March 26, 2026

Modi-Putin’s Fortuner ride goes viral on social media | मोदी-पुतिन की फोर्च्यूनर राइड सोशल मीडिया पर वायरल: जानें जपानी ब्रांड की सफेद कार ही क्यों इस्तेमाल की, SUV ऑनर्स के लिए प्राउड मोमेंट बता रहे लोग

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नई दिल्ली1 घंटे पहले

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर को 23वें भारत-रूस समिट के लिए दो दिन के भारत दौरे पर पहुंचे। उन्हें रिसीव करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी प्रोटोकॉल तोड़कर खुद दिल्ली के पालम एयरपोर्ट आए।

यहां से दोनों लीडर एक ही कार में बैठकर पीएम आवास पहुंचे। खास बात ये रही कि ये कोई बुलेटप्रूफ कार नहीं, बल्कि वाइट कलर की टोयोटा फॉर्च्यूनर थी।

अब प्रधानमंत्री और रूसी राष्ट्रपति की ये राइड अब इंटरनेट और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जहां लोग फॉर्च्यूनर ओनर्स के लिए ‘प्राउड मोमेंट’ बता रहे हैं। वहीं, कुछ एक्सपर्ट्स इसे पश्चिमी देशों के लिए एक डिप्लोमैटिक सिग्नल मान रहे हैं।

चलिए जानते हैं सफेद कलर की कार का ही इस्तेमाल क्यों किया गया, ये जापानी ब्रांड की कार क्यों यूज की गई। साथ ही इस कार के बारे में डिटेल में जानेंगे…

मोदी-पुतिन ऑफिशियल कार छोड़ टोयोटा फॉर्च्यूनर में एक साथ बैठे

आमतौर पर विदेशी मेहमानों के लिए रेंज रोवर या मर्सिडीज जैसी लग्जरी कारें इस्तेमाल होती हैं। वहीं, पुतिन हर विदेशी दौरे पर अपनी बुलेटप्रूफ लिमोजिन कार ऑरस सीनेट का इस्तेमाल करते हैं और पीएम मोदी की ऑफिशियल कारें रेंज रोवर (यूके मेड) और मर्सिडीज-मेबैक S650 गार्ड हैं।

दोनों लीडर ने अपनी कारों को छोड़ टोयोटा फॉर्च्यूनर में एक साथ सफर किया। इसके पीछे प्रधानमंत्री की रेंज रोवर और पुतिन की बुलेटप्रूफ लग्जरी कार ऑरस सीनेट भी चल रही थीं।

वाइट फॉर्च्यूनर क्यों?

अफसरों का कहना है कि ऐसी गाड़ियां हाल ही में अपडेट हुए VIP फ्लीट का हिस्सा हैं, जो हाई-प्रोफाइल मूवमेंट्स के लिए सेफ्टी, एमिशन और ऑपरेशनल स्टैंडर्ड्स को पूरा करने के लिए मेंटेन की जाती हैं।

सिक्योरिटी एजेंसियां VIP मूवमेंट्स के लिए अक्सर वाइट फॉर्च्यूनर इस्तेमाल करती हैं, क्योंकि ये मॉडल गवर्नमेंट फ्लीट्स में काफी यूज होती हैं, कन्वॉय में आसानी से घुल-मिल जाती हैं और हाई स्टेबिलिटी व ग्राउंड क्लीयरेंस देती हैं।

यूनिफॉर्म कलर और स्टैंडर्ड लुक की वजह से गाड़ी लो प्रोफाइल रख पाती है, साथ ही सेफ्टी भी सुनिश्चित हो जाती है।

सिक्योरिटी प्रोटोकॉल्स

कन्वॉय में आमतौर पर आर्मर्ड व्हीकल्स होते हैं, लेकिन ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी के लिए फॉर्च्यूनर और इनोवा जैसी सपोर्टिंग कारें भी जोड़ी जाती हैं। फॉर्च्यूनर का रेगुलर रजिस्ट्रेशन प्लेट ध्यान खींच गया, क्योंकि VIP मूवमेंट्स में ज्यादातर स्पेशल नंबर प्लेट्स या अनमार्क्ड गाड़ियां इस्तेमाल होती हैं।

हालांकि, अफसरों ने ये नहीं बताया कि महाराष्ट्र रजिस्टर्ड फॉर्च्यूनर क्यों यूज हुई, लेकिन सिक्योरिटी एजेंसियां हाई-प्रोफाइल विज़िट्स के लिए कई स्टेट्स में फ्लीट रखती हैं।

वेस्ट को मैसेज या प्रैक्टिकल वजह?

  • सोर्स बताते हैं कि टोयोटा फोर्च्यूनर का चॉइस सीटिंग की वजह से था। रेंज रोवर में थर्ड रो नहीं है, जबकि फोर्च्यूनर में इंटरप्रेटर्स के लिए स्पेस था। दोनों देशों की सिक्योरिटी टीम्स ने इसे क्लियर किया।
  • वहीं, कुछ एक्सपर्ट्स इसे डिप्लोमैटिक सिग्नल मान रहे हैं। यूक्रेन वॉर के चौथे साल में यूके-जर्मनी ने रशिया पर सैंक्शंस लगाए हैं। पुतिन का यूरोपियन ब्रांड कार में सफर खराब ऑप्टिक्स होता।

डिफेंस एनालिस्ट कर्नल रोहित देव ने X पर पोस्ट किया, ‘ये वेस्ट को मैसेज है।’

बीजेपी स्पोक्सपर्सन शहजाद पूनावाला ने कहा, ‘स्मार्ट लोग समझ जाएंगे क्यों।’

एक यूजर ने लिखा, ‘नो अमेरिकन, नो यूरोपियन, जापानीज कार। सिग्नलिंग शुरू!’

ये कदम दिखाता है कि डिप्लोमेसी में सिंबॉलिक स्टेप्स कितने जरूरी होते हैं।



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