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नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले
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दिल्ली हाईकोर्ट ने ANI और OpenAI से जुड़े मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। ANI ने OpenAI पर चैटजीपीटी (ChatGPT) को ट्रेन करने के लिए उसकी खबरों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है।
ANI का आरोप है कि OpenAI ने वेब टूल्स के माध्यम से उसका कंटेंट इकट्ठा किया और बिना परमिशन-भुगतान उसकी खबरों का इस्तेमाल कर ChatGPT को ट्रेन किया। ANI के मुताबिक यह फेयर डीलिंग के नियमों में नहीं आता, क्योंकि इसका उपयोग कमाई और व्यवसाय के लिए किया जा रहा है।
वहीं OpenAI ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि सिस्टम सिर्फ इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी से पैटर्न सीखता है। मॉडल पूरा आर्टिकल कॉपी नहीं करता। OpenAI ने कहा कि आगे की ट्रेनिंग के लिए ANI की वेबसाइट ब्लॉक कर दी गई है।

AI ट्रेनिंग और कॉपीराइट कानून से जुड़ा पहला बड़ा मामला
इस मामले का सबसे बड़ा मुद्दा भारतीय कानून में फेयर डीलिंग की सही व्याख्या है। भारत में AI ट्रेनिंग और कॉपीराइट कानून से जुड़ा यह पहला बड़ा मामला माना जा रहा है। यह मामला 19 नवंबर 2024 को कोर्ट में आया था। तब से लेकर 27 मार्च तक इस पर कुल 32 बार सुनवाई हो चुकी है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस अमित बंसल ने AI और कॉपीराइट से जुड़े कई जरूरी कानूनी सवालों पर विचार किया। इस मामले में कई मीडिया संस्थानों और दूसरे संगठनों ने भी अपनी बात रखी।
कुछ मीडिया समूहों ने ANI का समर्थन करते हुए कॉपीराइट की सुरक्षा की मांग की, जबकि कुछ पक्षों ने OpenAI का समर्थन किया और कहा कि मौजूदा कानून AI ट्रेनिंग की अनुमति देता है।
कोर्ट रूम में ANI और OpenAI की दलीलें…
- ANI- कॉपीराइट का उल्लंघन उसी समय शुरू हो जाता है, जब ट्रेनिंग के लिए डेटा इकट्ठा किया जाता है। ChatGPT के कुछ जवाबों में पेड कंटेंट जैसी सामग्री दिखाई दी है।
- OpenAI- AI मॉडल पूरे आर्टिकल्स को सेव नहीं करते। वे सिर्फ भाषा और डेटा के पैटर्न को सीखते हैं। अस्थायी रूप से डेटा का उपयोग करना कॉपी करना नहीं माना जाना चाहिए।
- ANI- AI कंपनियों को इसका फायदा नहीं मिलना चाहिए।
- OpenAI- AI ट्रेनिंग एक रिसर्च गतिविधि की तरह है और इसे अनुमति मिलनी चाहिए।
इस मामले में अब कोर्ट तय करेगी कि AI मॉडल की ट्रेनिंग में कंटेंट का इस्तेमाल कॉपीराइट कानून के तहत कॉपी माना जाएगा या नहीं। यह फैसला भारत में AI और कॉपीराइट नियमों की दिशा तय करने में अहम होगा।
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