Whisper Flow AI launched in India
नई दिल्ली10 मिनट पहले
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तुषार मेहता- को-फाउंडर athenil व टेक एक्सपर्ट।
एआई वॉइस डिक्टेशन टूल हमारे लिखने का तरीका तेजी से बदल रहे हैं। अब कीबोर्ड की जरूरत घट रही है, आप बस बोलते हैं और एआई उसे साफ, व्यवस्थित, पढ़ने लायक टेक्स्ट में बदल देता है। ये एआई डिक्टेशन टूल्स सिर्फ शब्द नहीं, भाव भी पहचानते हैं।
क्लेवरटिप के मुताबिक 40% स्मार्टफोन यूजर्स अब मैसेज या कंटेंट बनाने के लिए वॉइस इनपुट का इस्तेमाल कर रहे हैं। यानी यह सिर्फ एक फीचर नहीं, यूजर बिहेवियर का बड़ा बदलाव है।
वॉइस टाइपिंग vs एआई टूल एआई बातचीत को नोट्स में बदलता है
पहले वॉइस टाइपिंग का मतलब था… जो बोलेंगे, वही टेक्स्ट में आ जाएगा। अब एआई डिक्टेशन टूल्स उस टेक्स्ट को एडिट करते हैं, यानी वह एक तरह से आपके को-राइटर बन जाते हैं। यह एप्स अधूरे वाक्यों को पूरा करते हैं, गलत या बिखरी भाषा को सुधारते हैं व भाषा की टोन सही करते हैं और सामान्य बातचीत को नोट्स, मेल या आर्टिकल में भी बदल सकते हैं।
डिक्टेशन की रेस में ये एप्स 1. Wispr Flow
Wispr Flow फोन में कीबोर्ड की जगह काम करता है। लगभग हर एप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह 179 शब्द प्रति मिनट तक टाइप कर सकता है। हिंदी समेत 100 से ज्यादा भाषाएं समझता है। फ्री वर्जन में हर हफ्ते फोन में 1 हजार शब्द मिलते हैं।
2. Google AI Edge Eloquent (iOS)
यह ऑफलाइन भी काम करता है, यानी आवाज डिवाइस पर ही प्रोसेस होती है, क्लाउड पर नहीं जाती। यह नोट्स को पॉइंट्स में बदल सकता है, हालांकि अभी यह दूसरे एप्स के अंदर सीधे काम नहीं करता। पूरी तरह फ्री है।
3. Otter AI
मीटिंग्स, इंटरव्यू और लेक्चर के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले टूल्स में से एक है। यह मीटिंग के सभी स्पीकर्स को पहचानता है, ऑटोमैटिक समरी बनाता है और जरूरी पॉइंट्स हाइलाइट करता है। सब्सक्रिप्शन 800 रुपए महीना से शुरू है।
4. Monologue
यह स्क्रीन पर चल रही चीजों को भी समझता है। अगर आप कोड लिख रहे हैं, तो उसका संदर्भ पकड़ सकता है और उसी हिसाब से भाषा बदल सकता है। यह ऑफलाइन भी काम करता है। इसका मासिक सब्सक्रिप्शन 950 रुपए से शुरू है।
एप इस्तेमाल के लिए ये परमिशन देनी होंगी
-ज्यादातर डिक्टेशन एप्स को इन परमिशन्स की जरूरत होती है।
– माइक्रोफोन एक्सेस
– Display over other apps
– Accessibility सेटिंग्स
– Otter AI को स्क्रीन रिकॉर्ड करने की परमिशन भी चाहिए होती है, ताकि मीटिंग को कैप्चर कर सके।
एआई डिक्टेशन टूल्स की ये चुनौतियां भी
-प्राइवेसी – आपकी आवाज और डेटा कहां जा रहा है। कई टूल्स इसे साफ-साफ नहीं बताते हैं।
-एक्युरेसी – लोकल भाषाओं और मिक्स लैंग्वेज जैसे माहौल में अभी भी सुधार की जरूरत है।
-इंटरनेट – कई टूल्स को चलाने के लिए तेज इंटरनेट चाहिए होता है।
