March 27, 2026

Media mogul Jimmy Lai could face life imprisonment, Jimmy Lai

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हॉन्गकॉन्ग3 घंटे पहले

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हॉन्गकॉन्ग में सोमवार को जिमी लाई को देश के खिलाफ साजिश के मामले में सजा सुनाई जाएगी।       - फाइल फोटो - Dainik Bhaskar

हॉन्गकॉन्ग में सोमवार को जिमी लाई को देश के खिलाफ साजिश के मामले में सजा सुनाई जाएगी। – फाइल फोटो

12 साल का लड़का नाव में छिपकर चीन से भागकर हॉन्गकॉन्ग पहुंचा। अब वह 78 साल की उम्र में जेल में है और उसे सजा का इंतजार है। यह कहानी है जिमी लाई की। हॉन्गकॉन्ग के सबसे चर्चित मीडिया अरबपति। लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता और ब्रिटिश नागरिक।

जिमी लाई का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। गरीबी, संघर्ष और फिर अरबपति बनने की सफलता, सत्ता से टकराव और देशद्रोह के आरोप में जेल में कैद। हॉन्गकॉन्ग में सोमवार को उन्हें देश के खिलाफ साजिश के मामले में सजा सुनाई जाएगी। जिमी अब हॉन्गकॉन्ग में प्रेस की आजादी और लोकतंत्र की लड़ाई का प्रतीक बन चुके हैं। पढ़िए उनके किस्से-

लोकतंत्र के लिए लड़ाई

2019 के लोकतंत्र समर्थक आंदोलन का चेहरा जिम्मी लाई हॉन्गकॉन्ग के उन गिने-चुने अरबपतियों में से थे, जो चीन के खिलाफ सड़कों पर उतरे। वे आम जनता के साथ मार्च करते थे। चीनी मीडिया ने उन्हें ‘गद्दार’ और विदेशी ताकतों का एजेंट करार दिया। उन पर विदेशी मदद की साजिश का आरोप लगा और जब 2020 में हॉन्गकॉन्ग में चीन की पुलिस ने गिरफ्तारी की तैयारी शुरू की, तब जिमी लाई ने कहा, ‘मैं डरकर हॉन्गकॉन्ग नहीं छोड़ूंगा।’ इससे पहले 2014 में 79 दिन चले अम्ब्रेला आंदोलन का नेतृत्व किया था।

तियानमेन नरसंहार से नाराजगी

1989 के तियानमेन नरसंहार के बाद पहली बार लाई ने चीन की कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ लिखना शुरू किया था। 1994 में जिम्मी लाई ने एक लेख में तत्कालीन चीनी प्रधानमंत्री ली पेंग को बेवकूफ कहा। उन्हें चिड़िया और ‘जीरो इंटेलिजेंस’ जैसे शब्दों से संबोधित किया। इसके बाद चीन की सरकार ने उनके कपड़ों के ब्रांड जियोर्डानो पर प्रतिबंध की कार्रवाई शुरू कर दी। तब लाई ने पूरा ध्यान मीडिया और राजनीति की ओर मोड़ लिया।

अखबार पर भी लगा प्रतिबंध

2020 में हॉन्गकॉन्ग में नेशनल सिक्योरिटी लॉ लागू हुआ और पुलिस ने लाई के अखबार एपल डेली के कार्यालय पर छापा मारा। तब करीब 20 करोड़ रु. से अधिक की संपत्ति जब्त कर ली गई। अखबार को मजबूरन 2021 में बंद करना पड़ा। इसका अंतिम अंक प्रकाशित होते ही खत्म हो गया था।

चॉकलेट ने बदली किस्मत

चीन में दिसंबर 1947 में जन्मे जिमी लाई 8 साल की उम्र में चीन के रेलवे स्टेशन पर यात्रियों का सामान ढोते थे। एक दिन एक यात्री ने उन्हें चॉकलेट दी। उस स्वाद ने उनके भीतर हॉन्गकॉन्ग जाने की इच्छा जगा दी। 1960 में 12 साल की उम्र में वे मछली पकड़ने वाली नाव में छिपकर अवैध रूप से हॉन्गकॉन्ग पहुंचे थे। वहां उन्होंने गारमेंट फैक्ट्री में बाल मजदूरी शुरू की। खुद अंग्रेजी सीखी, व्यापार सीखा और 1981 में जियोर्डानो नाम से कपड़ों का ब्रांड शुरू किया। इसके 30 से ज्यादा देशों में 3000 से अधिक स्टोर हैं।



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