March 27, 2026

Nanhi Pari Case: Review Petition Still Not Accepted, Family Calls for Fresh Protest | नन्ही परी केस-CM के निर्देशों के बावजूद लंबित रिव्यू पिटीशन: सुप्रीम कोर्ट में अभी तक नहीं हुई एक्सेप्ट, परिजन बोले- फिर आंदोलन करें उत्तराखंडी – Pithoragarh News

0
gifmagicsite-13_1767814568.gif


नन्ही परी को इंसाफ दिलाने के लिए उत्तराखंड में जगह जगह प्रदर्शन हुए थे।

पिथौरागढ़ की नन्ही परी कांड में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल पुनर्विचार याचिका अभी तक एक्सेप्ट नहीं हुई है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने 112 दिन पहले यानी 18 सितंबर को रिव्यू पिटीशन के निर्देश दिए थे लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई ना होने से परिजनों में गहरी न

.

जिसके बाद अब परिजनों ने एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाने का फैसला लिया है और इसके लिए प्रदेश की जनता से समर्थन मांगा है। उनका कहना है कि अगर अब भी न्यायिक प्रक्रिया में ठोस प्रगति नहीं दिखी, तो जन आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

इस बीच कांग्रेस ने भी सरकार को घेरते हुए चेतावनी दी है कि अगर नन्ही परी को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठे, तो पार्टी जनता के साथ मिलकर सड़कों पर उतरेगी और पिथौरागढ़ बंद का आह्वान भी किया जाएगा।

नन्ही परी को इंसाफ दिलाने के लिए समाजसेविका योगिता भयाना भी सड़कों पर उतरी थीं।

नन्ही परी को इंसाफ दिलाने के लिए समाजसेविका योगिता भयाना भी सड़कों पर उतरी थीं।

18 सितंबर को सीएम ने दिए थे रिव्यू पिटीशन के निर्देश

18 सितंबर को पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं न्याय विभाग को निर्देश दिए थे कि नन्ही परी प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर मजबूत पैरवी के साथ दोषी को सजा सुनिश्चित कराई जाए। सरकार की ओर से रिव्यू पिटीशन दाखिल किए जाने के बाद जन आंदोलन को उस समय स्थगित कर दिया गया था।

परिवार की मांग: सिर्फ याचिका नहीं, प्रभावी पैरवी हो

नन्ही परी के ताऊ तारा चंद का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में जो पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई थी, वह अब तक स्वीकार नहीं हुई है और न ही आगे की सुनवाई को लेकर कोई जानकारी दी जा रही है। उनका कहना है कि सरकार से सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि प्रभावी और ठोस पैरवी की उम्मीद थी।

कांग्रेस की चेतावनी- पिथौरागढ़ बंद तक जाएगा आंदोलन

कांग्रेस ने भी इस पूरे मामले में देरी पर कड़ा रुख अपनाया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व दर्जा राज्य मंत्री महेंद्र लुंठी ने कहा है कि नन्ही परी को न्याय दिलाने के लिए अब बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब तक जितने भी आंदोलन हुए, उनमें जनता ने पूरा साथ दिया है और इस बार भी जनता सरकार से जवाब मांगने के लिए सड़कों पर उतरेगी।

कांग्रेस ने साफ किया है कि जरूरत पड़ी तो पिथौरागढ़ बंद का आह्वान भी किया जाएगा और आंदोलन को राज्यव्यापी रूप दिया जाएगा।

क्या है नन्ही परी (कशिश) मामला…

20 नवंबर 2014 को पिथौरागढ़ की मासूम कशिश अपने परिजनों के साथ विवाह समारोह में शामिल होने के लिए हल्द्वानी गई थी। इसी दौरान उसका अपहरण कर दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई। पांच दिन बाद उसका क्षत-विक्षत शव हल्द्वानी के गौला पार क्षेत्र में झाड़ियों से बरामद हुआ।

इस घटना ने पूरे कुमाऊं समेत राज्यभर में भारी आक्रोश पैदा कर दिया था। पुलिस ने मामले में बिहार निवासी ट्रक चालक अख्तर अली को गिरफ्तार किया। विशेष अदालत ने 2016 में उसे फांसी की सजा सुनाई, जिसे 2019 में हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा। हालांकि, करीब 11 साल बाद पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया।

अख्तर के बरी होने के बाद राज्यभर में प्रदर्शन हुए थे जिसके बाद ही सीएम ने रिव्यू पिटीशन के निर्देश दिए थे।

अख्तर के बरी होने के बाद राज्यभर में प्रदर्शन हुए थे जिसके बाद ही सीएम ने रिव्यू पिटीशन के निर्देश दिए थे।

नन्ही परी के नाम पर कॉलेज, लेकिन न्याय अब भी अधूरा

नन्ही परी की स्मृति में पिथौरागढ़ के सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज का नाम उसके नाम पर रखा गया है। वर्ष 2016 में शासन ने इसका गजट नोटिफिकेशन भी जारी किया था।

लेकिन परिजनों और आंदोलनकारियों का कहना है कि नामकरण से ज्यादा जरूरी है कि नन्ही परी को वास्तविक न्याय मिले। इसी मांग को लेकर अब एक बार फिर आंदोलन की आहट तेज हो गई है।

पढ़िए क्यों सुप्रीम कोर्ट ने बरी किया

नन्ही परी (कशिश) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी अख्तर अली को बरी करते हुए साफ कहा कि उसके खिलाफ पेश किए गए सबूत सिर्फ परिस्थितिजन्य हैं, यानी घटना को अपनी आंखों से देखने वाला कोई प्रत्यक्ष गवाह नहीं है। कोर्ट के मुताबिक केवल संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

अब जानिए अख्तर ने वकील ने क्या दलीलें रखी थीं

  • जांच की दिशा पर सवाल: अख्तर का केस लड़ रही मनीषा भंडारी ने कहा था कि पुलिस ने पीड़िता के चचेरे भाई की निष्पक्ष जांच नहीं की, जबकि उसी ने पुलिस को फोन किया था। वकील ने बताया कि असल में शव सबसे पहले एक खच्चर चलाने वाले व्यक्ति ने देखा था, जिसने अन्य लोगों को सूचना दी और उसके बाद चचेरे भाई ने पुलिस को फोन किया। इसके बावजूद पुलिस ने जांच को एकतरफा तरीके से आगे बढ़ाया।
  • गिरफ्तारी और सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप: वकील ने आरोप लगाया कि पुलिस ने अख्तर अली को पहले ही पकड़ लिया था और उसे छुपाकर रखा गया। बाद में लुधियाना से गिरफ्तारी की झूठी कहानी बनाई गई। इसके साथ ही कहा गया कि पुलिस ने जबरदस्ती अख्तर के ब्लड और सीमन के सैंपल लिए और इन्हीं सैंपलों को खुद पीड़िता के अंडरगार्मेंट्स और जैकेट पर लगाया गया।
  • DNA जांच और सरकारी पैरवी में लापरवाही: भंडारी ने दावा किया था कि वेजाइनल स्वैब, जो DNA जांच के लिए लिया गया था, उसमें भी मिलावट की गई और उसी आधार पर अख्तर अली को फंसाया गया। इसके अलावा कोर्ट में यह भी कहा गया कि पुलिस के साथ-साथ सरकारी वकील की ओर से भी गंभीर लापरवाही हुई।

———————-

ये खबर भी पढ़ें….

देहरादून में सनावर से SIT ने 5 घंटे की पूछताछ:भास्कर से बोलीं- 1 घंटा इंतजार करवाया, पुलिस को सौंपी 48 कॉल रिकॉर्डिंग

अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सबूत होने का दावा करने वाली उर्मिला सनावर से बुधवार को SIT ने लंबी पूछताछ की। देहरादून में अज्ञात स्थान पर 5 घंटे तक हुई पूछताछ के दौरान उर्मिला के बयान रिकॉर्ड किए गए और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई। उर्मिला के मुताबिक पुलिस ने उनके फोन से 48 कॉल रिकॉर्डिंग ली हैं जिन्हें अब फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। (पढ़ें पूरी खबर)



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *