। CNN के एक सूत्र के मुताबिक, “ऐसा माना जा रहा है कि वेंस इस संघर्ष को खत्म करने की कोशिश करेंगे।”

एक और सूत्र ने CNN से कहा कि अगर बातचीत का कोई नतीजा निकालना है, तो जेडी वेंस को शामिल होना चाहिए। विटकॉफ और कुशनर के साथ कुछ नहीं होगा। यह पहले भी हो चुका है।

ईरान के लिए यह पसंद का नहीं, बल्कि नुकसान कम करने का मामला है। वह ऐसे व्यक्ति को चुनना चाहता है जिसका इस युद्ध से कम जुड़ाव हो।

ट्रम्प प्रशासन में बढ़ रहा वेंस का कद

जानकारी से यह संकेत मिलता है कि वेंस, जो पहले विदेशों में सैन्य दखल के खिलाफ रहे हैं, अब मुख्य वार्ताकार बन सकते हैं। इससे यह भी दिखता है कि सरकार में उनका प्रभाव बढ़ रहा है और ईरान उन्हें अमेरिका के अलग तरह के प्रतिनिधि के रूप में देख रहा है।

वेंस पहले भी मिडिल ईस्ट में अमेरिकी दखल के खिलाफ रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने ट्रम्प का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा है कि ट्रम्प सही फैसला लेंगे और पिछली गलतियों को नहीं दोहराया जाएगा।

वेंस में बढ़ती दिलचस्पी यह दिखाती है कि वह अब अमेरिकी विदेश नीति में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। अगर ट्रम्प उन्हें आगे करते हैं, तो यह उनके लिए खुद को एक सफल सौदेबाज साबित करने का बड़ा मौका होगा।

ईरान की तरफ से गालिबाफ कर सकते हैं बातचीत

इससे पहले ट्रम्प ने सोमवार को दावा किया था कि वह ईरान में सबसे सम्मानित शख्स के साथ बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। तब माना गया था कि वे शख्स गालिबाफ हो सकते हैं।

हालांकि गालीबाफ ने कुछ ही देर बाद सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है। ऐसी खबरें वित्तीय और तेल बाजारों को प्रभावित करने के लिए फैलाई जा रही हैं।

हालांकि ऐसा अभी भी माना जा रहा है कि ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ बातचीत में शामिल हो सकते हैं।

लेकिन जैसे अमेरिका को यह पसंद नहीं कि ईरान उसके वार्ताकार चुने, वैसे ही ईरान भी अपने प्रतिनिधि को लेकर सतर्क है। किसी भी बातचीत के लिए ईरान के सर्वोच्च नेता की मंजूरी जरूरी होगी।

ईरान बिना शर्त युद्धविराम या आत्मसमर्पण नहीं चाहता। वह खुद को मजबूत स्थिति में मानते हुए बातचीत करना चाहता है। उनका मानना है कि क्षेत्र में दबाव बनाने में वह आगे हैं।

गालिबाफ पहले रिवोल्यूशनरी गार्ड के पायलट रह चुके हैं और सख्त रुख रखने वाले नेता माने जाते हैं।

गालिबाफ पहले रिवोल्यूशनरी गार्ड के पायलट रह चुके हैं और सख्त रुख रखने वाले नेता माने जाते हैं।

खाड़ी देशों ने मध्यस्थता से दूरी बनाई

फिलहाल स्थिति यह है कि बातचीत शुरू होने से पहले ही यह तय करना मुश्किल हो गया है कि टेबल पर कौन बैठेगा।

इस बीच खाड़ी देशों ने मध्यस्थता से दूरी बना ली है। कतर ने कहा कि अगर ईरान खाड़ी देशों पर हमले बंद नहीं करता, तो वह बातचीत में मदद नहीं करेगा। ईरान ने यह शर्त नहीं मानी, जिसके बाद ये देश पीछे हट गए।

उधर सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश भी इस कूटनीतिक प्रक्रिया से दूरी बनाते दिख रहे हैं। वॉशिंगटन में इस बात पर चर्चा हो रही है कि अगर बातचीत नाकाम होती है तो क्या ये देश सैन्य कार्रवाई में साथ देंगे।

फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच सरकार स्तर पर बातचीत जारी है। दोनों पक्ष 15 प्वाइंट्स की एक योजना पर अपने-अपने मांग और रियायतों की समीक्षा कर रहे हैं। बातचीत के लिए तुर्की और पाकिस्तान जैसे देशों के नाम सामने आए हैं, लेकिन अभी कोई औपचारिक बैठक तय नहीं हुई है।

ईरान ने UAE के फुजैरा में एक तेल ठिकाने पर हमला किया, जिससे वहां बहुत नुकसान पहुंचा।

ईरान ने UAE के फुजैरा में एक तेल ठिकाने पर हमला किया, जिससे वहां बहुत नुकसान पहुंचा।

जंग से पहले ईरान-अमेरिका में हुई थी बातचीत

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच 28 फरवरी को जंग शुरू होने से पहले दोनों पक्षों के बीच कई दौर की शांति वार्ता हुई थी। यह बातचीत बातचीत सीधे नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष तरीके से हुई थी।

इसमें दोनों देशों के प्रतिनिधि आमने-सामने नहीं बैठे, बल्कि एक मिडिएटर के जरिए अपनी बात पहुंचा रहे थे। ओमान ने इस दौरान मिडिएटर की भूमिका निभाई थी। ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बदर बिन हमद अल बुसैदी दोनों देशों के बीच संदेश पहुंचा रहे थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्ध से पहले कम से कम 2 से 3 राउंड की बातचीत हुई:

पहला दौर- 6 फरवरी 2026 को ओमान के मस्कट में हुआ

दूसरा दौर- फरवरी के आखिरी सप्ताह में जिनेवा में हुआ

इसके अलावा 26–27 फरवरी के बीच बैकचैनल (गोपनीय) बातचीत हुई कौन-कौन शामिल थे:

अमेरिका- स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर

ईरान- अब्बास अराघची (विदेश मंत्री)

बातचीत का एजेंडा:

  • ईरान के परमाणु (न्यूक्लियर) कार्यक्रम पर रोक
  • अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध हटाना
  • संभावित समझौता कर युद्ध को टालना

नतीजा:

दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी और शर्तों पर मतभेद के कारण कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका। इसी बीच 28 फरवरी 2026 को हालात बिगड़ गए और अमेरिका-इजराइल की सैन्य कार्रवाई के साथ संघर्ष शुरू हो गया।

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