March 29, 2026

One Week Left to File ITR with Late Fee by Dec 31; 4 Reasons Why Your Tax Refund Hasn’t Arrived Yet | ITR भरने के लिए एक हफ्ते का समय बचा: लेट फीस के साथ 31 दिसंबर तक फाइल करें; टैक्स रिफंड अब तक नहीं आया, तो चेक करें 4 वजहें

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नई दिल्ली31 मिनट पहले

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वित्त वर्ष 2024-25 के लिए लेट फीस के साथ इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में महज 7 दिन का समय बचा है। ये काम आपको 31 दिसंबर के पहले कर लेनी है। इसके बाद आप रिटर्न फाइल नहीं कर पाएंगे, जिससे नोटिस आने के साथ ही जुर्माना सहित अन्य कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

यदि आप 5 लाख से कम इनकम का बिलेटेड (तय तारीख के बाद) इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं तो आपको 1,000 रुपए लेट फीस देनी होगी। वहीं, 5 लाख या उससे ज्यादा इनकम पर 5,000 रुपए की लेट फीस देनी होगी।

वित्त वर्ष 2024-25 के लिए बिना किसी लेट फीस के ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 16 सितंबर थी। अगर 31 दिसंबर के बाद ITR फाइल करने पर आपका रिफंड (वापस मिलने वाला टैक्स) क्लेम नहीं होगा, चाहे कितना भी रिफंड बनता हो, सरकार के पास चला जाएगा।

रिटर्न भरने की प्रोसेस 4 स्टेप में जानें…

स्टेप 1: जरूरी डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें

  • सैलरी, TDS की जानकारी के लिए फॉर्म-16। कितना टैक्स जमा किया और कितना बाकी है इसके लिए फॉर्म 26AS और एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS)।
  • बैंक स्टेटमेंट, ब्याज प्रमाण पत्र के अलावा LIC, PPF, NSC जैसे इन्वेस्टमेंट प्रूफ। घर/मकान लोन की डिटेल। किराए की रसीद, कैपिटल गेन की जानकारी।

स्टेप 2: सही ITR फॉर्म चुनें

  • ITR-1 : यदि आय सैलरी, एक मकान और ब्याज से है। आय ₹50 लाख से कम है।
  • ITR-2: अगर आय वेतन व पेंशन से है। एक से अधिक घर है या कैपिटल गेन है।
  • ITR-3: अगर आय बिजनेस या प्रोफेशन से है।
  • ITR-4: प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम के तहत रिटर्न फाइल कर रहे है।

स्टेप 3: ऑनलाइन ITR फाइलिंग

  • इनकम टैक्स वेबसाइट (incometax.gov) पर लॉगिन करें।
  • ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपना पैन और पासवर्ड डालें।
  • आय के हिसाब से सही फॉर्म चुनकर जानकारी भरें।
  • टैक्स कैलकुलेट करें। यदि एक्स्ट्रा टैक्स देना है तो ऑनलाइन पेमेंट करें।

स्टेप 4: ITR वेरिफिकेशन

  • रिटर्न फाइल करने के बाद 30 दिन के अंदर ई-वेरिफिकेशन करना जरूरी।
  • वेरिफिकेशन के लिए – आधार OTP, नेट बैंकिंग, डीमैट अकाउंट जैसे ऑप्शन।

ITR फाइल कर दी है, रिटर्न अब तक नहीं आया; क्या करें…

अगर आपने तय तारीख यानी 16 सितंबर तक अपनी रिटर्न फाइल कर दी है और रिफंड नहीं आया है, तो इसके पीछे चार बड़े कारण हो सकते हैं…

  1. रिफंड प्रोसेसिंग में देरी की सबसे बड़ी वजह टेक्निकल चूक होती है। पहले तो बैंक अकाउंट का वैलिडेशन चेक होता है। डिपार्टमेंट केवल प्री-वैलिडेटेड अकाउंट में ही पैसा ट्रांसफर करता है। अगर आपका अकाउंट वैलिडेट नहीं है, तो रिफंड वहीं अटक जाता है। ई-पोर्टल पर जाकर आप आसानी से ये चेक कर सकते हैं।
  2. दूसरी बड़ी समस्या ITR का वेरिफिकेशन न करना। रिटर्न फाइल करने के बाद 30 दिन के अंदर इसे वेरिफाई करना जरूरी है। ये ऑनलाइन ई-वेरिफाई से हो जाता है, या फिर ITR-V फॉर्म पर साइन करके स्पीडपोस्ट से भेजना पड़ता है। वेरिफाई न होने पर पूरा रिटर्न प्रोसेस ही रुक जाता है।
  3. तीसरा, डिफेक्टिव रिटर्न नोटिस का जवाब देरी से देना। डिपार्टमेंट अगर रिटर्न में कोई कमी देखता है, तो 15 दिन के अंदर सुधार मांगता है। अगर वक्त कम लगे तो ठीक, वरना एक्सटेंशन रिक्वेस्ट कर सकते हैं। जवाब न देने से रिफंड महीनों अटक सकता है।
  4. चौथा कारण डिडक्शन-एग्जेम्प्शंस में गलत क्लेम करना। जैसे हाउस रेंट अलाउंस या 80C के तहत इन्वेस्टमेंट का गलत अमाउंट दिखाना। डिपार्टमेंट इनकी स्क्रूटनी करता है। अगर शक हो तो प्रोसेसिंग रोक देता है। ऐसे में रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करके सुधारना पड़ता है।

स्टेटस चेक करने के लिए तीन तरीके

आमतौर पर रिटर्न फाइल करने के 3-4 हफ्ते में रिफंड आ जाता है, लेकिन अगर अमाउंट ज्यादा है तो थोड़ा वक्त लग सकता है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर स्टेटस चेक करते रहें, तो परेशानी कम हो सकती है।

अगर स्टेटस में रिफंड फेल या अकाउंट नॉट वैलिडेटेड लिखा आए, तो तुरंत लॉगिन करके बैंक अकाउंट वैलिडेट कर लें। 2-3 दिन में पैसा आपके खाते में आ जाएगा।

अगर स्टेटस में रिफंड फेल या अकाउंट नॉट वैलिडेटेड लिखा आए, तो तुरंत लॉगिन करके बैंक अकाउंट वैलिडेट कर लें। 2-3 दिन में पैसा आपके खाते में आ जाएगा।

कैसे काम करता है रिफंड सिस्टम

इनकम टैक्स रिफंड प्रोसेस डिजिटल हो चुकी है। रिटर्न फाइल होते ही CPC (सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर) में ये चेक होता है। वैलिडेशन के बाद ही रिफंड जारी होता है। पिछले सालों में ऐसे केस बढ़े हैं, क्योंकि टैक्सपेयर्स ऑनलाइन प्रोसेस से अनजान रहते हैं।

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि छोटे रिफंड (10 हजार तक) जल्दी क्लियर होते हैं, लेकिन 1 लाख से ऊपर वाले में मैनुअल चेक ज्यादा लगता है। डिपार्टमेंट ने ई-पोर्टल को और यूजर-फ्रेंडली बनाया है, ताकि टैक्सपेयर्स खुद स्टेटस ट्रैक कर सकें।

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