krystle d’souza reaction dhurandhar shararat song tamannaah bhatia replacement rumours | ‘मौका खुद मिला, जो होना होता है वही होता है’: धुरंधर के गाने शरारत में तमन्ना को रिप्लेस करने की अटकलों पर क्रिस्टल ने किया रिएक्ट
14 मिनट पहले
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फिल्म धुरंधर के गाने शरारत में तमन्ना भाटिया को रिप्लेस करने की अटकलों को लेकर एक्ट्रेस क्रिस्टल डिसूजा ने रिएक्ट किया है। क्रिस्टल ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी भी बात की जानकारी नहीं थी और तमन्ना के लिए उनके मन में सिर्फ रिस्पेक्ट है।
फिल्म में गाना शरारत टीवी एक्ट्रेस क्रिस्टल डिसूजा और एक्ट्रेस आयशा खान पर फिल्माया गया है।
आईएएनएस से बातचीत में क्रिस्टल ने कहा कि उन्हें पर्दे के पीछे किसी भी तरह की चर्चा की खबर नहीं थी। उन्होंने कहा, “जो होना होता है, वही होता है।” उनके मुताबिक यह मौका अपने आप उन्हें और आयशा को मिला।

गाना शरारत को शाश्वत सचदेवा ने लिखा और कंपोज किया है। इसे जैस्मीन सैंडलस और मधुबंती बागची ने अपनी आवाज दी है।
क्रिस्टल ने कहा, “मुझे इन सब बातों का कोई आइडिया नहीं था। तमन्ना बहुत शानदार हैं, खूबसूरत हैं और अपने काम में बहुत अच्छी हैं। उन्हें और आगे बढ़ने की शुभकामनाएं। जो किसी की किस्मत में होता है, वही उसे मिलता है। यह गाना मेरे और आयशा के लिए लिखा था और हमें मिल गया। इससे तमन्ना की खूबसूरती या उनकी काबिलियत कम नहीं होती।”
उन्होंने यह भी कहा कि अगर तमन्ना यह गाना करतीं, तो वह इसमें अपनी अलग चमक जरूर लातीं। क्रिस्टल ने कहा कि उन्हें हर उस महिला पर गर्व है जो अच्छा काम कर रही है और एक-दूसरे का साथ दे रही है।
कोरियोग्राफर ने भी अटकलें खारिज की थीं
वहीं, इस गाने के कोरियोग्राफर विजय गांगुली ने भी इंस्टाग्राम पर साफ किया था कि इस गाने के लिए तमन्ना भाटिया को कभी चुना ही नहीं गया था।
विजय गांगुली ने अपने इंस्टाग्राम पर स्टोरी पोस्ट करते हुए लिखा था,
तमन्ना भाटिया को कभी भी इस सीन के लिए सोचा ही नहीं गया था, क्योंकि उनकी स्टार पावर इतनी ज्यादा है कि वह इस सीन की जरूरतों पर भारी पड़ सकती थी।धुरंधर में म्यूजिक एक हाई-टेंशन मोमेंट का हिस्सा है, जहां टेंशन सबसे जरूरी है। इसलिए मेकर्स ने दो परफॉर्मर्स को चुना, ताकि फोकस कहानी के आगे बढ़ने पर बना रहे। यह फैसला फिल्म का माहौल बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए था कि इस सीन में हीरो कहानी ही रहे।


उन्होंने यह भी बताया कि कैसे शब्दों को सनसनीखेज बनाने के लिए पेश किया जाता है और रिजेक्शन जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है।
उन्होंने लिखा,
मुझे सिनेमा पर बात करना सच में पसंद है और यह भी कि एक फिल्म बनने में कितनी लेयर्स होती हैं, लेकिन कई बार मैं खुलकर बोलने से रुक जाता हूं, क्योंकि शब्दों को चुनकर उठाया जाता है, गलत तरीके से पेश किया जाता है या फिर हेडलाइन बनाने के लिए सनसनीखेज बना दिया जाता है, न कि काम के लिए। अफसोस की बात है कि शरारत गाने और उसके क्रिएटिव मकसद पर बात होने के बजाय, फोकस दो टैलेंटेड कलाकारों की तुलना पर चला गया। यहां तक कि “रिजेक्शन” जैसे भारी शब्द इस्तेमाल किए गए, जबकि ऐसा कुछ भी कहने का मकसद नहीं था।


अपने स्टोरी में विजय गांगुली ने यह भी कहा था कि सिनेमा एक टीमवर्क है। यह सम्मान, समझ और संदर्भ पर चलता है। उम्मीद है कि ध्यान वहीं रहे, जहां होना चाहिए काम पर और उन लोगों पर, जो दिल से इसे बनाने में लगे रहते हैं।