Ahmedabad: 3 Elderly Saved from ₹2.21 Crore Online Fraud | Digital Arrest Scam | Cyber Crime Alert | अहमदाबाद में 2.21 करोड़ की ठगी से बचे 3 बुजुर्ग: पुलिस को समझ रहे थे फ्रॉड का हिस्सा, उनसे मारपीट की
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गांधीनगर5 मिनट पहले
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देश में लगातार बढ़ रहे हैं डिजिटल अरेस्ट के केस।
देश में बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों पर पड़ रहा है। गुजरात के अहमदाबाद में बैंक मैनेजरों और म्यूचुअल फंड अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई कर तीन बुजुर्गों को 2.21 करोड़ रुपए की ठगी से बचा लिया। साथ ही उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ के डर से भी बाहर निकाला।
तीनों मामलों में साइबर ठगों का दबाव इतना ज्यादा था कि बुजुर्ग असली पुलिस की बात सुनने तक को तैयार नहीं थे। उन्हें पुलिस भी फ्रॉड का हिस्सा लग रही थी। दो मामलों में तो स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई। बुजुर्गों ने पुलिसकर्मियों से बहस की और झड़प भी हुई।
तीनों केस अहमदाबाद के अलग-अलग इलाकों के हैं। हर मामले में बुजुर्गों द्वारा अचानक बड़ी रकम निकालने या ट्रांसफर करने की जल्दबाजी ने बैंक और फंड मैनेजरों को सतर्क किया। इसी शक के आधार पर उन्होंने तुरंत कदम उठाए और अपने ग्राहकों को नुकसान से बचाया।

अब जानिए क्या हैं मामले
केस-1: म्यूचुअल फंड से निकाले पैसे, 1.43 करोड़ रुपए बचाए गए घाटलोडिया इलाके में 71 वर्षीय बुजुर्ग ने म्यूचुअल फंड से 93 लाख रुपए निकाले और 50 लाख रुपए की एफडी तुड़वाई। जब वे यह रकम एक प्राइवेट बैंक खाते में भेजने लगे, तो फंड अधिकारी पलक दोशी को शक हुआ। उन्होंने तुरंत साइबर सेल को सूचना दी। बैंक और पुलिस की मदद से ट्रांजेक्शन रोका गया और 1.43 करोड़ रुपए सुरक्षित बचा लिए गए।
केस-2: ओडिशा के खाते में पैसे भेजने की कोशिश, बैंक मैनेजर ने रोका अहमदाबाद के सैटेलाइट इलाके में सेंट्रल बैंक के 65 वर्षीय ग्राहक 45 लाख रुपए की एफडी तुड़वाकर ओडिशा के एक खाते में ट्रांसफर कराना चाहते थे। पूछताछ में उन्होंने घर खरीदने का कारण बताया। खाते पर शक होने पर मैनेजर जयेश गांधी ने पुलिस को बुलाया। जांच में सामने आया कि बुजुर्ग डिजिटल अरेस्ट के दबाव में थे।
केस-3: वीडियो कॉल पर थीं महिला, मैनेजर ने फोन लेकर रोकी ठगी मणिनगर इलाके में रहने वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कोच 33.35 लाख रुपए ट्रांसफर कराने बैंक पहुंचीं। ब्रांच मैनेजर अभिषेक सिंह ने देखा कि महिला लगातार वीडियो कॉल पर थीं। शक होने पर उन्होंने फोन अपने पास लिया और पुलिस को सूचना दी। साइबर सेल को महिला को यह समझाने में करीब तीन घंटे लगे कि वे साइबर ठगी का शिकार हो रही थीं।
डिजिटल अरेस्ट के ‘रेड फ्लैग्स’ पुलिस ने ऐसे मामलों की पहचान के लिए कुछ संकेत बताए हैं—
- व्यवहार में अचानक बदलाव, जैसे घर से बाहर न निकलना या लोगों से मिलना बंद कर देना
- हर समय घबराया रहना और खुद को कमरे में बंद रखना
- रहस्यमयी कॉल, फोन बंद लेकिन वॉट्सऐप कॉल चालू रहना
- बैंक में बिना स्पष्ट वजह पूरी बचत अनजान खाते में भेजने की जिद

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