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तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी3 मिनट पहले
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ट्रम्प ने सोमवार रात (भारतीय समय के मुताबिक) ईरान जंग को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान जंग को लेकर सोमवार रात (भारतीय समय के मुताबिक) प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की जंग अच्छी चल रही है। अमेरिका चाहे तो पूरे ईरान को एक ही रात में खत्म कर सकता है। अगर जरूरत पड़ी, तो वह रात कल भी हो सकती है।
ट्रम्प ने ईरान में फंसे अमेरिकी पायलट को बचाने वाले ऑपरेशन को ‘ऐतिहासिक’ बताया। उन्होंने कहा, “मैंने अमेरिकी सेना को आदेश दिया था कि हमारे बहादुर सैनिकों को सुरक्षित घर लाने के लिए जो भी जरूरी हो, वह किया जाए।”
उन्होंने कहा, “यह बहुत जोखिम भरा फैसला था, क्योंकि हमने 1-2 पायलट को निकालने के लिए 100 जान को दांव पर लगा दिया था। ट्रम्प ने इसे हाल के सालों के सबसे खतरनाक ऑपरेशनों में से एक बताया।
ट्रम्प की प्रेस कॉन्फ्रेंस की 5 बड़ी बातें…
- ईरान को धमकी- अमेरिका चाहे तो पूरे ईरान को एक ही रात में खत्म कर सकता है। अगर जरूरत पड़ी, तो यह कार्रवाई कल रात भी हो सकती है। अभी युद्ध अमेरिका के मुताबिक चल रहा है।
- रेस्क्यू ऑपरेशन- ईरान में फंसे सैनिक को बचाने के लिए अमेरिका ने 155 सैन्य विमानों के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया था। इसमें फाइटर जेट, बॉम्बर्स और रेस्क्यू प्लेन शामिल थे।
- ईरान में हजारों हमले किए- अब तक अमेरिका ने ईरान के 13,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया है और पिछले 37 दिनों में 10,000 से ज्यादा बार लड़ाकू उड़ानें भरी हैं।
- खबर लीक करने वाले को धमकी- जिस इंसान ने मीडिया में ईरान में फंसे दूसरे पायलट के बारे में खबर लीक की है उसे ढूंढा जाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो मीडिया कंपनी पर भी कार्रवाई हो सकती है।
- अमेरिकी विमान गिरने की बात मानी- ट्रम्प ने माना कि ईरान ने एक अमेरिकी F-15 विमान गिराया था, लेकिन यह दुश्मन की किस्मत थी यानी ये सिर्फ एक लकी हिट थी।

ट्रम्प के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन डैन केन और CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ भी मौजूद थे।
ट्रम्प बोले- रेस्क्यू मिशन के दौरान दुश्मन को धोखे में रखा
ट्रम्प ने यह भी बताया कि दोनों पायलट को बचाने के लिए दो रेस्क्यू मिशन किए गए। पहले मिशन में 21 अमेरिकी सैन्य विमान लगाए गए थे। जबकि दूसरे रेस्क्यू मिशन में कुल 155 अमेरिकी विमान शामिल थे। इनमें 4 बॉम्बर विमान, 64 फाइटर जेट, 48 ईंधन भरने वाले टैंकर विमान और 13 रेस्क्यू विमान शामिल थे।
ट्रम्प के मुताबिक ये सभी कई घंटों तक ईरान के ऊपर ऑपरेशन करते रहे, कुछ समय तो दिन के उजाले में भी। इस मिशन में धोखे की रणनीति (डिकॉय) का भी इस्तेमाल किया गया। कई विमानों को अलग-अलग रास्तों पर भेजा गया ताकि दुश्मन भ्रमित हो जाए।
ट्रम्प ने कहा, “हमने सात अलग-अलग जगहों पर ऐसा माहौल बनाया, जहां उन्हें लगा कि हम अपने सैनिक को ढूंढ रहे हैं।”
ट्रम्प ने पायलट की बहादुरी का भी जिक्र किया
ट्रम्प ने एक घायल पालयट की बहादुरी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब F-15E फाइटर जेट गिराया गया, तो उसमें मौजूद अधिकारी पैराशूट से नीचे उतरा और गंभीर हालत में भी खुद को बचाने की कोशिश करता रहा।
उन्होंने कहा, “वह पहाड़ी इलाके में घायल होने के बावजूद चढ़ाई करता रहा, उसके चेहरे से काफी खून बह रहा था। लेकिन फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने अपनी ट्रेनिंग के अनुसार खतरनाक पहाड़ी इलाके में ऊपर की ओर चढ़ता गया, ताकि दुश्मन से बच सके और पकड़ा न जाए।”
ट्रम्प के मुताबिक घायल अफसर ने खुद ही अपने जख्मों का इलाज किया और अमेरिकी फोर्स से संपर्क बनाए रखा। बाद में उसे हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकाल लिया गया। उन्होंने कहा यह हैरान करने वाली बात है कि पूरे ऑपरेशन में कोई भी घायल नहीं हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़ी खबर पढ़ें…

तस्वीर में अमेरिकी ट्रांसपोर्ट विमान जलते हुए नजर आ रहे हैं। इन्हें अमेरिकी सैनिकों ने ईरान से निकलने से पहले आग लगा दिया ताकि दुश्मनों को उनकी तकनीक हासिल न हो। (सोर्स- Osinttechnical)
ट्रम्प बोले- ऑपरेशन के लिए सभी सहमत नहीं थे
ट्रम्प ने कहा कि ईरान में गिराए गए F-15E फाइटर जेट के क्रू को बचाने वाले ऑपरेशन को लेकर उनके सभी सैन्य सलाहकार एकमत नहीं थे। उन्होंने कहा, “हर कोई इसके पक्ष में नहीं था। कुछ बहुत प्रोफेशनल सैन्य अधिकारी ऐसे थे जो इस ऑपरेशन को करने के पक्ष में नहीं थे।”
ट्रम्प के मुताबिक इस मिशन में जान का बड़ा खतरा था, इसी वजह से कुछ सलाहकार इसे सही नहीं मान रहे थे। उन्होंने कहा, “सेना के अंदर कुछ लोगों का मानना था कि यह समझदारी भरा फैसला नहीं है। सैकड़ों लोगों की जान जा सकती थी।”
हालांकि, ट्रम्प के मुताबिक रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन इस मिशन के समर्थन में थे। ट्रम्प ने कहा कि उन्हें इस ऑपरेशन के खतरे के बारे में पूरी जानकारी दी गई थी।
उन्होंने बताया, “मुझे कहा गया कि यह बहुत खतरनाक मिशन है। मैंने इसे समझा। उन्होंने यह नहीं कहा कि यह बेवकूफी है, बल्कि कहा कि इसमें सैकड़ों लोगों की जान जा सकती है।”

ट्रम्प के संबोधन के दौरान उनके बाए रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और सबसे दाएं जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन।
ट्रम्प ने पहली बार अमेरिकी प्लेन गिरने की बात मानी
ट्रम्प कहा कि पिछले 37 दिनों में अमेरिकी सेना ने ईरान के ऊपर 10,000 से ज्यादा कॉम्बैट फ्लाइट्स की हैं। उन्होंने यह भी माना कि पिछले हफ्ते ईरान में एक अमेरिकी F-15 विमान गिराया गया। ट्रम्प ने कहा कि इस पूरे ऑपरेशन के दौरान दुश्मन ने पहली बार कोई मानव संचालित विमान गिराया।
ट्रम्प ने आगे कहा, “एक हेलिकॉप्टर गोलियों से बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर वापस लौटा। यह कमाल की बात है कि हमारे हेलिकॉप्टर ने यह सब झेल लिया। हमारी मशीन बहुत जबर्दस्त है।”
पायलट की खबर लीक करने वाले पत्रकार की तलाश
ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी एजेंसियां उस शख्स की तलाश कर रही हैं, जिसने यह जानकारी लीक की कि पहले पायलट के बचाव के बाद दूसरा पायलट भी ईरान में फंसा हुआ है।
उनके मुताबिक, इस खबर से पहले ईरान को दूसरे पायलट की स्थिति की जानकारी नहीं थी, लेकिन लीक होने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन और मुश्किल हो गया।
ट्रम्प ने यह भी कहा कि जिस पत्रकार ने इस खबर को प्रकाशित किया, अगर वह अपने सोर्स (सूचना देने वाले) का नाम नहीं बताएगा, तो उसे जेल भेजा जा सकता है।
उन्होंने कहा, “हम उस लीक करने वाले को ढूंढने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। हमें लगता है कि हम उसे ढूंढ लेंगे, क्योंकि हम उस मीडिया कंपनी के पास जाएंगे और कहेंगे। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है, जानकारी दो या जेल जाने के लिए तैयार रहो।”
ट्रम्प बोले- आजादी के लिए ईरान के लोग थोड़ा दर्द सहेंगे
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार ने ट्रम्प से सवाल पूछा कि ईरान में ऊर्जा ठिकाने और इंफ्रास्क्ट्रक्चर पर हमला करना क्या आम नागरिकों को सजा देना नहीं है? इस पर उन्होंने कहा कि अगर ईरान पर हमले से वहां के लोगों को आजादी मिलती है, तो वे “इस दर्द को सहने के लिए तैयार होंगे।”
ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि ईरान के लोग चाहते हैं कि अमेरिकी सेना अपनी बमबारी जारी रखे। उन्होंने कहा, “हमें कई मैसेज मिले हैं। जिन इलाकों में बम गिर रहे हैं, वहीं रहने वाले लोग भी कह रहे हैं, ‘बमबारी जारी रखो।’ और जब हम वहां से हटते हैं, तो वे कहते हैं- वापस आओ, वापस आओ”

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों के सवाल लेते हुए राष्ट्रपति ट्रम्प।
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ईरान जंग से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…
ट्रम्प फिर बोले-मेरा बस चले तो ईरानी तेल कब्जा लूं:इससे खूब पैसा कमाता; ईरान ने अमेरिका का सीजफायर प्रस्ताव खारिज किया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि अगर उनके पास मौका होता तो वे ईरान के तेल पर कब्जा कर लेते और खूब पैसा कमाते। ट्रम्प कुछ दिन पहले भी ईरानी तेल पर कब्जा करने की बात कह चुके हैं।
उन्होंने कहा कि ईरान के लोग आजादी चाहते हैं और वहां के हालात ऐसे हैं कि लोग बदलाव देखना चाहते हैं। हालांकि ट्रम्प ने यह भी माना कि अमेरिका के लोग अब युद्ध से थक चुके हैं और चाहते हैं कि सैनिकों को वापस घर बुलाया जाए।
वहीं ईरान ने अमेरिका की तरफ से आए नए सीजफायर प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ईरान की सरकारी एजेंसी IRNA के मुताबिक, तेहरान ने कहा है कि वह अस्थायी युद्धविराम नहीं, बल्कि युद्ध का पूरी तरह और हमेशा के लिए खात्मा चाहता है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
