March 26, 2026

US Official Sees India Gaining Market Access

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वॉशिंगटन डीसी39 मिनट पहले

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भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर अमेरिकी ट्रेड अधिकारी जैमीसन ग्रीर ने कहा है कि इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा भारत को मिलने वाला है। उनके मुताबिक, यह डील कई मायनों में भारत के पक्ष में झुकी हुई है।

ग्रीर ने फॉक्स बिजनेस को दिए इंटरव्यू में कहा कि समझौते के लागू होने के बाद भारत को यूरोपीय बाजार में ज्यादा पहुंच मिलेगी और कुल मिलाकर भारत टॉप पर रहेगा। उन्होंने कहा,

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मैंने अब तक डील के कुछ डिटेल्स देखे हैं। ईमानदारी से कहूं तो इसमें भारत को फायदा मिलता दिख रहा है। भारत को यूरोप के बाजार में ज्यादा पहुंच मिल रही है।

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ग्रीर का बयान यहां सुनिए…

भारतीय वर्कर्स का यूरोप जाना आसान हो सकता है

ग्रीर के मुताबिक, भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में भारतीय कामगारों की यूरोप में आवाजाही से जुड़े प्रावधान शामिल हो सकते हैं।

उनका कहना है कि इस डील के तहत भारतीय प्रोफेशनल्स और वर्कर्स को यूरोपीय देशों में काम करने के ज्यादा मौके मिल सकते हैं। ग्रीर ने कहा,

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ऐसा लगता है कि समझौते में कुछ इमिग्रेशन राइट्स भी दिए जा सकते हैं। मुझे अभी पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन EU की राष्ट्रपति उर्सुला वॉन डर लेयेन पहले ही भारतीय वर्कर्स की यूरोप में मोबिलिटी की बात कर चुकी हैं।

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उनके मुताबिक, भारत इस ट्रेड डील से बड़े पैमाने पर फायदा उठाने वाला है। ग्रीर ने यह भी कहा कि इस समझौते से भारतीय कंपनियों को यूरोप में व्यापार बढ़ाने का बड़ा मौका मिलेगा।

ग्रीर बोले- सख्त अमेरिकी ट्रेड नीति से EU नए बाजार ढूंढ रहा

ग्रीर ने यह भी कहा कि भारत-EU फ्री ट्रेड डील का एक बड़ा कारण अमेरिका की बदलती व्यापार नीति है। उनके मुताबिक, अमेरिका अब घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को प्राथमिकता दे रहा है। साथ ही दूसरे देशों को अमेरिकी बाजार तक आसानी से पहुंच नहीं दे रहा।

ग्रीर ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया और विदेशी देशों से आने वाले सामान पर शुल्क जैसे कदम उठाए गए। इससे कई देश, खासकर यूरोपीय यूनियन, अपने उत्पाद बेचने के लिए नए बाजार तलाशने लगे हैं।

भारत-EU ने ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ पर मुहर लगाई

भारत और यूरोपियन यूनियन ने मंगलवार को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन किए। इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताया जा रहा है। इस समझौते से करीब 2 अरब लोगों का बाजार बनेगा और यह वैश्विक GDP के लगभग 25% हिस्से को कवर करेगा।

समझौते के तहत भारत के 99% एक्सपोर्ट पर EU में टैरिफ खत्म होगा, जबकि यूरोपीय यूनियन के 97% से ज्यादा एक्सपोर्ट पर भारत में ड्यूटी कम की जाएगी।

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक इस समझौते को 2027 में लागू किए जाने की संभावना है। इस डील के बाद भारत में इम्पोर्ट होने वाली यूरोपीय कारें जैसे कि BMW, मर्सिडीज पर लगने वाले टैक्स को 110% से घटाकर 10% कर दिया जाएगा।

इसके अलावा भारत में यूरोप से आने वाली शराब और वाइन पर टैक्स कम हो सकता है। यूरोपीय देशों की शराब पर अभी 150% टैरिफ लगता है। इसे घटाकर 20–30% किया जाएगा।

ट्रेड डील से असली विजेता बने पीएम मोदी

ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ ने लिखा है कि यूरोपियन कमीशन FTA को अपनी बड़ी जीत बता रहा है, लेकिन हकीकत में इस समझौते के सबसे बड़े विजेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी माने जा रहे हैं।

अखबार के मुताबिक यूरोपियन यूनियन ने इस समझौते के लिए भारत और रूस की करीबी दोस्ती को नजरअंदाज कर दिया है। पीएम मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से नजदीकी जगजाहिर है, इसके बावजूद EU ने भारत से व्यापार बढ़ाने का रास्ता चुना।

भारत यूक्रेन युद्ध के बाद रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर 50% तक टैरिफ लगाकर दबाव बनाने की कोशिश की थी।

इसके बावजूद भारत एक ऐसा देश बनकर उभरा है जो रूस, EU, चीन और अमेरिका सभी से एक साथ व्यापार कर रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने EU पर ही खुद के खिलाफ युद्ध को फंड करने का आरोप लगाया है।

EU का मानना है कि अमेरिका के कड़े टैरिफ और उसकी आक्रामक नीति ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों को कमजोर किया है। ऐसे में यूरोप भारत जैसे बड़े बाजार की ओर तेजी से बढ़ा है। इसके चलते EU पर आरोप लग रहे हैं कि उसने भारत की रूस से तेल खरीद को नजरअंदाज किया है।

27 जनवरी को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में PM मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा (बाएं) और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (दाएं) की मौजूदगी में भारत- EU FTA पर साइन हुए।

27 जनवरी को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में PM मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा (बाएं) और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (दाएं) की मौजूदगी में भारत- EU FTA पर साइन हुए।

FTA को यूरोपीय संसद की मंजूरी जरूरी

यूरोपियन यूनियन और भारत के बीच FTA तुरंत लागू नहीं होगा। यह समझौता 2027 तक चरणबद्ध तरीके से लागू हो सकता है। इसकी वजह EU की अनिवार्य और लंबी मंजूरी प्रक्रिया है।

EU में किसी भी बड़े व्यापार समझौते को लागू करने से पहले यूरोपीय संसद और सदस्य देशों की औपचारिक मंजूरी जरूरी होती है। सिर्फ यूरोपीय आयोग का राजनीतिक समझौता काफी नहीं होता।

FTA को लागू करने के लिए यूरोपीय संसद में इस पर बहस और वोटिंग होगी। संसद को यह अधिकार है कि वह समझौते को मंजूरी दे, रोक दे या इसमें बदलाव की मांग करे।

EU संसद पहले भी पर्यावरण, मानवाधिकार और न्यायिक निगरानी जैसे मुद्दों पर व्यापार समझौतों पर आपत्ति जता चुकी है। ऐसे में भारत के साथ हुई इस डील पर भी सवाल उठ सकते हैं। (फाइल फोटो)

EU संसद पहले भी पर्यावरण, मानवाधिकार और न्यायिक निगरानी जैसे मुद्दों पर व्यापार समझौतों पर आपत्ति जता चुकी है। ऐसे में भारत के साथ हुई इस डील पर भी सवाल उठ सकते हैं। (फाइल फोटो)

मंजूरी की प्रक्रिया क्या होगी

सबसे पहले यूरोपीय आयोग और भारत के बीच तय शर्तों को कानूनी रूप दिया जाएगा। इसमें टैरिफ कटौती, सेक्टरवार छूट और लागू होने की समयसीमा शामिल होगी।

इसके बाद यह समझौता EU काउंसिल के पास जाएगा, जहां सभी सदस्य देशों की सरकारें इसे मंजूरी देंगी। यहां से सहमति मिलने के बाद यह यूरोपीय संसद में पेश किया जाएगा।

यूरोपीय संसद में बहस के बाद वोटिंग होगी। अगर संसद ने इसे मंजूरी दे दी, तभी समझौते को आगे बढ़ाया जा सकेगा। कुछ मामलों में इसे मिक्स्ड एग्रीमेंट माना जाता है, तब कुछ सदस्य देशों की राष्ट्रीय संसदों से भी रैटिफिकेशन जरूरी हो सकता है।

FTA से ₹43 हजार करोड़ के टैरिफ कम होंगे

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मंगलवार को कहा कि इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से हर साल करीब 4 अरब यूरो (43 हजार करोड़ रुपए) के टैरिफ कम होंगे और भारत व यूरोप में लाखों लोगों के लिए रोजगार के नए मौके बनेंगे।

उन्होंने कहा कि भारत–EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दुनिया को साफ संदेश देता है कि आज की ग्लोबल चुनौतियों का सबसे अच्छा जवाब आपसी सहयोग है, न कि अलग-थलग होकर फैसले लेना।

मर्सिडीज-BMW की इम्पोर्टेड कारें भारत में सस्ती होंगी

भारत में अब यूरोप से इम्पोर्ट होने वाली कारें सस्ती हो जाएंगी। भारत सरकार ने यूरोप से आने वाली कारों पर लगने वाले इम्पोर्ट ड्यूटी को 110% से घटाकर 10% कर दिया है।

हालांकि, सरकार ने इसके लिए 2.5 लाख गाड़ियों की सालाना लिमिट तय की है। ये फैसला भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का हिस्सा है।

हालांकि भारत में मर्सिडीज बेंज और BMW की ज्यादातर पॉपुलर कारें पहले से ही लोकल असेंबली के जरिए बनती हैं। यानी पार्ट्स इम्पोर्ट करके यहां जोड़कर बनाई जाती हैं। इन पर इम्पोर्ट ड्यूटी केवल 15-16.5% तक लगती है, इसलिए EU के साथ FTA होने से इनकी कीमत में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा। पढ़ें पूरी खबर…

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