March 27, 2026

Quick Commerce Platforms Remove Delivery Time Limit Ads After Minister Intervention | ब्लिंकिट ने हटाया ’10 मिनट डिलीवरी’ का दावा: लेबर मिनिस्टर मांडविया की दखल के बाद फैसला; जेप्टो, स्विगी और जोमैटो भी विज्ञापनों से टाइम लिमिट हटाएंगे

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नई दिल्ली3 मिनट पहले

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क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट (Blinkit) ने अपने सभी ब्रांड प्लेटफॉर्म्स और विज्ञापनों से ’10 मिनट में डिलीवरी’ का दावा हटा लिया है। केंद्रीय लेबर मिनिस्टर मनसुख मांडविया के हस्तक्षेप और डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को लेकर जताई गई चिंता के बाद कंपनी ने यह कदम उठाया है। सरकार के साथ हुई बैठक में स्विगी, जोमैटो और जेप्टो ने भी भरोसा दिया है कि वे अब ग्राहकों से समय सीमा का वादा करने वाले विज्ञापन नहीं करेंगे।

लेबर मिनिस्टर ने कंपनियों के साथ की बैठक

केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने हाल ही में ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो के टॉप अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की थी। इस बैठक में डिलीवरी पार्टनर्स की सेफ्टी और उन पर पड़ने वाले मानसिक दबाव पर चर्चा हुई। मंत्री ने कंपनियों को सलाह दी कि वे डिलीवरी के लिए तय की गई सख्त समय सीमा को खत्म करें, क्योंकि इसकी वजह से राइडर्स ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हैं और दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं।

कंपनियों ने सरकार को दिया आश्वासन

बैठक के बाद सभी प्रमुख क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी कंपनियों ने सरकार को आश्वस्त किया कि वे अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और विज्ञापनों से ‘टाइम-बाउंड डिलीवरी’ के दावों को हटा लेंगे। ब्लिंकिट ने इसकी शुरुआत करते हुए अपने लोगो और ऐप इंटरफेस से 10 मिनट वाले टैग को हटाना शुरू कर दिया है। कंपनियों का कहना है कि वे अब ‘फास्ट डिलीवरी’ पर फोकस करेंगी, न कि किसी फिक्स्ड टाइमिंग पर।

डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा सर्वोपरि: मांडविया

श्रम मंत्री ने बैठक में स्पष्ट किया कि कंपनियों का बिजनेस मॉडल वर्कर्स की जान जोखिम में डालकर नहीं चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि 10 मिनट जैसी समय सीमा न केवल राइडर्स के लिए खतरनाक है, बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों के लिए भी जोखिम पैदा करती है। सरकार अब गिग वर्कर्स (Gig Workers) के लिए सामाजिक सुरक्षा और बेहतर कार्य स्थितियों पर एक व्यापक पॉलिसी बनाने की तैयारी में है।

क्विक कॉमर्स मॉडल पर उठ रहे थे सवाल

पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और कई मंचों पर 10-15 मिनट की डिलीवरी सर्विस की आलोचना हो रही थी। विशेषज्ञों का मानना था कि इतने कम समय में डिलीवरी का दबाव राइडर्स को तेज गाड़ी चलाने और रेड लाइट जंप करने के लिए मजबूर करता है। सड़क सुरक्षा से जुड़े संगठनों ने भी सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी।

मार्केटिंग स्ट्रैटेजी में होगा बड़ा बदलाव

अब ये कंपनियां अपनी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी में बदलाव करेंगी। अब तक ’10 मिनट’ इन कंपनियों का सबसे बड़ा यूएसपी (Unique Selling Proposition) हुआ करता था। हालांकि, कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी (कार्यक्षमता) को कम नहीं करेंगी, लेकिन विज्ञापनों के जरिए ग्राहकों में ऐसी उम्मीद नहीं जगाएंगी जिससे राइडर्स पर दबाव बने।

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