न्यूक्लियर इमरजेंसी की तैयारी में खाड़ी देश:चंडीगढ़ की दवा कंपनी से 1 करोड़ कैप्सूल की क्षमता पूछी, कई देशों में सप्लाई की संभावना
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ईरान-इजराइल जंग के बीच खाड़ी देशों ने संभावित न्यूक्लियर इमरजेंसी से निपटने की तैयारी तेज कर दी है। बहरीन स्थित एक फार्मा लायजनिंग एजेंट ने चंडीगढ़ की एक दवा कंपनी से संपर्क कर परमाणु आपदा में इस्तेमाल होने वाले प्रशियन ब्लू कैप्सूल के बारे में जानकारी मांगी है। एजेंट ने कंपनी से पूछा है कि क्या वह 1 करोड़ कैप्सूल बना सकती है। साथ ही अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों के लिए इसकी डोज कितनी होती है और कंपनी की उत्पादन क्षमता क्या है, जैसे कई सवाल भी पूछे गए हैं। कंपनी की डायरेक्टर डॉ. वैशाली अग्रवाल के अनुसार, इस विषय पर बातचीत जारी है। फिलहाल एजेंट अपने देश के स्वास्थ्य मंत्रालय से इस बारे में चर्चा कर रहा है। अगर समझौता हो जाता है तो इन दवाओं की सप्लाई बहरीन, कुवैत, कतर और जॉर्डन जैसे खाड़ी देशों में की जा सकती है। कंपनी का मुख्यालय चंडीगढ़ में है, जबकि इसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हिमाचल प्रदेश के बद्दी में स्थित है। इससे पहले जून 2025 में इजराइल-ईरान तनाव के दौरान भी इस दवा की मांग सामने आई थी, लेकिन 12 दिन में संघर्ष खत्म होने के बाद बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई थी। जानिए, कैसे काम करती है प्रशियन ब्लू प्रशियन ब्लू परमाणु हमले या रेडियोलॉजिकल आपदा के दौरान इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण दवा है। यह शरीर में प्रवेश कर चुके रेडियोएक्टिव तत्व सीजियम-137 और थैलियम के प्रभाव को कम करती है। यह कैप्सूल आंतों में इन रेडियोएक्टिव तत्वों से जुड़कर उन्हें मल के जरिए शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर इमरजेंसी में उपयोग होने वाली जरूरी दवाओं की सूची में शामिल किया है। अमेरिका और यूरोप में यह दवा पहले से बनाई जाती रही है, जबकि भारत में इसका कॉमर्शियल उत्पादन लगभग दो साल पहले शुरू हुआ है। यह दवा डीआरडीओ की दिल्ली स्थित लैब आईएनएमएएस (इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलाइड साइंसेस) की तकनीक पर आधारित है। डीसीजीआई ने भारत की दो कंपनियों को इसके निर्माण और मार्केटिंग का लाइसेंस दिया है। इसमें अहमदाबाद की कंपनी को कच्चा माल उपलब्ध कराने और चंडीगढ़ की कंपनी को उत्पादन की जिम्मेदारी दी गई है। पोटेशियम आयोडाइड की भी बड़ी मांग बहरीन के एजेंट ने पोटेशियम आयोडाइड (केआई) टैबलेट को लेकर भी जानकारी मांगी है। इसके लिए करीब 1.2 करोड़ टैबलेट की संभावित मांग जताई गई है। पोटेशियम आयोडाइड का उपयोग न्यूक्लियर इमरजेंसी में थायराइड ग्रंथि को रेडिएशन से बचाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा इसका इस्तेमाल हाइपरथायरायडिज्म के इलाज और फेफड़ों में जमा बलगम को ढीला करने में भी किया जाता है।
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