Parliamentary panel said – biggest challenge from Bangladesh after 1971 | संसदीय पैनल बोला-1971 के बाद बांग्लादेश से सबसे बड़ी चुनौती: वहां इस्लामी कट्टरपंथी बढ़े, पाकिस्तान-चीन का दखल; बांग्लादेश के विकास में सहयोग ही रणनीतिक हल
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नई दिल्ली11 मिनट पहले
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बांग्लादेश की राजधानी ढाका में बुधवार को भी भारत के खिलाफ प्रदर्शन हुए।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली विदेश मामलों की संसदीय समिति ने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति को भारत के लिए 1971 के बाद की सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बताया है।
समिति ने कहा है कि हालात अराजकता में तो नहीं जाएंगे, लेकिन भारत को इसे बेहद सावधानी से संभालने की जरूरत है। समिति ने सरकार को कई अहम सिफारिशें भी सौंपी हैं। साथ ही सुझाव दिया है कि बांग्लादेश के विकास में सहयोग से ही इसे हल कर सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में अशांति के पीछे इस्लामिक कट्टरपंथ का बढ़ना, चीन और पाकिस्तान का बढ़ता प्रभाव और शेख हसीना की अवामी लीग की राजनीतिक पकड़ का कमजोर होना मुख्य कारण हैं।
समिति ने कहा कि 1971 की चुनौती अस्तित्व और मानवीय संकट से जुड़ी थी, जबकि मौजूदा हालात एक पीढ़ीगत बदलाव, राजनीतिक व्यवस्था में परिवर्तन और भारत से दूर होते रणनीतिक झुकाव की ओर इशारा करते हैं।

रिपोर्ट की बड़ी बातें…
- पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना का भारत में रहना देश की मानवीय परंपरा के मुताबिक है। ऐसे मामलों में भारत हमेशा मुश्किल हालात में फंसे लोगों को मानवीय आधार पर शरण देता रहा है। सरकार को चाहिए कि वह अपने सिद्धांतों और मानवीय रवैये को बनाए रखे, लेकिन साथ ही पूरे मामले को समझदारी और संवेदनशीलता के साथ संभाले।
- बांग्लादेश के पाकिस्तान के साथ रिश्तों में बदलाव और चीन की बढ़ता असर भारत के लिए चिंता का विषय है। इसमें खासतौर पर मोंगला पोर्ट के विस्तार, लालमोनिरहाट एयरबेस और पेकुआ में बने सबमरीन बेस का जिक्र किया गया है।
- चीन बांग्लादेश में सभी वर्गों से संपर्क बढ़ा रहा है, जिसमें जमात-ए-इस्लामी भी शामिल है। जमात के प्रतिनिधि चीन की यात्रा भी कर चुके हैं। भारत को किसी भी विदेशी ताकत को बांग्लादेश में सैन्य ठिकाना बनाने से रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखनी चाहिए। साथ ही बांग्लादेश में विकास, कनेक्टिविटी बढ़ाने को लेकर बेहतर विकल्प देने चाहिए।
- पहले प्रतिबंधित रही जमात-ए-इस्लामी का चुनावी रजिस्ट्रेशन बहाल कर दिया गया है, जिससे वह आगामी चुनावों में हिस्सा ले सकेगी। वहीं, अंतरिम सरकार ने अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे उसके चुनाव लड़ने पर भी रोक है। अवामी लीग पर जारी प्रतिबंध भविष्य के चुनावों की समावेशिता पर सवाल खड़े करता है।
ढाका में बुधवार को भारत के खिलाफ प्रदर्शन हुआ

पुलिस ने ढाका के गुलशन इलाके में भारतीय उच्चायोग की ओर मार्च करते समय प्रदर्शनकारियों को रोक दिया।

प्रदर्शनकारी अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और जुलाई में हुए आंदोलन के दौरान व उसके बाद भारत चले गए अन्य लोगों की वापसी की मांग कर रहे थे।

दोपहर करीब 3:15 बजे मार्च शुरू करने से पहले रमपुरा ब्रिज इलाके में करीब 100 लोग जमा हुए थे।

प्रदर्शनकारी ‘दिल्ली नहीं, ढाका; ढाका, ढाका’ जैसे नारे लगा रहे थे।
बांग्लादेशी नेता ने भारत को धमकी दी थी
BNP, जमात और कई अन्य संगठनों ने 5 अगस्त 2024 से अब तक भारतीय उच्चायोग की ओर 10 से ज्यादा लंबे मार्च आयोजित किए हैं। नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के नेता हसनत अब्दुल्ला ने सोमवार को ढाका में एक रैली में कहा था कि अगर बांग्लादेश को अस्थिर करने की कोशिश की गई तो बदले की आग सीमाओं के पार फैल जाएगी।
उन्होंने बिना भारत का नाम लिए कहा, ‘अगर आप हमें अस्थिर करने वालों को शरण दे रहे हैं, तो हम 7 सिस्टर्स के अलगाववादियों को भी शरण देंगे।’

एनसीपी के नेता हसनत अब्दुल्ला ने 7 सिस्टर्स को अलग करने की बात कही थी।
भारत ने बांग्लादेश के हाई कमिश्नर को तलब किया

भारत सरकार के समन के बाद बांग्लादेश के हाई कमिश्नर रियाज हमीदुल्ला बुधवार को विदेश मंत्रालय पहुंचे थे।
भारत सरकार ने बुधवार को बांग्लादेश के हाई कमिश्नर रियाज हमीदुल्ला को समन किया। यह कदम ढाका में भारतीय उच्चायोग को मिली एक हालिया धमकी के बाद उठाया गया था। भारत ने इस मामले पर बांग्लादेश सरकार के सामने औपचारिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
हालांकि भारत सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि धमकी किस तरह की थी या कहां से आई थी, लेकिन इसे एक गंभीर सुरक्षा चिंता के तौर पर देखा जा रहा है।
अब जानिए भारत-बांग्लादेश के रिश्ते तनावपूर्ण कैसे हुए…
शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के गिरने के बाद से भारत-बांग्लादेश के रिश्ते तनावपूर्ण हो गए हैं। 78 वर्षीय शेख हसीना पिछले साल अगस्त में तख्तापलट के बाद भारत आ गई थीं और तब से यहीं रह रही हैं।
पिछले महीने बांग्लादेश की एक विशेष ट्रिब्यूनल ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद से बांग्लादेश लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है।

शेख हसीना पिछले एक साल से भारत में रह रही हैं।
बांग्लादेश की मांग- शेख हसीना को सौंपे भारत
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने 14 दिसंबर को ढाका में भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को तलब किया। बांग्लादेश ने भारत में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बयानों को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है।
बांग्लादेश का कहना है कि शेख हसीना के बयान भड़काऊ हैं और वे अपने समर्थकों से बांग्लादेश में हिंसक और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने की अपील कर रही हैं। ऐसे बयान आगामी संसदीय चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश हैं। भारत सरकार एक फरार आरोपी को बयान देने की अनुमति दे रही है।

बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होंगे
बांग्लादेश में अगले साल 12 फरवरी को आम चुनाव होंगे। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिरउद्दीन ने गुरुवार शाम इसका ऐलान किया। यह चुनाव पूर्व पीएम शेख हसीना के तख्तापलट के डेढ़ साल बाद हो रहा है।
अब जानिए विदेश मामलों की संसदीय समिति क्या है…..
विदेश मामलों की संसदीय समिति संसद की एक स्थायी समिति होती है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सांसद शामिल होते हैं। इसका काम भारत की विदेश नीति, पड़ोसी देशों से संबंध, अंतरराष्ट्रीय समझौते और विदेश मंत्रालय (MEA) के कामकाज की निगरानी करना होता है। यह समिति सरकार को सुझाव देती है, लेकिन सीधे फैसले नहीं लेती।
वर्तमान में इसके अध्यक्ष शशि थरूर हैं। वहीं इसमें TMC सांसद अभिषेक बनर्जी, AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी, भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी समेत 30 सांसद सदस्य हैं।

समिति ने यह रिपोर्ट कैसे तैयार की…
भारत–बांग्लादेश संबंधों पर बनी इस रिपोर्ट के लिए समिति ने कई चरणों में काम किया। सबसे पहले विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली गई। इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के विशेषज्ञों से राय सुनी गई।
समिति ने मौजूदा हालात, राजनीतिक बदलाव, सुरक्षा स्थिति और भारत के हितों पर पड़ने वाले असर का अध्ययन किया। इन सभी तथ्यों और चर्चाओं के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर संसद में पेश की गई।
सरल शब्दों में कहें तो यह रिपोर्ट सरकारी जानकारी, विशेषज्ञों की राय और सांसदों के अध्ययन का नतीजा है, जिसका मकसद सरकार को सही दिशा में नीति बनाने में मदद करना है।
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