March 29, 2026

US Russia Sanctions Bill Vs India China; Donald Trump Tariffs | Brazil | भारत पर 500% टैरिफ लगा सकता है अमेरिका: रूस के खिलाफ प्रतिबंधों से जुड़े बिल को ट्रम्प की मंजूरी, अगले हफ्ते संसद में वोटिंग

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वॉशिंगटन डीसी1 घंटे पहले

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों से जुड़े एक बिल को मंजूरी दे दी है। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक इस बिल में रूस से तेल खरीदने वाले देशों खासकर भारत, चीन और ब्राजील पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है।

रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बताया कि उन्होंने बुधवार को व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति से बातचीत की, जिसमें ट्रम्प ने संसद में बिल को पेश करने के लिए हरी झंडी दे दी। यह बिल पिछले कई महीनों से तैयार किया जा रहा था। इसे अगले हफ्ते संसद में वोटिंग के लिए लाया जा सकता है।

बिल का नाम ‘सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2025’ है। इसका मकसद उन देशों पर दबाव बनाना है, जो यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीद रहे हैं। अमेरिका का आरोप है कि इससे रूस को युद्ध लड़ने में मदद मिल रही है।

रूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों से जुड़े बिल को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स दोनों ही पार्टियों के सांसदों का समर्थन मिला है।

रूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों से जुड़े बिल को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स दोनों ही पार्टियों के सांसदों का समर्थन मिला है।

क्या है सेंक्शनिंग रशिया एक्ट (SRA) 2025?

इस एक्ट के तहत रूस के ऊर्जा, बैंकिंग और डिफेंस सेक्टर्स को निशाना बनाया गया है। इसमें रूसी तेल-गैस कंपनियों, बड़े बैंकों, डिफेंस इंडस्ट्री और उनसे जुड़े ग्लोबल नेटवर्क पर सख्त पाबंदियों का प्रस्ताव है।

इसके साथ-साथ उन तीसरे देशों, कंपनियों या बैंकों पर भी सेकेंडरी सैंक्शन लगाने का प्रावधान है, जो रूस को प्रतिबंधों से बचने में मदद करते पाए जाएं। मतलब साफ है जो देश भी रूस के साथ घुमावदार रास्ते से कारोबार करेगा, वह भी अमेरिकी कार्रवाई की जद में आ सकता है।

विधेयक में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों में फ्रीज की गई रूसी संपत्तियों को यूक्रेन के पुनर्निर्माण में इस्तेमाल करने की कानूनी राह तैयार करने की बात कही गई है। इससे युद्ध के नुकसान की भरपाई की जाएगी।

क्यों लाया गया SRA एक्ट

रूस पर प्रतिबंध लगाने के लिए जारी किए गए ट्रम्प के कार्यकारी आदेशों को इस एक्ट के जरिए कानून में बदला जाएगा। भविष्य में कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति अकेले फैसले से इन प्रतिबंधों को नहीं हटा सकता और न ही उनमें कटौती कर सकेगा। अगर किसी तरह की छूट या राहत देनी भी हो, तो उसके लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी।

बिल में राष्ट्रपति को विशेष छूट (प्रेसिडेंशियल वेवर) देने का भी प्रावधान है, ताकि डोनाल्ड ट्रम्प को रूस पर दबाव बनाने की ज्यादा ताकत मिल सके।

बिल को सीनेट में 80% सांसदों का समर्थन

रूस के खिलाफ प्रतिबंध लगाने वाला यह बिल एक बाइपार्टिसन यानी द्विदलीय बिल है। यह बिल रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने मिलकर पेश किया है।

सीनेटर लिंडसे ग्राहम के मुताबिक, इस बिल के अभी 85 सह-प्रायोजक (को-स्पॉन्सर) हैं, यानी सीनेट के 80 प्रतिशत से ज्यादा सांसद इसके समर्थन में हैं।

रूसी तेल की वजह से भारत पर पहले से 25% टैरिफ

अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद को लेकर पर पहले से 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया हुआ है। अगर यह बिल पास हो जाता है, तो दिल्ली के लिए नई मुश्किलें लेकर आ सकता है। अब तक भारत पर कुल 50% टैरिफ लग चुका है।

इसके चलते भारत को अमेरिका में अपना सामान बेचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा रहा है, जिसका असर भारत के निर्यात पर पड़ रहा है। दोनों देशों के बीच टैरिफ विवाद को निपटाने के लिए ट्रेड डील पर बातचीत भी चल रही है।

भारत चाहता है कि उस पर लगाए गए कुल 50% टैरिफ को घटाकर 15% किया जाए और रूस से कच्चा तेल खरीदने पर जो एक्स्ट्रा 25% पेनल्टी लगाई गई है, उसे पूरी तरह खत्म किया जाए। दोनों देशों के बीच चल रही इस वार्ता से नए साल में कोई ठोस फैसला निकलने की उम्मीद है।

दावा- भारतीय राजदूत ने 25% टैरिफ हटाने की अपील की

लिंडसे ग्राहम ने 5 जनवरी को कहा था कि वह करीब एक महीने पहले भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा के घर गए थे। उस मुलाकात में सबसे ज्यादा चर्चा भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद कम करने को लेकर हुई थी।

उन्होंने बताया कि भारतीय राजदूत ने उनसे राष्ट्रपति ट्रम्प तक यह संदेश पहुंचाने को कहा था कि भारत पर लगाया गया एक्स्ट्रा 25 प्रतिशत टैरिफ हटाया जाए।

भारत ने 4 साल बाद रूस से तेल आयात कम किया

भारत ने 2021 के बाद पहली बार रूस से कच्चे तेल का आयात घटाया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का रूसी तेल आयात नवंबर में करीब 17.7 लाख बैरल प्रतिदिन था, जो दिसंबर में घटकर लगभग 12 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है। आने वाले समय में यह 10 लाख बैरल प्रतिदिन से भी नीचे जा सकता है।

जनवरी में आने वाले आंकड़ों में भारत के रूसी तेल आयात में बड़ी गिरावट दिख सकती है। नवंबर 21 से रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हुए हैं। इसके बाद भारत का रूस से तेल आयात घटने लगा है।

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