Judge Cash Scandal: Supreme Court says parliamentary inquiry panel flawed | जज कैश कांड, सुप्रीम कोर्ट बोला-संसदीय जांच पैनल में खामी: पहले इसकी गंभीरता तय करेंगे, फिर पूरी कार्यवाही पर फैसला लिया जाएगा
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नई दिल्ली10 मिनट पहले
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14 मार्च 2025 को जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास से 500-500 रुपए के जले नोटों के बंडलों से भरे बोरे मिले थे।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका पर कहा कि लोकसभा स्पीकर की ओर से गठित संसदीय जांच पैनल में कुछ खामी दिखाई देती है। हालांकि कोर्ट यह देखेगा कि क्या यह खामी इतनी गंभीर है कि पूरी कार्यवाही को खत्म किया जाए।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया है कि दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन राज्यसभा ने उसे मंजूर नहीं किया। फिर भी लोकसभा ने अकेले जांच समिति बनाई जो कि गलत है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत लोकसभा स्पीकर के पास यह अधिकार है कि वह जस्टिस वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए समिति गठित कर सकें, भले ही राज्यसभा में ऐसा ही प्रस्ताव खारिज हो चुका हो।
14 मार्च को दिल्ली में जज के आधिकारिक आवास के स्टोर रूम में आग लगने के बाद जले हुए नोटों के बंडल मिले थे। इसके बाद के घटनाक्रम में उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी।

16 दिसंबर 2025- कोर्ट ने लोकसभा स्पीकर को नोटिस दिया
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर 2025 को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को नोटिस जारी किया। जस्टिस दीपांकर दत्ता और एजे मसीह की बेंच ने लोकसभा स्पीकर कार्यालय और दोनों सदनों के महासचिवों से जवाब मांगा था।
जस्टिस दत्ता ने पूछा था- राज्यसभा में प्रस्ताव नामंजूर हुआ फिर भी लोकसभा में समिति बनाई गई। संसद में इतने सारे सांसद और कानूनी विशेषज्ञ मौजूद थे, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, संसद में मौजूद कानूनी विशेषज्ञों ने इसे होने कैसे दिया?

याचिका में दावा- जांच पैनल भारतीय संविधान का उल्लंघन
7 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनल कमेटी की रिपोर्ट और CJI खन्ना की सिफारिश के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद जस्टिस वर्मा ने 1968 के जज जांच कानून के तहत शुरू हुई कार्रवाई को चुनौती देते हुए नई याचिका दायर की है।
लोकसभा अध्यक्ष ने जज (जांच) कानून 1968 की धारा 3(2) के तहत के जांच पैनल बनाया, जिसे संविधान के खिलाफ बताया गया है। याचिका में 12 अगस्त 2025 की लोकसभा स्पीकर की कार्रवाई को असंवैधानिक घोषित कर रद्द करने की मांग की गई है।
जस्टिस वर्मा के वकील ने कहा कि जज को हटाने से जुड़े प्रस्ताव लाने से पहले लोकसभा और राज्यसभा दोनों मिलकर जांच समिति बनाएं सिर्फ लोकसभा स्पीकर अकेले यह कमेटी न बनाए।
इससे पहले तीन हाईकोर्ट जजों की जांच में जस्टिस वर्मा दोषी पाए गए और उन्हें हटाने की सिफारिश हुई थी। इसके बाद सरकार ने संसद में महाभियोग प्रस्ताव रखा, जिसे 146 सांसदों के समर्थन के साथ अध्यक्ष ने मंजूर कर लिया।
संसद में महाभियोग लाने की प्रक्रिया क्या है…

जजों की जांच के कानून के बारे में जानें…
1968 के जजों (जांच) अधिनियम के मुताबिक जब किसी जज को हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में मंजूर हो जाता है तो स्पीकर या चेयरमैन उस आरोप की जांच के लिए तीन सदस्यों की एक समिति बनाते हैं।

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