जापान चुनाव- PM तकाइची की प्रचंड जीत:अब तक 465 में से 300 सीटें जीतीं, पीएम मोदी ने बधाई दी
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जापान में रविवार को हुए आम चुनाव में प्रधानमंत्री साने तकाइची की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) ने प्रचंड जीत हासिल की है। NHK वर्ल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक LDP को 465 में से 300 सीटों पर जीत हासिल हुई है, जो बहुमत के लिए जरूरी 233 सीटों से काफी ज्यादा हैं। तकाइची की जीत पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है। उन्होंने X पर पोस्ट कर कहा कि मुझे विश्वास है आपके कुशल नेतृत्व में हम भारत-जापान मित्रता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। LDP के नेतृत्व वाला गठबंधन सहयोगी जापान इनोवेशन पार्टी (इशिन) के साथ मिलकर 366 सीटें जीत सकता है। गठबंधन को 310 सीटें मिलते ही ऊपरी सदन में विपक्ष के नियंत्रण के बावजूद कानून पास करने की ताकत मिल जाएगी। तकाइची ने चीन के खिलाफ रुख मजबूत किया तकाइची ने चीन के खिलाफ मजबूत रुख अपनाते हुए सैन्य खर्च बढ़ाया है, आर्थिक पैकेज और टैक्स कटौती की घोषणा की है। उन्होंने खाद्य पदार्थों पर 8% सेल्स टैक्स को दो साल के लिए निलंबित करने का वादा किया है ताकि बढ़ती महंगाई से लोगों को राहत मिले। रणनीतिक सलाहकार कंपनी एफजीएस ग्लोबल के मैनेजिंग डायरेक्टर सेइजी इनाडा के मुताबिक, ‘अगर तकाइची बड़ी जीत दर्ज करती हैं, तो उन्हें टैक्स में कटौती जैसे अहम फैसलों को लागू करने की आजादी मिलेगी।’ ट्रम्प बोले थे- तकाइची शक्तिशाली और बुद्धिमान नेता डोनाल्ड ट्रम्प ने 5 फरवरी को एक पोस्ट में साने तकाइची को पूर्ण समर्थन दिया है। उन्होंने तकाइची को मजबूत, शक्तिशाली और बुद्धिमान नेता कहा, जो अपने देश से सच्चा प्यार करती हैं और जापान के लोगों को निराश नहीं करेंगी। ट्रम्प ने बताया कि वह 19 मार्च 2026 को व्हाइट हाउस में तकाइची से मुलाकात करेंगे। यह समर्थन जापान के 8 फरवरी 2026 के चुनाव से ठीक दो दिन पहले आया है। यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने जापान के किसी नेता को चुनाव में खुलकर समर्थन दिया है। सोशल मीडिया पर साने तकाइची का क्रेज बढ़ा सोशल मीडिया पर साने तकाइची को लेकर ‘सानाकात्सु’ नाम का ट्रेंड भी चर्चा में है। इसमें उनके इस्तेमाल किए गए सामान, जैसे हैंडबैग और संसद में इस्तेमाल किया जाने वाला गुलाबी पेन, युवाओं के बीच लोकप्रिय हो गए हैं। एक हालिया सर्वे में 30 साल से कम उम्र के 90% से ज्यादा मतदाताओं ने तकाइची के पक्ष में रुझान दिखाया, हालांकि यह वर्ग आमतौर पर कम मतदान करता है। लोगों ने बर्फबारी की बीच वोट डाले रविवार को मतदान के दौरान कई इलाकों में बर्फीले तूफान जैसे हालात रहे। परिवहन मंत्रालय के मुताबिक, दर्जनों ट्रेन सेवाएं रोकी गईं और 230 घरेलू उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। कई मतदान केंद्रों को समय से पहले बंद करना पड़ा। इसके बावजूद लोग बर्फ और कड़ाके की ठंड में मतदान के लिए पहुंचे। निजी अखबार निक्केई के अनुसार, मतदान खत्म होने से चार घंटे पहले तक टर्नआउट 21.6% रहा, जो 2024 के चुनाव से 2.65 प्रतिशत अंक कम था। पिछले कुछ चुनावों में लोअर हाउस का टर्नआउट करीब 55% के आसपास रहा है। अगर इस बार मतदान और घटता है, तो संगठित वोटिंग ब्लॉक्स का असर और बढ़ सकता है। वोटिंग 289 सिंगल-सीट सीटों पर सीधे मुकाबले से होगी, जबकि बाकी सीटें प्रपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन से तय होंगी। तकाइची ने संसद भंग कर चुनाव की घोषणा की थी यह चुनाव इसलिए खास है क्योंकि यह न केवल जापान की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा, आर्थिक नीतियां और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी गहरा असर डालेगा। 2024 के चुनाव में LDP को भारी नुकसान हुआ था और पूर्व प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा की सरकार अल्पमत में आ गई थी। उसके बाद 2025 में LDP की प्रेसिडेंशियल इलेक्शन में तकाइची ने जीत हासिल की और जापान इनोवेशन पार्टी के साथ गठबंधन बनाकर सरकार बनाया। जनवरी 2026 में जब संसद सत्र शुरू होने वाला था, तकाइची ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स को भंग कर दिया और 8 फरवरी को चुनाव की घोषणा की। यह फैसला उस समय लिया गया जब उनकी अप्रूवल रेटिंग 70 प्रतिशत से ऊपर थी। तकाइची का दावा है कि यह चुनाव उनके कंजर्वेटिव एजेंडे के लिए जनादेश प्राप्त करने का माध्यम है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करना, इमिग्रेशन रिफॉर्म्स और चीन पर निर्भरता कम करना शामिल हैं। विपक्ष ने महंगाई को मुद्दा बनाया, तकाइची का फोकस सुरक्षा पर उम्मीदवारों की बात करें तो LDP ने 285 सिंगल-सीट डिस्ट्रिक्ट्स और 52 प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। उनके गठबंधन साथी इशिन नो काई ने 33 सीटों पर दांव लगाया है। तकाइची खुद टोक्यो से चुनाव लड़ रही हैं और उनकी लोकप्रियता का फायदा पूरी पार्टी को मिलने की उम्मीद है। विपक्ष में सेंट्रिस्ट रिफॉर्म एलायंस (CRA) प्रमुख है, जिसमें कॉन्स्टिट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी (CDP) और कोमेइतो (जो पहले LDP का साथी था) शामिल हैं। CRA ने 159 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। विपक्षी नेता यूरिको कोइके (कोमेइतो) और CDP के प्रमुखों ने अर्थव्यवस्था, महंगाई और सोशल वेलफेयर पर फोकस किया है, जबकि तकाइची ने राष्ट्रीय सुरक्षा और इमिग्रेशन को मुख्य मुद्दा बनाया है। PM शिगेरू इशिबा ने इस्तीफा क्यों दिया शिगेरू इशिबा सितंबर 2024 में पीएम बने थे। वे पार्टी में ‘आउटसाइडर’ थे, यानी उनका कोई गॉडफादर नहीं था। उन्होंने वादा किया था कि महंगाई और आर्थिक समस्याओं को ठीक करेंगे, लेकिन उनका समय मुश्किल भरा रहा। 1. चुनावी हार का झटका: अक्टूबर 2024 के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव) चुनाव में LDP-कोमेइतो गठबंधन बहुमत हार गया। फिर जुलाई 2025 के ऊपरी सदन (हाउस ऑफ काउंसलर्स) चुनाव में भी बुरी हार हुई। पार्टी को 1955 के बाद पहली बार दोनों सदनों में बहुमत गंवाना पड़ा। 2. पार्टी का दबाव: हार के बाद पार्टी के अंदरूनी लोग इशिबा पर इस्तीफे का दबाव डालने लगे। इनका आरोप है कि इशिबा ‘बहुत उदार’ हैं, जबकि पार्टी को कंजर्वेटिव लीडर चाहिए। इशिबा ने 7 सितंबर 2025 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा- मैं पार्टी में फूट नहीं चाहता। अब नई पीढ़ी को मौका दूंगा।
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