Olympics 2028 Rules; Transgender Women IOC Ban
ज्यूरिख2 घंटे पहले
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पेरिस ओलिंपिक 2024 के दौरान दो महिला बॉक्सरों की भागीदारी को लेकर विवाद सामने आया था। 66 किलोग्राम वर्ग में अल्जीरिया की इमान खलीफ और 57 किलोग्राम वर्ग में ताइवान की लिन यू टिंग के जेंडर पर सवाल उठे थे।
इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी (IOC) ने कहा है कि 2028 के लॉस एंजिल्स ओलिंपिक से ट्रांसजेंडर महिलाएं को अब महिला कैटेगरी के इवेंट्स में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
नई नीति के मुताबिक अब सिर्फ बायोलॉजिकल फीमेल्स यानी वे महिलाएं जो जन्म से ही महिला हैं, उन्हें ही वुमन कैटेगरी में खेलने की अनुमति होगी। इसके लिए एक बार जीन टेस्ट (SRY जीन स्क्रीनिंग) कराना जरूरी होगा, जिससे लिंग की पुष्टि की जाएगी। यह टेस्ट थूक, गाल के स्वैब या ब्लड सैंपल से किया जा सकता है।
वहीं, जो एथलीट जन्म के समय महिला थे, लेकिन अब खुद को ट्रांसजेंडर पुरुष (Trans Men) मानते हैं, वे महिला स्पर्धाओं में खेलना जारी रख सकते हैं।

2021 में न्यूजीलैंड की वेटलिफ्टर लॉरेल हबर्ड ओलिंपिक में भाग लेने वाली पहली ट्रांसजेंडर महिला बनी थीं।
अब तक नियम क्या था अब तक IOC ट्रांसजेंडर महिलाओं को टेस्टोस्टेरोन लेवल कम होने की शर्त पर खेलने की अनुमति देता था या फैसला व्यक्तिगत खेल संघों पर छोड़ दिया जाता था।
नया नियम केवल प्रोफेशनल खेलों पर लागू
IOC अब सभी खेलों के लिए एक एकसमान नीति चाहता है, ताकि खेल संगठन अलग-अलग नियम न बनाएं। कई खेल संगठनों ने पहले ही ट्रांसजेंडर एथलीट्स पर पाबंदी लगा रखी है। यह बदलाव खेलों में निष्पक्षता यानी फेयर कॉम्पिटिशन सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले साल फरवरी में एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पास किया था। इसमें लॉस एंजिल्स ओलिंपिक में ट्रांसजेंडर महिलाओं को वीजा न देने की बात कही गई थी।
यह नियम केवल प्रोफेशनल खेलों पर लागू होगा, जमीनी स्तर (ग्रासरूट) के खेलों पर इसका असर नहीं पड़ेगा।
IOC प्रेसिडेंट बोलीं- जीत-हार में बहुत कम अंतर होता है IOC की प्रेसिडेंट कर्स्टी कोवेंट्री ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि ओलिंपिक जैसे बड़े मंच पर जीत और हार के बीच बहुत मामूली अंतर होता है। उन्होंने कहा, ‘ओलिंपिक खेलों में बेहद छोटा फासला भी जीत और हार तय कर सकता है। ऐसे में बायोलॉजिकल पुरुषों का महिला कैटेगरी में मुकाबला करना सही नहीं होगा।’
‘जन्म से पुरुष होने पर मिलता है फिजिकल एडवांटेज’ IOC ने अपनी इस नीति के पीछे वैज्ञानिक रिसर्च का भी हवाला दिया है। रिसर्च के अनुसार, जन्म से पुरुष होने के कारण एथलीट को स्ट्रेंथ (ताकत), एंड्योरेंस (सहनशक्ति) और पावर आधारित खेलों में शारीरिक रूप से बढ़त यानी एडवांटेज मिलता है। संस्था का मानना है कि हार्मोनल बदलावों के बावजूद यह शारीरिक अंतर पूरी तरह खत्म नहीं होता।

पेरिस ओलिंपिक में दो महिला बॉक्सरों के खेलने पर उठे थे सवाल
पेरिस ओलिंपिक 2024 के दौरान दो महिला बॉक्सरों की भागीदारी को लेकर विवाद सामने आया था। 66 किलोग्राम वर्ग में अल्जीरिया की इमान खलीफ और 57 किलोग्राम वर्ग में ताइवान की लिन यू टिंग के खेलने पर अन्य खिलाड़ियों ने आपत्ति जताई थी।
ताइवानी बॉक्सर लिन यू-टिंग को 2023 में इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन (IBA) द्वारा किए गए जेंडर संबंधी जांच में असफल घोषित किया गया था। इसके बावजूद IOC ने उन्हें पेरिस ओलिंपिक में महिला 57 किलोग्राम वर्ग में भाग लेने की अनुमति दी, जहां उन्होंने गोल्ड मेडल जीता। उनकी पात्रता को लेकर कुछ खिलाड़ियों और IBA ने सवाल उठाए थे, हालांकि IOC ने इन प्रक्रियाओं को विश्वसनीय नहीं माना।
इसी तरह, इमान खलीफ को भी 2023 में IBA द्वारा जेंडर संबंधी जांच में अयोग्य घोषित किया गया था। IBA ने उन्हें 2023 में दिल्ली में आयोजित महिला विश्व चैंपियनशिप के गोल्ड मेडल मुकाबले में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी थी।

पेरिस ओलिंपिक में 66 किलो वेट में इटली की एंजेला कैरिनी ने अल्जीरिया की इमान खलीफ (लाल ड्रेस में) के जेंडर को लेकर सवाल उठाया था।

अल्जीरिया की इमान खलीफ ने 2024 के पेरिस ओलिंपिक में महिलाओं की 66 किलोग्राम बॉक्सिंग स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता।

2024 पेरिस ओलिंपिक में ताइवान की बॉक्सर लिन यू-टिंग भी विवादों में रही थीं।लिन ने 57kg वर्ग में गोल्ड जीता था।
जेंडर टेस्ट सबसे पहले वर्ल्ड एथलेटिक्स काउंसिल ने अनिवार्य किया था जेंडर टेस्ट को वर्ल्ड वर्ल्ड एथलेटिक्स काउंसिल ने अनिवार्य किया था। इसको लेकर SRY जीन टेस्ट लागू किया था। ये नियम 1 सितंबर 2025 से लागू हो गया। वहीं, पिछले साल सितंबर में हुई वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में टेस्ट पास करने वाली महिला खिलाड़ियों को ही भाग लेने दिया गया था।
एथलेटिक्स में दो महिला एथलीटों के जेंडर को लेकर उठा था विवाद

IOC के नए नियम से DSD एथलीटों पर भी पड़ेगा असर यह नियम केवल ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन खिलाड़ियों पर भी लागू होगा, जिनके शरीर में ‘डिफरेंस ऑफ सेक्स डेवलपमेंट’ (DSD) की स्थिति है। यानी वे एथलीट जिनके पास सामान्य महिला XX क्रोमोसोम नहीं हैं।
दक्षिण अफ्रीका की दिग्गज रनर कास्टर सेमेन्या जैसे एथलीट इससे प्रभावित होंगी। सेमेन्या ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे ‘बहिष्कार का नया नाम’ और ‘पीछे खींचने वाला कदम’ बताया।
सेमेन्या 2012 लंदन ओलिंपिक और 2016 रियो ओलिंपिक में महिलाओं की 800 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीता था।
नियम के विरोध की आशंका यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब पूरी दुनिया में महिलाओं के खेलों में ट्रांसजेंडर एथलीटों की भागीदारी को लेकर बहस चल रही है। हालांकि, IOC का कहना है कि यह निष्पक्षता के लिए जरूरी है, लेकिन मानवाधिकार समूहों और एक्टिविस्ट्स की ओर से इस फैसले की आलोचना होने की भी पूरी संभावना है।
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