China Files Second WTO Complaint Against India Over ICT Tariffs & Solar Subsidies in 2025 | चीन ने दूसरी बार WTO में भारत की शिकायत की: बोला- भारत की सोलर सब्सिडी से चीनी प्रोडक्टस को नुकसान; EV-सब्सिडी पर भी विरोध जता चुका
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नई दिल्ली1 घंटे पहले
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चीन ने वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) में एक बार फिर भारत की शिकायत की है। चीनी कॉमर्स मिनिस्ट्री ने शुक्रवार को स्टेटमेंट में कहा कि भारत ने टेलीकॉम इक्विपमेंट जैसे ICT प्रोडक्ट्स पर जो टैरिफ लगाया है और सोलर इंडस्ट्री को दी जाने वाली सब्सिडी, ये दोनों चीजें चीनी कंपनियों को नुकसान पहुंचा रही हैं।
ये पॉलिसी भारत की अपनी कंपनियों को फायदा देती हैं, जो अनफेयर है और WTO के नियमों के खिलाफ है। मिनिस्ट्री ने भारत से WTO के नियमों का पालन करे और इन गलत प्रैक्टिसेस को तुरंत सुधारने कि अपील की है। यह 2025 में चीन की भारत के खिलाफ दूसरी WTO शिकायत है। अक्टूबर में EV और बैटरी सब्सिडी पर केस फाइल किया था।
चीन के आरोप क्या हैं?
चीनी मिनिस्ट्री ने कहा कि भारत के टैरिफ और सब्सिडी घरेलू कंपनियों को फायदा पहुंचाते हैं, जो चीनी प्रोडक्ट्स के लिए अनफेयर कॉम्पिटिशन क्रिएट करता है। ये नेशनल ट्रीटमेंट प्रिंसिपल और इंपोर्ट सब्स्टीट्यूशन सब्सिडी का वॉयलेशन है जो WTO में बैन है। मिनिस्ट्री ने भारत से अपील की कि WTO कमिटमेंट्स फॉलो करे और गलत प्रैक्टिसेस को तुरंत सुधारे।
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर मिलने वाली सब्सिडी का विरोध
भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) को बढ़ावा देने के लिए दी जा रही सब्सिडी पर चीन ने नाराजगी जताई थी। चीन का दावा है कि भारत की यह भारी भरकम सब्सिडी उसकी घरेलू कंपनियों को अनफेयर एडवांटेज दे रही हैं। इससे भारत में बिकने वाले चीनी इलेक्ट्रिक गाड़ियों और EV प्रोडक्ट्स पर असर हो रहा है।
इससे चीन के हितों को नुकसान पहुंच रहा है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि वह अपने उद्योगों के अधिकारों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाएगा।

EV सब्सिडी देने में भारत सबसे आगे
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के बड़े देशों में इलेक्ट्रिक कारों पर सबसे ज्यादा सब्सिडी भारत में ही मिल रही है। उदाहरण के तौर पर भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली EV इलेक्ट्रिक टाटा नेक्सॉन पर खरीदारों और बनाने वाली कंपनी को मिलाकर करीब 46 फीसदी तक की सब्सिडी मिल रही है।
भारत में EV को मिल रहे फायदे में कम जीएसटी, पेट्रोल-डीजल गाड़ियों के मुकाबले कम रोड टैक्स और कंपनियों को मिलने वाली PLI (प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव) योजना का सपोर्ट भी शामिल है।