Rahul Gandhi SCOD Defence Meeting; Ex-servicemen Re-settlement Policy | Healthcare | राहुल बोले-रिटायर सैनिकों प्राइवेट अस्पतालों में इलाज नहीं मिल रहा: तय सुविधाएं और रोजगार भी नहीं; कांग्रेस सांसद ने पार्लियामेंट स्टैंडिंग कमेटी में मुद्दा उठाया
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नई दिल्ली9 मिनट पहले
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राहुल गांधी सोमवार को रक्षा समिति की बैठक में शामिल हुए।
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को डिफेंस की पार्लियामेंट स्टैंडिंग कमेटी में रिटायर सैनिकों से मुद्दे उठाए। संसद में आयोजित बैठक में राहुल ने कहा कि रिटायक सैनिकों को जब प्राइवेट अस्पतालों में रैफर किया जाता है तो उन्हें वहां इलाज नहीं मिलता।
सूत्रों के मुताबिक राहुल ने बैठक में कहा है कि पूर्व सैनिकों की भर्ती और पुनर्वास में कमी है। बड़ी संख्या में रिटायर सैनिकों को रोजगार और तय सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
दरअसल, राहुल गांधी रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति के सदस्य हैं। आज की बैठक का एजेंडा पूर्व सैनिकों के पुनर्वास, स्वास्थ्य सुविधाओं और उनके लिए उपलब्ध रोजगार के अवसरों की समीक्षा करना था।
राहुल के बैठक में उठाए सवाल
- रिटायर सैनिकों की पुनर्वास नीतियों, स्वास्थ्य सुविधाओं में खामियों और हेल्थ फंड के लिए बजट कम है।
- प्राइवेट अस्पताल सरकार पर हमारा बकाया की बात कहकर पूर्व सैनिकों को एडमिट नहीं करते, उनका इलाज नहीं करते।
- रिटायर सैनिकों को कैंसर और किडनी से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए मिलने वाली ₹75 हजार की सहायता बेहद कम है।
राहुल ने त्रिपुरा के छात्र ऐंजल चकमा की मौत पर भी सवाल उठाए

तस्वीर 9 दिसंबर की है। जब देहरादून में सेलाकुई मार्केट में शराब दुकान के बाहर ऐंजल चकमा पर बदमाशों ने हमला किया था।
राहुल गांधी ने उत्तराखंड के देहरादून में त्रिपुरा के छात्र ऐंजल चकमा की मौत पर X पोस्ट में भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि ऐंजल और उनके भाई माइकल के साथ जो हुआ, वह एक भयावह घृणा का अपराध है। भाजपा के नफरत फैलाने वाले नेतृत्व द्वारा इसे सामान्य बना दिया गया है। पूरी खबर पढ़ें…
अब पार्लियामेंट्री कमेटी से जुड़ी ये जानकारी पढ़िए…
सरकार की कुल कितनी डिपार्टमेंटल पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी हैं? भारत सरकार के सभी मंत्रालयों/विभागों से जुड़ी कुल 24 डिपार्टमेंटल पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी हैं। ये कमेटी दो प्रकार की होती हैं – पहली- स्टैंडिंग कमेटी, दूसरी- एड हॉक कमेटी। एड हॉक कमेटी को कुछ विशेष कामकाज के लिए बनाया जाता है। एक बार जब वो काम पूरा हो जाता है तो कमेटी खत्म कर दी जाती है।
क्या लोकसभा-राज्यसभा में अलग-अलग कमेटी होती है? कुल 24 पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी को दो हिस्सों में बांटा गया है। 16 कमेटी लोकसभा में आती हैं, वहीं 8 कमेटी राज्यसभा के अंतर्गत संचालित होती हैं।
इन कमेटी में कितने मेंबर होते हैं? इनमें से हर कमेटी में 31 मेंबर्स होते हैं, जिसमें से 21 लोकसभा से और 10 राज्यसभा से चुने जाते हैं। इन सभी कमेटी का कार्यकाल एक साल से अधिक नहीं होता है।
कमेटी में सदस्यों का चयन कौन करता है? स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों को, जिन्हें सांसदों के पैनल के रूप में भी जाना जाता है। इन्हें सदन के अध्यक्ष की तरफ से नॉमिनेट किया जाता है। ये अध्यक्ष के निर्देश के अनुसार काम करते हैं।
कमेटी का कार्यकाल कितना होता है? संसद में कुल 50 संसदीय कमेटी होती हैं। इनमें 3 फाइनेंशियल कमेटीज, 24 डिपार्टमेंटल कमेटीज, 10 स्टैडिंग कमेटीज और 3 एडहॉक कमेटीज का कार्यकाल 1 साल का होता है। 4 एडहॉक कमेटीज और 1 स्टैडिंग कमेटी का कार्यकाल 5 साल का होता है। वहीं, 5 अन्य स्टैडिंग कमेटीज का कार्यकाल फिक्स नहीं होता।
पार्लियामेंट्री कमेटी का क्या काम होता है? हर विभाग की कमेटी अलग होती है। उससे जुड़े मामलों में गड़बड़ी की जांच करना, नए सुझाव देना, नए नियम-कानून का ड्रॉफ्ट तैयार करना इन कमेटी का मुख्य काम है।
पार्लियामेंट्री कमेटी को ये अधिकार कहां से मिले? पॉर्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी में शामिल सांसदों (कमेटी सदस्य) को संविधान के तहत दो अधिकार मिलते हैं। पहला आर्टिकल 105 – यह सांसदों को किसी कामकाज में दखल देने का विशेष अधिकार देता है। जिसके तहत वे कमेटी में अपनी राय और सुझाव देते हैं। दूसरा आर्टिकल 118- यह संसद के कामकाज में नियम-कानून बनाने का अधिकार देता है।

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