March 26, 2026

BJP Appoints Tarun Chugh as Manipur Observer; Presidents Rule to End

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नई दिल्ली/इम्फाल18 मिनट पहले

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तरुण चुग भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं। - Dainik Bhaskar

तरुण चुग भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं।

भाजपा ने मणिपुर में नई सरकार बनाने की कवायद शुरू कर दी है। BJP संसदीय बोर्ड ने सोमवार को पार्टी के नेशनल जनरल सेक्रेटरी तरुण चुग को मणिपुर में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए सेंट्रल ऑब्जर्वर नियुक्त किया है।

मंगलवार को BJP विधायक दल की बैठक होने की संभावना है। अभी बैठक की जगह अभी तय नहीं है। हालांकि, NDA के कई विधायक पहले ही दिल्ली पहुंच गए हैं। मणिपुर से NDA के करीब 20 विधायक रविवार रात को दिल्ली पहुंचे।

अन्य विधायक सोमवार को केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर राजधानी पहुंचे। दिल्ली पहुंचे नेताओं में पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह, विधानसभा अध्यक्ष सत्यव्रत सिंह, पूर्व मंत्री वाई. खेमचंद सिंह और BJP प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी शामिल हैं।

13 फरवरी 2025: बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद लगा राष्ट्रपति शासन

मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच मई 2023 में हिंसा की शुरुआत हुई थी। इसमें अब तक करीब 260 लोगों की मौत हुई है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। राज्य में करीब दो साल तक हिंसा न रोक पाने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली BJP सरकार ने 9 फरवरी 2025 को इस्तीफा दे दिया था।

इसके बाद 60 सदस्यीय विधानसभा को निलंबित कर दिया गया। बीरेन सिंह के इस्तीफे के 4 दिन बाद, 13 फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू किया गया। 12 फरवरी 2026 राष्ट्रपति शासन खत्म होने की आखिरी तारीख है।

मणिपुर विधानसभा में BJP के अभी 37 विधायक

मणिपुर में भाजपा सरकार का कार्यकाल 2027 तक है। इसलिए पार्टी की कोशिश है कि राष्ट्रपति शासन खत्म होने से पहले नई सरकार का गठन हो जाए। फिलहाल मणिपुर विधानसभा में BJP के 37 विधायक हैं।

2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को 32 सीटें मिली थीं, जबकि JD(U) के 5 विधायक बाद में BJP में शामिल हो गए। अन्य दलों में NPF के 5, कांग्रेस के 5, KPA के 2, JD(U) का 1 विधायक और 3 निर्दलीय विधायक शामिल हैं। एक सीट मौजूदा विधायक के निधन के कारण खाली है।

कुकी-मैतेई समुदाय के बीच हिंसा की 3 मुख्य कारण

1. ST (अनुसूचित जनजाति) दर्जे की मांग: 14 अप्रैल 2023 को मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मैतेई समुदाय के लिए ST का दर्जा देने पर सिफारिश भेजने का निर्देश दिया था। इस आदेश के बाद कुकी समुदाय में आक्रोश फैला और हिंसा भड़की।

कुकी पहले से ST श्रेणी में है। उन्हें डर है कि अगर मैतेई को भी ST का दर्जा मिला, तो वे पहाड़ी इलाकों में जमीन खरीद सकेंगे और इससे उनका सांस्कृतिक, सामाजिक और भौगोलिक अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

मणिपुर के इंफाल घाटी में लगभग 10% भूमि क्षेत्र है, जहां मैतेई बहुसंख्यक रहते हैं। बाकी 90% पहाड़ी इलाका कुकी और नगा समुदायों का है। यह क्षेत्र आदिवासी जमीन (Tribal Lands) के अंतर्गत आता है और मैतेई यहां जमीन नहीं खरीद सकते।

2. अलग कुकी प्रशासन की मांग: कुकी समुदाय ‘कुकीलैंड’ या ‘जूमलैंड’ नाम से अलग प्रशासनिक स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं । मैतेई समुदाय और राज्य सरकार इस मांग को राज्य की अखंडता के लिए खतरा मानती है।

3. कुकी पर ड्रग्स तस्करी का आरोप: कुकी समुदाय पर म्यांमार से ड्रग्स की तस्करी का आरोप लगता रहा है। सरकार ने भी कुकी पर अवैध अफीम की खेती की तस्करी में शामिल होने का आरोप लगाया, जिससे सरकार के प्रति उनका अविश्वास और बढ़ गया।

कुकी का मानना है कि उनके समुदाय को बदनाम करने के लिए ऐसे आरोप लगाए जाते हैं। कुकी समुदाय का आरोप है कि मणिपुर सरकार (पूर्व भाजपा सरकार) मैतेई का पक्ष लेती है। वे सुरक्षाबलों और पुलिस पर भी एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हैं।

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