Economic Survey 2026 Report; India GDP Growth Rate – Nirmala Sitharaman
नई दिल्ली5 मिनट पहले
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 29 जनवरी को देश का ‘आर्थिक रिपोर्ट कार्ड’ यानी इकोनॉमिक सर्वे लोकसभा में पेश किया। इस सर्वे में बताया गया है वित्त वर्ष 2026-2027 में जीडीपी ग्रोथ 6.8% से 7.2% की रेंज में रहने का अनुमान है।
इसके अलावा पिछले एक साल में महंगाई ने आपकी थाली पर कितना असर डाला, खेती-किसानी की क्या हालत है और क्या आने वाले समय में आपके लिए नई नौकरियां बढ़ेंगी या नहीं इसकी भी जानकारी सर्वे में दी गई है। ये कुछ देर में सरकारी वेबसाइट पर अपलोड होगा।
इन 6 बड़ी बातों पर नजर
1. महंगाई: सर्वे में बताया जाएगा कि दाल, तेल और सब्जियों की कीमतें बढ़ने की असली वजह क्या रही। क्या आने वाले दिनों में आपको बढ़ती कीमतों से राहत मिलेगी?

2. GDP: सर्वे में अनुमान जताया गया है कि अगले वित्त वर्ष (FY27) में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रह सकती है। वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और अस्थिरता के बावजूद भारतीय इकोनॉमी की रफ्तार मजबूत बनी हुई है। सर्वे के अनुसार, चालू वित्त वर्ष (FY26) में विकास दर 7.4% रहने की उम्मीद है, जो आरबीआई के 7.3% के अनुमान से भी ज्यादा है।

3. नौकरी: IT, मैन्युफैक्चरिंग या सर्विस सेक्टर। किस सेक्टर ने सबसे ज्यादा नौकरियां दीं और कहां छंटनी का खतरा है? युवाओं के लिए यह सबसे अहम सेक्शन होगा।
4. खेती-किसानी: देश की आधी आबादी खेती पर निर्भर है। सर्वे बताएगा कि इस साल खेती की विकास दर क्या रही और क्या किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार के पास कोई नया प्लान है।
5. सरकारी कर्ज: सरकार अपनी कमाई से ज्यादा जो खर्च करती है, उसे ‘राजकोषीय घाटा’ कहते हैं। घाटा कम होने का मतलब है-मजबूत इकोनॉमी और कम महंगाई।

6. विदेशी मुद्रा भंडार: दुनियाभर में मंदी की आहट के बीच भारत की विदेशी मुद्रा भंडार कितना है? यह भंडार जितना भरा होगा, डॉलर के मुकाबले हमारा रुपया उतना ही मजबूत रहेगा।
इकोनॉमिक सर्वे क्या होता है? ये देश की अर्थव्यवस्था का सालाना रिपोर्ट कार्ड होता है। इसमें पिछले 1 साल में देश की आर्थिक स्थिति का पूरा हिसाब-किताब होता है। इससे पता चलता है कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था की हालत कैसी है।
इकोनॉमिक सर्वे में बीते साल का हिसाब-किताब और आने वाले साल के लिए सुझाव, चुनौतियां और समाधान का जिक्र रहता है। इकोनॉमिक सर्वे को आमतौर पर बजट से एक दिन पहले पेश किया जाता है।
इकोनॉमिक सर्वे करता कौन है? वित्त मंत्रालय के इकोनॉमिक अफेयर्स डिपार्टमेंट की इकोनॉमिक डिवीजन हर साल इकोनॉमिक सर्वे करता है। इसकी अगुवाई इकोनॉमिक डिवीजन के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर CEA करते हैं। फिलहाल डॉ. वी अनंत नागेश्वरन इस डिवीजन के CEA हैं।
सर्वे क्यों जरूरी है? इकोनॉमिक सर्वे अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर है। इससे पता चलता है कि देश की अर्थव्यवस्था कैसी है और इसमें सुधार के लिए क्या करने की जरूरत है।
क्या इसे पेश करना जरूरी है? सरकार सर्वे को पेश करने और इसमें दिए गए सुझावों या सिफारिशों को मानने के लिए बाध्य नहीं है। आमतौर पर सरकार इसके सुझावों के मुताबिक ही बजट तैयार करती है।
1950-51 में पेश हुआ था पहला सर्वे देश का पहला इकोनॉमिक सर्वे 1951 में पेश किया गया है। तब यह केंद्रीय बजट का ही एक हिस्सा था। 1964 के बाद से इसे बजट से अलग कर दिया गया। तब से बजट डे से एक दिन पहले इकोनॉमिक सर्वे संसद में पेश होता है।