March 27, 2026

कनाडा में बैन होंगे खालिस्तानी चिन्ह:संसद के निचले सदन में बिल पास, धर्म स्थल के पास लोगों को डराना, माना जाएगा अपराध

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कनाडा की संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमन्स ऑफ कनाडा ने बुधवार को एक नया कानून पास किया है। अब इस कानून बनने से पहले आगे की समीक्षा के लिए सीनेट में भेजा जाएगा। इस कानून के अनुसार बब्बर खालसा जैसे खालिस्तानी संगठनों के झंडे दिखाना अब गैरकानूनी होगा। इसके साथ ही, मंदिर या किसी भी धर्म स्थल के बाहर लोगों को डराना या उनकी गतिविधियों में रुकावट डालना भी अपराध माना जाएगा। हालांकि, इस विधेयक का कंजर्वेटिव और एनडीपी पार्टियों ने विरोध किया है, जिन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चिंता जताई है। इस कानून का नाम कॉम्बैटिंग हेट एक्ट है और अब इसे आगे मंजूरी के लिए सीनेट में भेजा जाएगा। सरकार का कहना है कि इस कानून का मकसद “अभिव्यक्ति की आज़ादी” के नाम पर आतंकवाद को बढ़ावा देने से रोकना है, जैसे कि खालिस्तानी झंडे लहराना या उनसे जुड़ी सामग्री बांटना। भारतीय-कनाडाई समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि इस विधेयक को भारतीय-कनाडाई समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि वह लंबे समय से कनाडा में खालिस्तानी कार्यकर्ताओं द्वारा उत्पीड़न का सामना करता रहा है। इस समुदाय से जुड़े मंदिरों और अन्य धार्मिक संगठनों को भी अक्सर निशाना बनाया गया है, जिनमें घेराव और तोड़फोड़ जैसी घटनाएं शामिल हैं। दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की प्रक्रिया की शुरुआत हाउस ऑफ कॉमन्स ऑफ कनाडा द्वारा पारित किए गए इस बिल को खालिस्तानी उग्रवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सराहा जा रहा है। इसके अलावा,हाल ही में भारत-कनाडा संबंधों में आए तनाव के बाद,इस कदम को दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में भी देखा जा रहा है। खालिस्तानी प्रतीकों पर सख्त प्रतिबंध कनाडा की संसद के निचले सदन द्वारा पारित इस कानून के तहत बब्बर खालसा और अन्य कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े झंडों, पोस्टरों और प्रचार सामग्री के सार्वजनिक प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा। सरकार का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर आतंकवाद का महिमामंडन रोकना अब आवश्यक हो गया है। यह कानून आतंकवादी विचारधाराओं को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का रास्ता खोलेगा। विरोध भी हुआ शुरू हुआ हालांकि, इस विधेयक का कंजर्वेटिव और एनडीपी पार्टियों ने विरोध किया है, जिन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चिंता जताई है। नागरिक स्वतंत्रता समूहों ने भी संभावित अतिक्रमण की चेतावनी दी है, हालांकि इस अपराध के लिए जानबूझकर नफरत फैलाने के इरादे का सबूत आवश्यक है। निजी या ऐतिहासिक प्रदर्शनों पर स्वतः प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। बिल से जुड़ी मुख्य बातें



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