March 26, 2026

South superstar Shiva Rajkumar reveals why Dhurandhar became a hit | साउथ सुपरस्टार शिवा राजकुमार ने बताया क्यों हिट हुई धुरंधर: ‘KGF, कांतारा को टक्कर देने आई फिल्म 45’, दो यूनिवर्स और भावनाओं की खास कहानी

0
16-1_1767450063.gif


12 मिनट पहलेलेखक: वर्षा राय

  • कॉपी लिंक

शिवा राजकुमार और निर्देशक अर्जुन जन्य की कन्नड़ फिल्म ‘45’ एक भावनात्मक और गहरी सोच से जन्मी कहानी को बड़े पर्दे पर पेश करती है। साउथ में शानदार रिस्पॉन्स मिलने के बाद अब इस फिल्म को हिंदी में डब कर नॉर्थ बेल्ट के दर्शकों के लिए रिलीज किया जा रहा है।

कोविड के दौरान हुए निजी नुकसान से प्रेरित होकर अर्जुन जन्य ने जीवन और मृत्यु के बीच के रिश्ते को दो पैरलल यूनिवर्स के जरिए दिखाया है। कहानी की एक झलक ने ही शिवा राजकुमार को इससे जोड़ दिया, क्योंकि यह फिल्म सिनेमा की उस ताकत को दर्शाती है जो इंसानी भावनाओं को छूती है।

फिल्म में संस्कृति, भावनाएं और देशभक्ति जैसे तत्वों को भी अहम जगह दी गई है, ठीक उसी तरह जैसे ‘धुरंधर’ में देशभक्ति के कारण दर्शकों से गहरा जुड़ाव बना था। दैनिक भास्कर से बातचीत में फिल्म के हीरो शिवा राजकुमार ने साउथ की फिल्मों के बढ़ते चलन पर भी बात की।

फिल्म की कहानी का विचार कैसे आया और इस कहानी को पर्दे पर लाना आपके लिए क्यों जरूरी था?

अर्जुन जन्य- इस फिल्म की कहानी मेरे अपने निजी अनुभव से जुड़ी हुई है। कोविड के दौरान मेरे भाई का निधन हो गया था। उस कठिन समय में मैंने गरुड़ पुराण सुना, जिसने मुझे जीवन और मृत्यु के बीच के संबंध को समझने का एक नया नजरिया दिया। वहीं से दो पैरलल यूनिवर्स को आपस में जोड़ने का आइडिया आया।

जब मैं यह कहानी लेकर फिल्म के हीरो अन्ना के पास गया, तो उन्हें यह बहुत पसंद आई। उन्होंने कहा कि इस कहानी पर फिल्म बननी चाहिए और इसका निर्देशन भी मुझे ही करना चाहिए, किसी और को नहीं।

शिवा राजकुमार- मुझे कहानी की सिर्फ एक लाइन सुनते ही यह बहुत पसंद आ गई थी। बचपन में मैंने एक कविता पढ़ी थी- शीशु ने दुनिया में आकर रो-रोकर हंसना सीखा, हंस-हंस के मरना सीखा, मर-मर के जीना सीखा,जी-जी के सहना सीखा… मेरे हिसाब से सिनेमा में इन सभी भावनाओं को दिखाने की जबरदस्त ताकत होती है।

इस फिल्म के जरिए हमने जिंदगी को दिखाने की कोशिश की है कि जीवन को किस तरह जीना चाहिए। मैं अपने किरदार से भी काफी रिलेट कर पाया, क्योंकि निजी जिंदगी में भी मैं जिद्दी, नटखट और अपनी बात सीधे तौर पर कहने वाला इंसान हूं।

साउथ में फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है, हिंदी ऑडियंस से आपको क्या उम्मीदें हैं?

अर्जुन जन्य- यह एक यूनिवर्सल फिल्म है और मुझे पूरा विश्वास है कि यह सभी को पसंद आएगी। इसका स्क्रीनप्ले भी अलग ढंग से तैयार किया गया है। एक ही कहानी में आपको तीन से चार लेयर्स देखने को मिलेंगी, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करेंगी।

कन्नड़ इंडस्ट्री ने KGF, कांतारा, 777 चार्ली जैसी बेहतरीन फिल्में दी हैं, जिससे दर्शकों की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। क्या आपको इसका दबाव महसूस होता है?

शिवा राजकुमार- बिल्कुल, दबाव तो महसूस होता है। लेकिन मेरा मानना है कि इसी दबाव में असली आनंद छिपा होता है। ऑडियंस की डिमांड हमेशा एक यूनिक और मजबूत स्क्रिप की होती है। हम हर बार कांतारा या KGF जैसी फिल्में नहीं बना सकते। हमारी यह फिल्म भी एक यूनिवर्सल कहानी है, जिससे हर किसी को एक खास संदेश मिलेगा।

साउथ की फिल्मों में ऐसा क्या खास होता है कि वे अक्सर सुपरहिट साबित होती हैं?

शिवा राजकुमार- मेरे हिसाब से हमारी फिल्मों की दो सबसे बड़ी ताकत होती हैं एक हमारी संस्कृति और दूसरा भावनाएं। कई बार ये दोनों चीजें नॉर्थ की फिल्मों में कम दिखाई देती हैं। अगर आप कभी खुशी कभी गम, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, मैंने प्यार किया, हम साथ-साथ हैं जैसी फिल्में देखें, तो ये सभी भावनाओं पर आधारित हैं, और इसी वजह से सुपरहिट हुईं। हर इंसान इमोशंस से जुड़ता है।

जैसे धुरंधर फिल्म हिट हुई क्योंकि उसमें देशभक्ति दिखाई गई। उसी तरह कर्नाटक की सुपरहिट फिल्मों में या तो ईश्वर-भक्ति होती है या देशभक्ति। दर्शकों से जुड़ने के लिए फिल्म में भावनाओं का होना बेहद जरूरी है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *