March 26, 2026

China Military Generals Missing Mystery; Xi Jinping

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बीजिंग3 घंटे पहले

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चीन की सेना में बीते तीन सालों में ऐसा बदलाव हुआ है, जो देश के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया। 2023 की शुरुआत में चीन के पास कम से कम 30 जनरल और एडमिरल थे, जो अलग-अलग खास विभागों और थिएटर कमांड की कमान संभाल रहे थे। इनमें से लगभग सभी को या तो बाहर कर दिया गया है या वे अचानक गायब हो गए हैं।

न्यूयॉर्क टाइम्स की जांच में केवल 7 ऐसे जनरल मिले हैं जो अब भी एक्टिव नजर आते हैं। कई अधिकारी सार्वजनिक रूप से दिखना ही बंद हो गए हैं। आधुनिक चीन के इतिहास में इतनी बड़ी उथल-पुथल पहले कभी नहीं देखी गई।

इन सफाइयों की वजह से दुनिया की सबसे बड़ी सेना के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व का बड़ा खालीपन पैदा हो गया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के एक्सपर्ट्स का मानना है कि शी जिनपिंग जरूरत से ज्यादा शक करने लगे हैं।

ये वे कमांडर थे जो 2023 में शी जिनपिंग के अधीन सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में कार्यरत थे। इस मंच पर मौजूद एक अधिकारी झांग शेंगमिन (बाएं से पहले) को छोड़कर बाकी सभी को पद से हटा दिया गया है।

ये वे कमांडर थे जो 2023 में शी जिनपिंग के अधीन सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में कार्यरत थे। इस मंच पर मौजूद एक अधिकारी झांग शेंगमिन (बाएं से पहले) को छोड़कर बाकी सभी को पद से हटा दिया गया है।

दुनिया की दूसरी सबसे शक्तिशाली सेना में कई पद खाली पड़े

2016 में शी जिनपिंग ने चीन की पूरी सैन्य व्यवस्था बदल दी। पहले चीन की सेना 7 मिलिट्री रीजन में बंटी थी। शी जिनपिंग ने इसे खत्म करके देश को 5 थिएटर कमांड में बांटा, ताकि अलग-अलग मोर्चों पर तेजी से फैसला लिया जा सके। सेना, नौसेना, वायुसेना और मिसाइल फोर्स मिलकर काम करें और जंग स्थिति में “एक कमांड, एक जिम्मेदारी” तय हो।

इसमें से साउदर्न थिएटर कमांड, वेस्टर्न थिएटर कमांड और नॉर्दर्न थिएटर कमांड में सबसे ज्यादा अफसर हटाए गए हैं। सेंट्रल थिएटर कमांड बस एक मिलिट्री रीजन है जहां पर कम अधिकारी निकाले गए हैं।

ये सभी थिएटर कमांड सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के आदेश पर काम करने वाली मिलिट्री यूनिट्स हैं। ये सेना, नौसेना, वायुसेना, मिसाइल फोर्स को मिलाकर ऑपरेशन चलाती हैं। इसमें से 6 में से 5 जनरल अब हटाए जा चुके हैं।

जिसने राष्ट्रपति बनने में मदद की उसे ही निकाला

साल 2022 में सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में इन छह जनरलों को शी जिनपिंग ने खुद नियुक्त किया था। शी जिनपिंग खुद इस कमीशन के अध्यक्ष हैं। अब सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में केवल एक जनरल बचे हैं- झांग शेंगमिन। जिनपिंग के सैन्य सफाई अभियानों की निगरानी वही कर रहे हैं।

पिछले महीने जिनपिंग ने CWC से एक ही साथ दो अधिकारियों वाइस चेयरमैन झांग यूक्सिया और टॉप कमांडर जनरल लियू झेनली को हटा दिया था। इसकी चर्चा पूरी दुनिया में हुई। जिनपिंग को 2023 में तीसरी बार राष्ट्रपति बनाने में जनरल झांग ने मदद की थी।

झांग पर CMC के अंदर अपनी अलग गुटबाजी करने और पार्टी में फूट डालने का भी आरोप लगाया गया। चीन से जुड़े मामलों की जानकारी रखने वाले एक्सपर्ट्स का मानना है कि झांग यूक्सिया बहुत ज्यादा ताकतवर हो गए थे।

कोई नहीं बचा- रॉकेट फोर्स से लेकर नौसेना तक सफाई

यह बर्खास्तगी अभियान सशस्त्र बलों की लगभग सभी शाखाओं तक पहुंच चुका है। इसमें रॉकेट फोर्स के साथ-साथ नौसेना भी शामिल है। पिछले साल शी ने पूर्वी थिएटर का नया कमांडर नियुक्त किया था, लेकिन अब स्थिति फिर बदल गई है।

चीनी सेना के आधिकारिक अखबार ने सैनिकों और अधिकारियों से अपील की कि वे जिनपिंग के फैसले का समर्थन करें और उनके लिए एकजुट रहें। अखबार ने यह भी माना कि इतनी बड़ी कार्रवाई से जो मुश्किलें आई हैं, वह कुछ ही दिन रहेंगी। अखबार के मुताबिक, अंत में इससे चीन की सेना और ज्यादा मजबूत होकर उभरेगी।

जनरल झांग (आगे) और जनरल लियू झेनली (बाएं से दूसरे) 2023 में बीजिंग में राष्ट्रीय जन कांग्रेस में उपस्थित थे। दोनों पर जांच चल रही है।

जनरल झांग (आगे) और जनरल लियू झेनली (बाएं से दूसरे) 2023 में बीजिंग में राष्ट्रीय जन कांग्रेस में उपस्थित थे। दोनों पर जांच चल रही है।

अपने लोगों से तानाशाहों को सबसे ज्यादा खतरा

जर्मनी के राजनीतिक वैज्ञानिक मार्सेल डिर्सस ने तानाशाही व्यवस्थाओं के कमजोर पड़ने पर किताब लिखी है। वे कहते हैं कि ऐसे शासकों को सबसे बड़ा खतरा प्रदर्शनकारियों या विरोधियों से नहीं, बल्कि अपने ही बेहद करीबी लोगों से लगता है।

उनके शब्दों में, “एक तानाशाह होने के नाते आपको शक में रहना ही पड़ता है। हर वक्त लगता है कि खतरा मंडरा रहा है। आपके आसपास मौजूद लोग अक्सर सच नहीं बोलते। यह समझ पाना मुश्किल होता है कि कौन सच में वफादार है और कौन सिर्फ दिखावा कर रहा है।”

चीन मामलों के पूर्व सीआईए विश्लेषक जॉन कल्वर का कहना है, “शी जिनपिंग के नेतृत्व में शक कोई कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी खासियत है। अगर उनमें यह गुण नहीं होता, तो वे इतने ताकतवर बुजुर्ग नेताओं और संस्थानों को कुचलकर इतने लंबे समय तक सत्ता में नहीं टिक पाते।”

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