March 26, 2026

China Satellite Tracking US Military Location

0
image-gifs4_1773155890.gif


बीजिंग22 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

28 फरवरी को ईरान पर पहली मिसाइल चलने से पहले ही चीनी सोशल मीडिया पर संकेत मिलने लगे थे कि अमेरिका बड़ा हमला करने की तैयारी कर रहा है। इंटरनेट पर अमेरिकी सैन्य तैयारियों से जुड़ी सैटेलाइट तस्वीरें तेजी से फैलने लगी थीं।

इन तस्वीरों में रनवे पर खड़े लड़ाकू विमान, रेगिस्तानी एयरफील्ड पर उतरते ट्रांसपोर्ट प्लेन और भूमध्यसागर में किसी विमानवाहक पोत के डेक पर तैनात फाइटर जेट दिखाई दे रहे थे। इन तस्वीरों की खास बात यह थी कि इनमें असामान्य रूप से बहुत ज्यादा जानकारी दी गई थी और यह जानकारी अंग्रेजी में नहीं बल्कि मंदारिन (चीनी भाषा) में लिखी हुई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तस्वीरों में अलग-अलग विमानों के नाम बताए गए थे, मिसाइल रक्षा सिस्टम को साफतौर पर चिह्नित किया गया था और सैनिकों की तैनाती को सटीक लोकेशन के साथ दिखाया गया था।

24 फरवरी: सैटेलाइट तस्वीरों में प्रिंस सुल्तान एयरफोर्स बेस पर सैन्य विमान दिखाई दिए।

24 फरवरी: सैटेलाइट तस्वीरों में प्रिंस सुल्तान एयरफोर्स बेस पर सैन्य विमान दिखाई दिए।

चीनी एआई कंपनी ने शेयर की थीं तस्वीरें

इन सैटेलाइट तस्वीरों को एक चीनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी ने ऑनलाइन साझा किया था। एक तस्वीर में इजराइल के ओवदा एयरबेस पर लॉकहीड मार्टिन के F-22 स्टेल्थ फाइटर खड़े दिखाई दे रहे थे। दूसरी तस्वीर में सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर विमानों और सपोर्ट सिस्टम की बढ़ती तैनाती दिखाई गई थी।

इसके अलावा कतर, जॉर्डन और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी नक्शे पर चिह्नित किया गया था। ये सभी तस्वीरें शंघाई स्थित जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस कंपनी मिजार विजन ने साझा की थीं, जिसमें 200 से कम कर्मचारी काम करते हैं।

24 फरवरी: सैटेलाइट तस्वीरों में प्रिंस सुल्तान एयरफोर्स बेस के रनवे पर खड़े फाइटर प्लेन।

24 फरवरी: सैटेलाइट तस्वीरों में प्रिंस सुल्तान एयरफोर्स बेस के रनवे पर खड़े फाइटर प्लेन।

चीनी कंपनी ने कई देशों सैन्य ठिकानों की सैटेलाइट फोटोज जारी की

28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान पर हवाई हमले शुरू किए। इसके जवाब में तेहरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

लेकिन इस संघर्ष के बीच एक और चीज समानांतर रूप से चल रही थी। इंटरनेट पर लगातार सैटेलाइट तस्वीरें सामने आ रही थीं, जिनमें अमेरिकी विमानों, मिसाइल रक्षा सिस्टम और नौसैनिक गतिविधियों को दिखाया जा रहा था। ये सभी तस्वीरें शंघाई स्थित जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस कंपनी मिजार विजन द्वारा साझा की जा रही थीं।

बताया जाता है कि पहली बड़ी तस्वीरों का सेट 20 फरवरी के आसपास सामने आया था।

मिजार विजन ने हाई-रेजोल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों का एक संग्रह जारी किया, जिसमें दक्षिणी इजराइल के ओवदा एयर बेस पर अमेरिकी विमानों की तैनाती, सऊदी अरब और कतर समेत मिडिल ईस्ट के कई देशों में फाइटर जेट की मौजूदगी, अरब सागर में नौसैनिक गतिविधियां और विमानवाहक पोतों की आवाजाही दिखाई गई।

इन सभी तस्वीरों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से अलग-अलग जानकारी भी जोड़ी गई थी। विमानों के प्रकार बताए गए थे, सपोर्ट विमानों की पहचान की गई थी और मिसाइल रक्षा सिस्टम को भी चिह्नित किया गया था।

1 मार्च तक यह डेटा और बढ़ गया था। मिजार विजन ने जॉर्डन, कुवैत, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के सैन्य ठिकानों की भी नई सैटेलाइट तस्वीरें जारी कीं। इन तस्वीरों में अलग-अलग तरह के विमानों, एयर डिफेंस सिस्टम की व्यवस्था और सैनिकों की तैनाती को भी दिखाया गया था।

26 फरवरी: सैटेलाइट तस्वीरों में अल-उदीद एयर बेस के रनवे पर एक KC-135, दो C-130 विमान और करीब 7 अटैक हेलिकॉप्टर खड़े दिखाई दिए।

26 फरवरी: सैटेलाइट तस्वीरों में अल-उदीद एयर बेस के रनवे पर एक KC-135, दो C-130 विमान और करीब 7 अटैक हेलिकॉप्टर खड़े दिखाई दिए।

सटीक लोकेशन के साथ शेयर की गईं तस्वीरें

इन सैटेलाइट तस्वीरों को सटीक लोकेशन के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और चीनी प्लेटफॉर्म वीबो पर पोस्ट किया गया। इनमें से कई पोस्ट चीनी सरकारी मीडिया से जुड़े अकाउंट और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) से जुड़े विश्लेषकों ने भी साझा किए।

इन तस्वीरों में अमेरिका के कई अहम सैन्य प्लेटफॉर्म दिखाई दिए। सैटेलाइट तस्वीरों में इजराइल के ओवदा एयरबेस पर F-22 स्टेल्थ फाइटर खड़े नजर आए, ठीक उस समय जब युद्ध शुरू होने वाला था।

तस्वीरों के अनुसार, सात F-22 विमान रनवे के पास खड़े थे और चार अन्य F-22 रनवे पर दिखाई दे रहे थे। करीब 24 घंटे बाद “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” शुरू हो गया।

अन्य तस्वीरों में सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर सैन्य गतिविधियां भी दिखाई गईं। यहां सात बोइंग E-3 एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम विमान और दो बॉम्बार्डियर E-11 कम्युनिकेशन विमान तैनात बताए गए।

इसके अलावा कतर के अल-उदीद एयर बेस की भी सैटेलाइट तस्वीरें सामने आईं। बाद में यही एयर बेस ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बना।

हालांकि ये तस्वीरें सिर्फ एयरफील्ड तक ही सीमित नहीं थीं। समुद्र में नौसैनिक गतिविधियों को भी ट्रैक किया गया।

अंतरिक्ष से विमानवाहक पोतों की निगरानी

मिजार विजन ने ऐसी सैटेलाइट तस्वीरें भी जारी कीं, जिनमें समुद्र में अमेरिकी नौसेना की गतिविधियां दिखाई दीं। इन तस्वीरों में अमेरिकी नौसेना का सबसे नया विमानवाहक पोत USS जेराल्ड आर फोर्ड भी नजर आया। यह पोत ग्रीस के क्रेट द्वीप पर स्थित सूडा बे नौसैनिक अड्डे से रवाना होने के बाद दिखाई दिया।

तस्वीरों में विमानवाहक पोत के डेक पर बोइंग F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट फाइटर जेट और नॉर्थरोप ग्रुम्मन E-2D अर्ली वार्निंग विमान भी दिखाई दिए।

एक अन्य सैटेलाइट तस्वीर में USS अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत अरब सागर में ओमान के पास एक सप्लाई जहाज के साथ मिलते हुए दिखाई दिया।

कंपनी ने इन सैटेलाइट तस्वीरों को ओपन-सोर्स फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के साथ भी जोड़ा था।

विमान ट्रैकिंग टूल की मदद से विश्लेषकों ने अमेरिकी नौसेना के बोइंग P-8A समुद्री निगरानी विमान को बहरीन के ईसा एयरबेस से उड़ान भरते हुए ट्रैक किया। यह विमान अरब सागर के उस इलाके की ओर जा रहा था, जहां अब्राहम लिंकन कैरियर समूह के मौजूद होने की संभावना बताई जा रही थी।

सैटेलाइट तस्वीरों में USS फोर्ड विमानवाहक पोत को सूडा बे नौसैनिक अड्डे से रवाना होते हुए दिखाया गया।

सैटेलाइट तस्वीरों में USS फोर्ड विमानवाहक पोत को सूडा बे नौसैनिक अड्डे से रवाना होते हुए दिखाया गया।

डेटा विश्लेषण करती है मिजार विजन

चीनी कंपनी मिजार विजन मुख्य रूप से डेटा के विश्लेषण और प्रोसेसिंग का काम करती है। विश्लेषकों के अनुसार इसकी भूमिका एक तरह के ‘इन्फॉर्मेशन एग्रीगेटर’ की है। मिजार, अमेरिका की वैनटोर (पहले मैक्सर इंटेलिजेंस) या प्लैनेट लैब्स जैसी कंपनियों के विपरीत है, जो अपने खुद के सैटेलाइट नेटवर्क चलाती हैं।

मिजार विजन कई तरह के सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटा को एक साथ जोड़ती है, जैसे कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरें, ADS-B के जरिए मिलने वाला विमान ट्रैकिंग सिग्नल और AIS के जरिए मिलने वाला जहाजों का ट्रैकिंग डेटा।

इसके बाद इन सभी डेटा को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल की मदद से प्रोसेस किया जाता है। ये मॉडल अपने आप सैन्य उपकरणों और गतिविधियों की पहचान कर लेते हैं।

इस तरह तैयार किया गया डेटा जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस जैसा होता है, जो आम तौर पर राष्ट्रीय खुफिया एजेंसियां तैयार करती हैं।

इसी वजह से इस कंपनी को ‘इंटेलिजेंस की ब्लूमबर्ग’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह अलग-अलग स्रोतों से मिले डेटा को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़कर उसका विश्लेषण करती है।

सैटेलाइट तस्वीरों में अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान की राजधानी तेहरान में कई इमारतों को हुआ नुकसान दिखाई देता है।

सैटेलाइट तस्वीरों में अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान की राजधानी तेहरान में कई इमारतों को हुआ नुकसान दिखाई देता है।

सैटेलाइट डेटा कहां से आता है

मिजार विजन द्वारा इस्तेमाल की गई सैटेलाइट तस्वीरें दो संभावित स्रोतों से आ सकती हैं-

पहला स्रोत चीन का जिलिन-1 सैटेलाइट नेटवर्क माना जाता है, जिसे चांग गुआंग सैटेलाइट टेक्नोलॉजी संचालित करती है।

जिलिन-1 नेटवर्क में 100 से ज्यादा पृथ्वी की निगरानी करने वाले सैटेलाइट शामिल हैं। इनमें से कई सैटेलाइट सब-मीटर रेजोल्यूशन की तस्वीरें लेने में सक्षम हैं। इतनी साफ तस्वीरों में रनवे पर खड़े विमानों और अलग-अलग मिसाइल रक्षा सिस्टम की पहचान आसानी से की जा सकती है।

दूसरा संभावित स्रोत पश्चिमी कॉमर्शियल सैटेलाइट कंपनियां भी हो सकती हैं, जैसे वैनटोर, प्लैनेट लैब्स और एयरबस डिफेंस एंड स्पेस। ये कंपनियां दुनिया भर में सैटेलाइट नेटवर्क चलाती हैं और सैटेलाइट तस्वीरें व्यावसायिक रूप से ग्राहकों को बेचती हैं।

क्या ईरान ने इस डेटा का इस्तेमाल किया

इस बात का कोई पक्का सबूत नहीं है कि ईरान ने इन सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल अपने हमलों को निर्देशित करने के लिए किया था। हालांकि जिन कई सैन्य ठिकानों को पहले मिजार विजन की पोस्ट में दिखाया गया था, उनमें से कुछ बाद में ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बने।

इनमें कतर का अल-उदीद एयर बेस भी शामिल था। इसके अलावा ईरान ने जॉर्डन में मौजूद सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया, जिनमें मुवाफक सल्ती एयरबेस प्रमुख था। यहां अमेरिकी THAAD मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए इस्तेमाल होने वाला करीब 300 मिलियन डॉलर का AN/TPY-2 रडार सिस्टम नष्ट हो गया।

बाद में आई सैटेलाइट तस्वीरों में इस रडार सिस्टम के नष्ट होने की पुष्टि भी हुई। यह रडार खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल रक्षा के लिए बेहद अहम माना जाता था।

रडार के नष्ट होने के बाद मिसाइलों को रोकने की जिम्मेदारी ज्यादा हद तक पैट्रियट मिसाइल बैटरियों पर आ गई। लेकिन इनमें इस्तेमाल होने वाले PAC-3 इंटरसेप्टर पहले से ही सीमित संख्या में उपलब्ध हैं।

——————————-

ये खबर भी पढ़े…

दावा- ट्रम्प ईरान के खार्ग आइलैंड पर कब्जा चाहते हैं:90% ईरानी तेल का एक्सपोर्ट यहां से, एक्सपर्ट बोले- इस पर हमले से विश्वयुद्ध का खतरा

अमेरिका, इजराइल और ईरान में जारी जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट के पास मौजूद खार्ग आइलैंड की अहमियत अचानक बढ़ गई है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रम्प सरकार इस आइलैंड पर कब्जे को लेकर सैन्य विकल्पों पर विचार कर रही है, क्योंकि यह ईरान की तेल कमाई का सबसे बड़ा सेंटर माना जाता है। पढ़ें पूरी खबर

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *