Maharashtra civic polls: 68 candidates win unopposed before voting | महाराष्ट्र निकाय चुनाव- बिना वोटिंग के 68 कैंडीडेट निर्विरोध जीते: बीजेपी के 44 उम्मीदवार, शिंदे के 22; बची सीटों पर 15 जनवरी को वोटिंग
मुंबई20 मिनट पहले
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बीजेपी-शिंदे की महायुति कई जगह मिलकर चुनाव लड़ रही है। विपक्ष में कांग्रेस, शिवसेना-UBT, MNS और NCP-SP शामिल हैं।
महाराष्ट्र में नगर निगम चुनाव की वोटिंग से 13 दिन पहले बीजेपी गठबंधन (महायुति) ने 68 सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज कर ली है। बीजेपी को 44 सीटें मिलीं, एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 22 सीटें अपने नाम कीं। वहीं अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के खाते में दो सीटें आईं।
नियमों के मुताबिक, अगर किसी सीट पर सिर्फ एक ही उम्मीदवार मैदान में रह जाता है और कोई दूसरा प्रत्याशी नामांकन नहीं करता या नाम वापस ले लेता है, तो उस उम्मीदवार को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है।
इन 66 सीटों पर भी यही स्थिति बनी, इसलिए मतदान कराने की जरूरत ही नहीं पड़ी। यानी अब 29 नगर निगम की बची हुई 2801 सीटों पर 15 जनवरी को वोटिंग होगी। नतीजे 16 जनवरी को आएंगे।

सबसे ज्यादा बीजेपी कैंडीडेट कल्याण-डोंबिवली नगर निगम से जीते
बीजेपी के जो 44 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं। वे सबसे ज्यादा ठाणे जिले के कल्याण-डोंबिवली नगर निगम से हैं। इसके बाद पुणे, पिंपरी चिंचवड़, पनवेल, भिवंडी, धुले, जलगांव और अहिल्यानगर नगर निगम से चुनाव जीते। पुणे के वार्ड नंबर 35 से बीजेपी उम्मीदवार मंजूषा नागपुरे और श्रीकांत जगताप निर्विरोध चुने गए। ये दोनों 2017 से 2022 के बीच भी इसी वार्ड से चुने गए थे।
वोटिंग से पहले जीत पर विपक्ष का रिएक्शन
- MNS नेता अविनाश जाधव ने कहा, अगर आप वोटिंग से पहले ही जीतना चाहते हैं तो चुनाव क्यों करवाते हैं। दोनों सत्ताधारी पार्टियों को इसे आपस में बांट लेना चाहिए। भारत और राज्य में लोकतंत्र खत्म हो गया है। उन्होंने विपक्ष के कमजोर उम्मीदवारों को चुना और अपना काम करवा लिया।
- शिवसेना (UBT) नेता अरविंद सावंत ने भी ऐसी निर्विरोध जीत सुनिश्चित करने के लिए विपक्षी उम्मीदवारों पर दबाव डालने का आरोप सत्ताधारी पार्टियों पर लगाया।
मुंबई में 32 सीटों पर BJP-शिंदे सेना और ठाकरे सेना-MNS के बीच सीधा मुकाबला
मुंबई नगर निकाय की 227 सीटों में से 32 सीटों पर BJP-शिवसेना गठबंधन और शिवसेना (UBT)-महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के बीच सीधा मुकाबला होगा। यह स्थिति इसलिए बनी है क्योंकि कांग्रेस-बहुजन वंचित अघाड़ी (VBA) गठबंधन ने इन सीटों पर कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है।
कांग्रेस ने अब तक मुंबई में 143 उम्मीदवारों की घोषणा की है। VBA के 46 सीटों पर चुनाव लड़ने और वामपंथी दलों और राष्ट्रीय समाज पार्टी सहित अन्य सहयोगियों को छह सीटें दी गई है। यानी कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 195 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।
इससे 32 सीटें बिना तीसरे मोर्चे के उम्मीदवार के रह जाती हैं, जिससे वोटों का बंटवारा नहीं होगा।
BMC चुनाव क्यों है साख का सवाल
- BMC चुनाव सिर्फ नगर निगम का नहीं, बल्कि मुंबई की सत्ता हासिल करने की लड़ाई है। इसलिए यह महायुति और महाविकास अघाड़ी के लिए साख का सवाल है।
- 74,000 करोड़ रुपए के बजट वाली एशिया की सबसे बड़ी सिविक बॉडी BMC पर बिना बंटे शिवसेना ने (1997-2017) तक राज किया था। तब BJP उसकी सहयोगी थी।
- मुंबई नगर निगम का बजट गोवा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के बजट से भी बड़ा है।
- यही कारण है कि भाजपा, उद्धव ठाकरे की शिवसेना, एकनाथ शिंदे की शिवसेना, कांग्रेस, शरद पवार और अजीत पवार अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं।
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