April 4, 2026

Bengal Election Observer Gherao | EC Hands Probe to NIA

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कोलकाता14 घंटे पहलेलेखक: एजेंसी इनपुट्स के साथ शुभम बोस

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यह विजुअल मुख्य आरोपी मोफक्करुल इस्लाम के भाषण देने का है। पुलिस के मुताबिक इसके बाद लोग भड़क गए और बीडीओ ऑफिस का घेराव कर लिया। - Dainik Bhaskar

यह विजुअल मुख्य आरोपी मोफक्करुल इस्लाम के भाषण देने का है। पुलिस के मुताबिक इसके बाद लोग भड़क गए और बीडीओ ऑफिस का घेराव कर लिया।

पश्चिम बंगाल के मालदा में SIR से जुड़े न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले में मुख्य आरोपी समेत 35 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना के 48 घंटे के अंदर पुलिस ने आरोपी मोफक्करुल इस्लाम को बागडोगरा एयरपोर्ट से पकड़ा। वह बेंगलुरु भागने की फिराक में था।

इस्लाम कलकत्ता हाईकोर्ट में वकील है। वह 2011 में AIMIM का उम्मीदवार रह चुका है। मोफक्करुल पर आरोप है कि मालदा के सुजापुर में 1 अप्रैल को SIR में नाम कटने के विरोध प्रदर्शन में भड़काऊ भाषण दिया।

इससे लोग भड़क गए और हजारों लोगों ने कलियाचक के BDO ऑफिस को घेर लिया। दो गेट बंद कर दिए गए, जिससे 7 न्यायिक अधिकारी 9 घंटे ऑफिस के अंदर बंधक रहे। देर रात 1 बजे सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भारी सुरक्षाबल की मौजूदगी में अफसरों को बाहर निकाला गया था।

उधर, सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इलेक्शन कमीशन ने इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी है। एक टीम मालदा पहुंच चुकी है।

मालदा में जांंच करने पहुंचे NIA के अधिकारियों की तस्वीर।

मालदा में जांंच करने पहुंचे NIA के अधिकारियों की तस्वीर।

आरोपियों की गिरफ्तारी की 2 तस्वीरें…

पश्चिम बंगाल पुलिस ने शुक्रवार को आरोपी मोफक्करुल इस्लाम (ब्लैक जैकेट) और उसके साथी एकरामुल बागनी को अरेस्ट किया है।

पश्चिम बंगाल पुलिस ने शुक्रवार को आरोपी मोफक्करुल इस्लाम (ब्लैक जैकेट) और उसके साथी एकरामुल बागनी को अरेस्ट किया है।

गुरुवार को मालदा घटना से जुड़ी करीब 18 आरोपियों को अरेस्ट किया गया था। अब तक कुल 35 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

गुरुवार को मालदा घटना से जुड़ी करीब 18 आरोपियों को अरेस्ट किया गया था। अब तक कुल 35 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

मालदा मामले के 4 बड़े अपडेट्स

  • मालदा बंधक मामले की जांच NIA की डीआईजी सोनिया सिंह कर रही हैं। वह सुबह करीब 10 बजे कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचीं, जिसके बाद सीधे मालदा के लिए रवाना हो गईं।
  • वह कलियाचक थाने भी जा सकती हैं और घटनास्थल का दौरा करने की संभावना है। वहां से सैंपल इकट्ठा किए जा सकते हैं। इसके अलावा, 7 न्यायिक अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है।
  • प्रारंभिक जांच के बाद ही NIA इस मामले में केस दर्ज करेगी। इसके बाद गिरफ्तार आरोपियों को NIA अपनी हिरासत में ले सकती है।
  • EC ने पश्चिम बंगाल में सुरक्षा को लेकर सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPFs) की 500 कंपनियां तैनात करने का आदेश दिया।

मालदा हिंसा, 2 दिन का घटनाक्रम…

1 अप्रैल: दोपहर में प्रदर्शन, शाम को अधिकारी बंधक बनाए गए

एक अप्रैल को प्रदर्शनकारियों ने 7 न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाया था। जब उन्हें पुलिस ने बाहर निकाला तो रास्ता रोकने की कोशिश की गई।

एक अप्रैल को प्रदर्शनकारियों ने 7 न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाया था। जब उन्हें पुलिस ने बाहर निकाला तो रास्ता रोकने की कोशिश की गई।

मालदा में विरोध प्रदर्शन दिन में पहले कालियाचक 2 ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस के बाहर शुरू हुआ था। जो देर रात तक जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने शुरू में न्यायिक अधिकारियों से मिलने की मांग की थी। अंदर जाने की परमिशन न मिलने पर, उन्होंने शाम करीब 4 बजे प्रदर्शन शुरू कर दिया और परिसर का घेराव कर लिया। अधिकारियों को 9 घंटे से ज्यादा समय तक बंधक बनाकर रखा गया था।

इस मामले में पुलिस ने गुरुवार को 18 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक चुनावी उम्मीदवार भी शामिल है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली और 16 लोगों को गिरफ्तार कर जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

2 अप्रैल: कई जिलों में विरोध, सड़कें जाम कीं, आगजनी हुई

2 अप्रैल को प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-12 जाम किया। टायरों में आग लगा दी।

2 अप्रैल को प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-12 जाम किया। टायरों में आग लगा दी।

कलियाचक की घटना के बाद मालदा में 2 अप्रैल को भी विरोध प्रदर्शन हुआ। गुरुवार को नारायणपुर में BSF कैंप के सामने भीड़ इकठ्ठा हो गई। लोगों ने नेशनल हाईवे-12 को जाम कर दिया। सड़क पर टायरों में आग लगा दी गई।

मालदा, जलपाईगुड़ी, कूच बिहार और पुरबा बर्धमान में प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए, सड़कें जाम कीं और मौन जुलूस निकाले; इन जगहों पर 23 अप्रैल को मतदान होना है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, CJI बोले- हमें पता है उपद्रवी कौन

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर एक्शन लिया और घटना को न्याय प्रशासन में बाधा डालने का एक ‘दुस्साहसी और जानबूझकर किया गया प्रयास’ बताया। CJI सूर्यकांत की बेंच ने इस बात पर चिंता जताई कि पहले से पता होने के बावजूद, राज्य के अधिकारी समय पर सुरक्षा मुहैया कराने में विफल रहे, जिसके कारण अधिकारियों को घंटों तक बिना खाना-पानी के रहना पड़ा।

यह घटना सोची-समझी और भड़काऊ लगती है। हमें पता है उपद्रवी कौन हैं, इनका मकसद न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना है। पूरी खबर पढ़ें…

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