Yuvraj Singh Alleges No Clarity from Kohli, Coach; Dhoni Advised Retirement
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15 मिनट पहले
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युवराज सिंह ने 10 जून, 2019 को मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की थी। तस्वीर उसी वक्त की है।
2011 वर्ल्ड कप के हीरो रहे युवराज सिंह ने एक इंटरव्यू में कहा कि धोनी से पता चला था कि अब चयनकर्ता उनके नाम पर विचार नहीं कर रहे हैं। इसके बाद ही युवराज ने 10 जून 2019 को क्रिकेट के सभी फॉर्मेट सें संन्यास ले लिया था।
स्पोर्ट्स तक से बातचीत में युवराज ने कहा कि 36-37 साल की उम्र में जब वे टीम से अंदर-बाहर हो रहे थे, तब न तो नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA), न ही कप्तान विराट कोहली और न ही कोच रवि शास्त्री ने उनसे सीधे बात की।
युवी ने कहा, ‘उस समय मुझे लगा कि मैं बीच में फंस गया हूं। मैंने देश के लिए इतना क्रिकेट खेला, तो कम से कम थोड़ी इज्जत और साफ बात तो बनती थी, लेकिन मुझे कुछ भी साफ नहीं बताया गया।’

धोनी ने फोन पर बताया था सच
युवराज ने कहा कि उन्हें कहीं से कोई जवाब नहीं मिल रहा था, तब उन्होंने महेंद्र सिंह धोनी को फोन किया। धोनी उस समय कप्तान नहीं थे, लेकिन वे पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए थे।
युवराज के मुताबिक, ‘धोनी ने मुझे सही नजरिया दिया। उन्होंने साफ कहा कि सिलेक्टर्स अब आगे की तरफ देख रहे हैं और मैं उनकी योजनाओं का हिस्सा नहीं हूं। धोनी की इस बात ने मुझे वह स्पष्टता दी जो मैनेजमेंट नहीं दे पा रहा था।’
फिटनेस के नाम पर रिटायरमेंट के लिए दबाव बनाया गया
युवराज ने यह भी आरोप लगाया कि मैनेजमेंट ने उन्हें संन्यास लेने के लिए मजबूर करने की कोशिश की थी। उनसे कहा गया था कि वे अब फिटनेस टेस्ट (यो-यो टेस्ट) पास नहीं कर पाएंगे, इसलिए उन्हें खेल को अलविदा कह देना चाहिए।
इस पर उन्होंने साफ जवाब दिया कि रिटायर होना उनका फैसला होगा, जबकि टीम में खिलाना या नहीं खिलाना मैनेजमेंट का निर्णय है।

युवराज पर्सनल टिप्पणियों के चलते कमेंट्री से दूरी बनाए हुए हैं
युवराज ने यह भी बताया कि वे अब तक कमेंट्री से दूर क्यों रहे। उन्होंने साफ कहा कि वे उन लोगों के साथ बैठकर काम नहीं करना चाहते, जिन्होंने उनके बारे में निजी (पर्सनल) टिप्पणियां की थीं।
उन्होंने कहा, ‘अब जब मैं रिटायर हो चुका हूं, तो इस बारे में खुलकर बोल सकता हूं। असली वजह ये है कि कुछ लोगों ने मेरे खेल पर नहीं, बल्कि मुझ पर पर्सनल कमेंट किए थे। खेल की बात समझ में आती है, लेकिन पर्सनल बातें आप कभी नहीं भूलते।’
19 साल का शानदार करियर और दो वर्ल्ड कप जीत
युवराज सिंह ने साल 2000 में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की थी और जून 2019 में संन्यास लिया। उन्होंने भारत के लिए 304 वनडे, 58 टी-20 और 40 टेस्ट मैच खेले, जिनमें 11,000 से ज्यादा रन बनाए। वे 2007 टी-20 वर्ल्ड कप और 2011 वनडे वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के सदस्य रहे।
2011 वनडे वर्ल्ड कप के प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे
युवराज सिंह ने वनडे वर्ल्ड कप 2011 में शानदार प्रदर्शन करते हुए प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का पुरस्कार जीता था। उन्होंने 8 पारियों में 90.50 की औसत से कुल 362 रन बनाए थे, जिसमें चार अर्धशतक और एक शतक शामिल था। उन्होंने टूर्नामेंट में 15 विकेट भी झटके थे। युवराज टूर्नामेंट में चार बार प्लेयर ऑफ द मैच बने और अंत में उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया।
टूर्नामेंट के बाद युवराज को कैंसर होने का पता चला, जिसके बाद उनका इलाज चला। इसके बाद वे एक साल से ज्यादा समय तक टीम इंडिया से बाहर रहे। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उन्होंने सितंबर 2012 में न्यूजीलैंड के खिलाफ टी-20 मैच से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की।

युवराज के नाम भारत के लिए टी-20 में सबसे तेज अर्धशतक
2007 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने पहला टी-20 वर्ल्ड कप जीता था। युवराज सिंह ने इस टूर्नामेंट में इंग्लैंड के खिलाफ एक ओवर में छह छक्के लगाकर इतिहास रच दिया था। उन्होंने इसी मैच में महज 12 गेंदों में अर्धशतक जड़कर एक और बड़ा रिकॉर्ड बनाया। यह आज भी भारत की ओर से टी-20 क्रिकेट में सबसे तेज फिफ्टी का रिकॉर्ड है। आउट होने से पहले युवराज ने 16 गेंदों में 58 रन की विस्फोटक पारी खेली थी।
वर्ल्ड कप 2011 के बाद सिर्फ एक शतक लगा सके थे
युवी युवराज ने कैंसर का इलाज कराने के बाद 2012 में वापसी की, लेकिन उनके खेल में पहले जैसी चमक नहीं रही। युवी ने वर्ल्ड कप 2011 के बाद खेले 30 वनडे में 27.08 की औसत 650 रन बनाए। इसमें सिर्फ एक शतक था। इसी दौरान उन्होंने 35 टी-20 इंटरनेशनल मैचों में 25.41 की औसत से 610 रन बनाए। अपने इंटरनेशनल करियर में 148 विकेट लेने वाले युवी ने अप्रैल 2011 के बाद भारत के लिए सिर्फ 22 विकेट झटके।
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