April 7, 2026

SC: Borrower Notice & Chance to Reply Sufficient for Bank Fraud

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नई दिल्ली16 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि अगर बैंक किसी खाते को फ्रॉड घोषित करता है, तो उससे पहले उधार लेने वाले को आमने-सामने (पर्सनल) सुनवाई का मौका देना जरूरी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि नोटिस देना और जवाब का मौका देना ही काफी है।

जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस के वी विश्वनाथन की बेंच ने यह फैसला देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने बैंक से कहा था कि उधार लेने वाले के खाते को फ्रॉड घोषित करने से पहले मौखिक सुनवाई का मौका दिया जाए।

ऑडिट रिपोर्ट की कॉपी देना जरूरी

कोर्ट ने कहा कि अगर बैंक ऑडिट रिपोर्ट, खासकर फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर फैसला ले रहा है, तो उसकी कॉपी उधार लेने वाले को देना जरूरी है। साथ ही, उस पर उधार लेने वाले का जवाब भी लिया जाना चाहिए।

बेंच के मुताबिक RBI के नियमों में जो प्रक्रिया बताई गई है उसे अपनाना चाहिए। यह इस बात पर निर्भर करता है कि मामला किस तरह का है और कानून क्या कहता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में फैसले ज्यादातर कागजों, लेन-देन और ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर लिए जाते हैं।

पर्सनल सुनवाई से प्रक्रिया धीमी होगी

कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर हर केस में पर्सनल सुनवाई जरूरी कर दी जाए, तो प्रक्रिया धीमी हो जाएगी। इससे फ्रॉड पकड़ने में देरी हो सकती है और उधारकर्ता अपने पैसे या संपत्ति छिपाने की कोशिश कर सकते हैं।

बेंच ने साफ किया कि पहले के फैसलों, खासकर SBI बनाम राजेश अग्रवाल केस में भी पर्सनल सुनवाई को अनिवार्य नहीं बताया गया था। उसमें सिर्फ नोटिस देने और जवाब का मौका देने की बात कही गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने RBI के पक्ष से सहमति जताई और कहा कि तय प्रक्रिया का पालन करने से न्याय भी होगा और गलत फैसले की संभावना भी कम होगी।

कोर्ट ने यह भी कहा कि बैंकिंग सिस्टम और जनता के पैसे की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि फ्रॉड के मामलों में जल्दी और सही कार्रवाई हो। —————————— ये खबर भी पढ़ें:

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