Sonam Wangchuk Detention: Authority Didn’t Apply Mind, Says Wife in Supreme Court | सोनम को हिरासत के फैसले में दिमाग नहीं लगाया: पत्नी का सुप्रीम कोर्ट में दावा- जिन वीडियो पर नजरबंदी, वे वांगचुक को दिए ही नहीं
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नई दिल्ली11 मिनट पहले
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लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीताांजलि अंग्मो ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उनके पति को हिरासत में लेने के फैसले में अधिकारियों ने ठीक से सोच-विचार नहीं किया। उन्हें बेकार व गैर-जरूरी बातों के आधार पर नजरबंद किया गया।
अंग्मो की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच में दावा किया कि जिन चार वीडियो के आधार पर नजरबंदी की गई वे सोनम वांगचुक को दिए ही नहीं गए। इससे उनका अपना बचाव में सही ढंग से बात रखने का अधिकार छिन गया।
वीडियो नहीं देने से वांगचुक का सलाहकार बोर्ड और सरकार के सामने अपनी बात रखने का अधिकार प्रभावित हुआ है।
SSP की सिफारिश कॉपी-पेस्ट कर दिया
सिब्बल ने यह भी कहा कि लद्दाख के जिला मजिस्ट्रेट ने खुद से विचार नहीं किया, बल्कि लद्दाख के SSP की सिफारिश को सीधे कॉपी-पेस्ट कर दिया।
उन्होंने कहा कि नजरबंदी के कारणों का नजरबंदी आदेश से सीधा संबंध होना चाहिए था, लेकिन यहां ऐसे तथ्यों का इस्तेमाल किया गया जो जरूरी नहीं थे।
इस मामले की 13 जनवरी को फिर सुनवाई होगी।
अंग्मो ने पहले भी अदालत में कहा था कि लेह में उनके पति का भाषण हिंसा फैलाने के लिए नहीं, बल्कि हिंसा रोकने के लिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर उन्हें अपराधी बताया जा रहा है।

NSA के तहत हिरासत में लिया गया था
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई लेह में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद की गई थी। इन प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हुई थी और 90 लोग घायल हुए थे।
सरकार का आरोप है कि वांगचुक ने इस हिंसा को भड़काया।
NSA सरकार को ऐसे लोगों को हिरासत में लेने का अधिकार देता है, जिनसे देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा हो। इसके तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक नजरबंद रखा जा सकता है।
अंग्मो ने कहा कि 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा का सोनम वांगचुक के बयानों या कामों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने बताया कि वांगचुक ने खुद सोशल मीडिया पर हिंसा की निंदा की थी और कहा था कि हिंसा से लद्दाख का शांतिपूर्ण आंदोलन विफल हो जाएगा।

ये तस्वीर 26 सितंबर (2025) की है जब सोनम को गिरफ्तार किया गया था।
सोनम की गिरफ्तारी के बाद पत्नी के 3 रिएक्शन…
- 2 अक्टूबर: X पर लिखा- क्या भारत सचमुच आजाद है। 1857 में 24,000 अंग्रेजों ने महारानी के आदेश पर 30 करोड़ भारतीयों पर अत्याचार करने के लिए 1.35 लाख भारतीय सिपाहियों का इस्तेमाल किया था। आज, गृह मंत्रालय के आदेश पर, एक दर्जन प्रशासक 2400 लद्दाखी पुलिस का दुरुपयोग करके 3 लाख लद्दाखियों पर अत्याचार और अत्याचार कर रहे हैं।
- 1 अक्टूबर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लेटर लिखा। राष्ट्रपति एक आदिवासी होने के चलते लद्दाख के लोगों की भावनाओं को समझें। यह लेटर PM नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को भी भेजा। अंगमो ने सोनम वांगचुक की बिना शर्त रिहाई की मांग की।
- 28 सितंबर: न्यूज एजेंसी PTI से कहा था- वांगचुक ने हमेशा गांधीवादी तरीके से प्रदर्शन किया है। 24 सितंबर की हिंसा के लिए CRPF जिम्मेदार है। सोनम की पाकिस्तान की यात्राएं जलवायु परिवर्तन से जुड़ी थीं। हम संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में गए थे। हिमालय के ग्लेशियर के पानी में हम भारत-पाकिस्तान नहीं देखते।

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लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उनके पति का भाषण हिंसा फैलाने के लिए नहीं, बल्कि हिंसा को रोकने के लिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और वांगचुक को अपराधी की तरह दिखाने की कोशिश की जा रही है। पढ़ें पूरी खबर…