March 28, 2026

Gangolihat in Pithoragarh has more than 16 mysterious caves. | उत्तराखंड में 8 मंजिला रहस्यमयी गुफा: बनावट देख वैज्ञानिक-विशेषज्ञ हैरान, ग्लोबल टूरिस्ट डेस्टिनेशन बना रही सरकार – Pithoragarh News

0
gifmagicsite-49_1767467341.gif


पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट में मिली महाकालेश्वर गुफा।

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में 200 मीटर गहरी आठ मंजिला गुफा मिली है, जिसे देख वैज्ञानिक और विशेषज्ञ भी हैरान हैं। साल 2020 में गंगोलीहाट में खोजी गई इस ‘महाकालेश्वर गुफा’ के साथ ही क्षेत्र में अब तक 16 गुफाएं मिल चुकी हैं, जिन्हें अब सरकार एक बड़े ग्लोबल

.

प्रसिद्ध हाटकालिका मंदिर से महज एक किलोमीटर दूर स्थित महाकालेश्वर गुफा को खोजने का श्रेय स्थानीय युवा सुरेंद्र सिंह बिष्ट और उनके ‘गंगावली वंडर्स ग्रुप’ (ऋषभ रावल, भूपेश पंत और पप्पू रावल) को जाता है। क्षेत्र की अन्य गुफाओं की तरह यहां भी चट्टानों पर पौराणिक आकृतियां उभरी हैं। शिवलिंग की आकृति पर चट्टान से पानी टपक रहा है। इसके अलावा शेषनाग व अन्य पौराणिक देवी, देवताओं के चित्र भी उभरे हैं। यह अब तक मिली गुफाओं में सबसे बड़ी है। गुफा के अंदर पर्याप्त आक्सीजन भी है।

गुफा की चट्‌टानों पर उभरी पौराणिक आकृतियां।

गुफा की चट्‌टानों पर उभरी पौराणिक आकृतियां।

ऐसे हुई महाकालेश्वर गुफा की खोज

खोजकर्ताओं को पहले 35 फीट नीचे उतरना पड़ा। नीचे उतरते ही उन्हें पत्थरों से बनी प्राकृतिक सीढ़ियां दिखी। इन सीढ़ियों के जरिए वे आठ मंजिलों तक नीचे गए। इसके आगे भी रास्ता था, लेकिन वहां पहुंचना संभव नहीं हो सका। लगभग 200 मीटर लंबी इस गुफा की चट्टानों पर पौराणिक आकृतियां उभरी हैं। इसका नाम मां काली के नाम पर ‘महाकालेश्वर गुफा’ रखा गया है।

टॉर्च की रोशनी से दीवारों पर उभरी आकृतियों को देखता युवक।

टॉर्च की रोशनी से दीवारों पर उभरी आकृतियों को देखता युवक।

चरवाहों ने ढूंढ निकाली ‘लटेश्वर’ गुफा

रहस्यों का सिलसिला यहीं नहीं थमता। लाली गांव के पास कुछ युवक (गौरव, दीपांशु, राहुल और आशु पंत) जब गाय-बकरी चराने गए, तो उन्हें एक संकरा रास्ता दिखा। जिसे स्थानीय भाषा में ‘उडियार’ कहा जाता था। जब टीम इसके भीतर गई, तो वे दंग रह गए। 100 मीटर लंबी इस गुफा में छत से पानी टपक रहा था और दीवारों पर अद्भुत कलाकृतियां बनी थीं। इसे ग्रामीणों ने ‘लटेश्वर’ नाम दिया है।

गंगोलीहाट स्थित प्रसिद्ध पाताल भुवनेश्वर की गुफा।

गंगोलीहाट स्थित प्रसिद्ध पाताल भुवनेश्वर की गुफा।

पत्थरों पर उकेरी कुदरती कलाकारी

मानसखंड के पुराणों में गंगोलीहाट क्षेत्र में 21 गुफाओं का जिक्र मिलता है, जिनमें से अब तक 16 खोजी जा चुकी हैं। इनके भीतर शिवलिंग, शेषनाग और विभिन्न देवी-देवताओं की आकृतियां उभरी हुई हैं। इन्हें देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी महान कलाकार ने छेनी-हथौड़ी से इन्हें तराशा हो, जबकि ये पूरी तरह प्राकृतिक हैं। पाताल भुवनेश्वर की तरह ही यहां कोटेश्वर, शैलेश्वर, भोलेश्वर और वाणेश्वर जैसी गुफाएं भी आस्था का केंद्र बनी हुई हैं।

गंगोलीहाट के घने जंगल में अध्यात्म व शांति का पावन मंदिर।

गंगोलीहाट के घने जंगल में अध्यात्म व शांति का पावन मंदिर।

‘ग्लोबल टूरिज्म’ के नक्शे पर आएगा गंगोलीहाट

इन गुफाओं की खोज के बाद अब पर्यटन विभाग इन्हें विकसित करने की तैयारी में जुट गया है। जिला पर्यटन विकास अधिकारी कीर्ति चंद्र आर्य ने बताया कि इन गुफाओं के विकास के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन (सरकार) को भेज दिया गया है। बजट की स्वीकृति मिलते ही यहां पर्यटकों के लिए बेहतर और सुरक्षित रास्ते बनाए जाएंगे। बैठने और विश्राम के लिए उचित स्थान का निर्माण होगा। साहसिक और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा।

————- ये खबर भी पढ़ें…

उत्तराखंड की रहस्यमयी गुफा में सालभर जा सकेंगे टूरिस्ट:पाताल भुवनेश्वर में लगेंगे ऑक्सीजन प्लांट; त्रेता युग में अयोध्या के राजा ने की थी खोज

पिथौरागढ़ जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध पाताल भुवनेश्वर गुफा अब वर्षभर पर्यटकों के लिए खुली रखने की तैयारी शुरू हो गई है। बरसात के मौसम में यहां ऑक्सीजन की कमी की समस्या रहती है, जिसे दूर करने के लिए गुफा परिसर में ऑक्सीजन प्लांट लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इससे श्रद्धालु बिना मौसम की बाधा के पूरी गुफा के दर्शन कर सकेंगे। (पढ़ें पूरी खबर)



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *