Bihar Governor Arif Mohammad participated in the World Ramayana Conference. | बिहार के राज्यपाल बोले– दुनिया में खून-खराबे के जिम्मेदार हम: जबलपुर में रामायण कांफ्रेंस में कहा- शांति का संदेश नहीं दे पाए इसलिए बढ़ी हिंसा – Jabalpur News
वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में बिहार के राज्यपाल ने संबोधित किया।
दुनिया में जारी खून-खराबे और हिंसा के लिए हम खुद काफी हद तक जिम्मेदार हैं। भारत के पास शांति और एकात्म का संदेश है, लेकिन हम उसे दुनिया तक प्रभावी ढंग से पहुंचा नहीं पाए। यह बात बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने जबलपुर में आयोजित चौथे वर्ल्ड रामा
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इससे पहले राज्यपाल के आगमन पर मानस भवन में राम-राम भजन से उनका स्वागत किया गया। उन्होंने मंचासीन संत कल्याणदास जी महाराज के चरण स्पर्श किए। राष्ट्रगान के बाद संतों के साथ दीप प्रज्ज्वलन कर सम्मेलन का शुभारंभ किया गया।
मानव प्रतिष्ठा ही शांति की बुनियाद राज्यपाल ने कहा कि पूरी दुनिया शांति चाहती है, लेकिन इतिहास बताता है कि हर दौर में इंसानी खून सस्ता समझा गया। वर्ष 1948 में मानवाधिकारों की अवधारणा आई, जिसमें मानव प्रतिष्ठा को मूल आधार माना गया, लेकिन व्यवहार में हम आज भी खुद को दूसरों से श्रेष्ठ मानते हैं। “मैं सही हूं, बाकी सब गलत”—यही सोच हिंसा को जन्म देती है।

बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में शामिल होने जबलपुर पहुंचे।
ये भी बोले आरिफ मोहम्मद
- राम भारत की एकात्मकता का प्रतीक उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति वेदों, उपनिषदों, गीता और रामचरित मानस पर आधारित है, जहां यह सिखाया गया है कि हर शरीर मंदिर है और परमात्मा हर व्यक्ति के हृदय में निवास करता है। प्रभु श्रीराम भारत की एकात्मता के प्रतीक हैं। जब हम हर व्यक्ति में दिव्यता देखेंगे, तभी वास्तविक एकता संभव होगी।
- सत्संग और आध्यात्मिकता पर जोर राज्यपाल ने तुलसीदास की चौपाई और श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्संग से वैराग्य, विवेक और तत्वज्ञान की प्राप्ति होती है, जो अंततः मुक्ति का मार्ग दिखाता है। उन्होंने आदिगुरु शंकराचार्य की भज गोविंदम् रचना का भी उल्लेख किया।
- बांग्लादेश में हिंदुओं पर हिंसा स्वीकार्य नहीं मीडिया से बातचीत में आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या और हिंसा किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। ऐसी घटनाओं पर संवेदना और मानवीय करुणा के आधार पर एकजुट होकर आवाज उठाने की जरूरत है।