In Bengaluru, a wife pleaded for her husband on the street. | बेंगलुरू में पति के लिए सड़क पर गिड़गिड़ाती रही पत्नी: पहले हॉस्पिटल में डॉक्टर, दूसरे से एंबुलेंस नहीं मिली, आगे बढ़े तो एक्सीडेंट हुआ, मौत
बेंगलुरू6 मिनट पहले
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कर्नाटक की राजधानी बेंगुलुरू में लचर मेडिकल व्यवस्था और मानवीय संवेदनहीनता के चलते एक शख्स की बीच सड़क पर तड़फ-तड़फकर मौत हो गई। यह हादसा बीते 13 दिसंबर का है, जिसका सीसीटीवी वीडियो अब सामने आया है। वीडियो में महिला को जमीन पर घायल पड़े पति के लिए मदद मांगते देखा जा सकता है।
बेंगलुरु में रहने वाले 34 साल के वेंकटरमनन की पत्नी रूपा रमनन ने मीडिया को बताया कि शनिवार सुबह करीब साढ़े 3 बजे वेंकट के सीने में तेज दर्द हुआ था। रूपा उन्हें स्कूटी से पास के एक प्राइवेट हॉस्पिटल ले गई। लेकिन वहां कोई डॉक्टर नहीं था। इसके बाद दोनों दूसरे हॉस्पिटल पहुंचे, जहां ईसीजी करने पर पता चला कि वेंकट को दिल का दौरा पड़ा था।
लेकिन, इलाज करने की बजाय हॉस्पिटल स्टाफ ने उन्हें जय नगर में श्री जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवैस्कुलर साइंसेज जाने को कह दिया गया। वेंकटरमनन की हालत बिगड़ रही थी, लेकिन हॉस्पिटल में एंबुलेंस नहीं थी। इसलिए हॉस्पिटल ने उनसे कहा कि आप बिना समय गंवाए हॉस्पिटल के लिए रवाना हो जाएं।

स्कूटी स्लिप होने से पति-पत्नी सड़क पर गिरे।

पति को उठाने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रही।

सड़क से गुजर रहे वाहन चालकों के सामने हाथ जोड़कर भी मदद मांगी।

किसी के न रुकने पर इस तरह मदद के लिए बिलखती रही पत्नी।
सड़क पर स्कूटी हो गई स्लिप इसके बाद दोनों जयनगर के लिए रवाना हुए, लेकिन बीच रास्ते में ही गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया। चोट लगने के चलते वेंकट जमीन से उठने की स्थिति में नहीं थे। पति की मदद के लिए रूपा आसपास से गुजर रहे लोगों से मदद की गुहार लगाती रहीं, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की।
रूपा के फोन पर उसकी बहन भी मौके पर पहुंच गई थी। इसके बाद दोनों ने राहगीरों से मदद मांगनी शुरू की। करीब 15 मिनट बाद एक कैब वाला रुका और दोनों को अस्पताल लेकर पहुंचा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टर्स ने वेंकटरमनन को मृत घोषित कर दिया।
गैरेज में मैकेनिक थे वेंकटरमनन दक्षिण बेंगलुरु के बालाजी नगर में रहने वाले वेंकटरमनन एक गैरेज में मैकेनिक का काम करते थे। रात भर काम करने के बाद वे तड़के सुबह करीब 4 बजे घर लौटे ही थे कि तभी उनके सीने में दर्द होने लगा। उन्हें पहले भी माइनर अटैक आ चुके है, लेकिन इस बार उनकी हालत तेजी से बिगड़ गई। इसके चलते वे पत्नी को लेकर अस्पताल के लिए निकले और हादसे का शिकार हो गए।
परिवार में दो मासूम बच्चे और बूढ़ी मां वेंकटरमनन के परिवार में 5 साल का बेटा, डेढ़ साल की बेटी और बुजुर्ग मां भी है। परिवार का गुजर बसर वेंकटरमनन की सैलरी से ही होता था। लेकिन, अब उनके जाने के बाद न सिर्फ मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया ही उठ गया, बल्कि अब परिवार पर आर्थिक संकट भी आन खड़ा हुआ है।

मदद के लिए रूपा एक कार के पीछे भी भागी, लेकिन कार नहीं रुकी।
पति की आंखें डोनेट कीं लोगों की संवेदनहीनता के बावजूद रूपा ने अपने पति की आंखें डोनेट कर दीं। रूपा ने रोते हुए कहा- अगर किसी ने समय पर हमारी मदद की होती, तो शायद मेरे पति बच जाते। वह जीना चाहते थे। इसी वजह से असहनीय दर्द के बावजूद वे अस्पताल पहुंचने की पूरी कोशिश कर रहे थे।
रूपा ने आरोप लगाया कि निजी अस्पताल ने न तो उनके पति का इलाज किया और न ही एंबुलेंस की व्यवस्था की। उन्होंने मांग की कि उस अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की जाए। रूपा का आरोप है कि हमारी आर्थिक स्थिति देखकर शायद अस्पातल ने पति के इलाज में जानबूझकर अनदेखी की थी।
लोगों की प्रतिक्रिया पर दुख जताते हुए रूपा ने कहा कि यह घटना समाज में बढ़ती असंवेदनशीलता को उजागर करती है। उस वक्त लोगों का व्यवहार बेहद अमानवीय था। संकट में फंसे किसी व्यक्ति की मदद करने से उसकी जान बच सकती है। मैं सभी से अनुरोध करती हूं कि ऐसे हालात में रुकें और लोगों की मदद करें। आपकी मदद से शायद सामने वाले को वह दर्द न सहना पड़े, जो अब हमें पूरी जिंदगी सहना है।