March 25, 2026

Sri Lankan businessman trapped in jungle for two days | श्रीलंका में 2 दिन साइक्लोन में फंसा ओरछा का बिजनेसमैन: पत्नी के साथ कार में गुजारी रात, कहा- हर सांस आखिरी-सी लग रही थी – Niwari News

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ओरछा के कारोबारी ग्रीस अपनी पत्नी ईशा के साथ दो दिन कोंलबो के पहाड़ी इलाके में बाढ़ और पहाड़ धंसकने के कारण फंसे रहे।

श्रीलंका में तबाही मचाने के बाद साइक्लोन दितवाह के असर से भारत के तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के तटीय इलाकों में भारी बारिश हो रही है। अब तक तमिलनाडु से तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

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शनिवार तक श्रीलंका में दितवाह के कारण बाढ़ और लैंडस्लाइड से 123 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी। 130 से ज्यादा लापता हैं। चेन्नई की फ्लाइट्स कैंसल होने के कारण कोलंबो एयरपोर्ट पर लगभग 300 भारतीय यात्री तीन दिन से फंसे हुए हैं। इनमें से एक ग्रीस प्रेमानी भी हैं। उनका मध्य प्रदेश के ओरछा में प्रॉपर्टी का बिजनेस हैं। वे झांसी में रहते हैं।

जब ओरछा के बिजनेसमैन ग्रीस प्रेमानी के श्रीलंका में फंसे होने की बात दैनिक भास्कर को पता चली तो उन्होंने ग्रीस से वीडियो कॉल पर बात की।

ग्रीस प्रेमानी के परिवार के कुछ लोगों का श्रीलंका में कारोबार हैं। वे परिवार की बेटी की शादी में हिस्सा लेने पत्नी ईशा प्रेमानी के साथ झांसी से 22 नवंबर को शताब्दी एक्सप्रेस से दिल्ली के लिए रवाना हुए। 23 की दोपहर उन्होंने दिल्ली से वाया चेन्नई कोलंबो की फ्लाइट पकड़ी। रात करीब आठ बजे उनकी फ्लाइट कोलंबो इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड हुई।

ग्रीस इस समय कोलंबो कैंडी के होटल में हैं। उनसे भास्कर रिपोर्टर मयंक दुबे ने वीडियो कॉल पर बात की।

ग्रीस इस समय कोलंबो कैंडी के होटल में हैं। उनसे भास्कर रिपोर्टर मयंक दुबे ने वीडियो कॉल पर बात की।

पूरी कहानी ग्रीस की जुबानी… ग्रीस प्रेमानी कहते हैं कि दो दिन के सफर के बाद काफी थकावट सी महसूस हो रही थी, लेकिन उन्हें शादी की रस्मों में शामिल होने के लिए एयरपोर्ट से करीब 35 किलोमीटर दूर कोलंबो कैंडी पहुंचना था। बारिश हो रही थी। राजधानी में कई जगह पेड़ गिरने के चलते ट्रैफिक जाम जैसे हालात थे। हमे शहर से पांच किलोमीटर बाहर आने में ही डेढ़ से दो घंटे लग गए। कैंडी वही जगह है, जहां साइक्लोन दितवाह के चलते भारी बारिश हो रही थी और बाढ़ आई हुई थी।

कोलंबो से कैंडी सिटी पहुंचने के लिए पहाड़ी रास्ता पार करना होता है। भारी बारिश के बीच हमारी कार जैसे ही पहाड़ से उतर रही थी, लैंड स्लाइड होने लगी। ड्राइवर ने हम लोगों से कार से बाहर निकलने कहा। हम बारिश के बीच कार से निकल बाहर खड़े हो गए। पहाड़ धंस कर रोड तक आ रहे थे। सिरहन सी होने लगी। इससे पहले इस तरह के नजारे के तो मैंने सिर्फ वीडियो ही देखे थे। थोड़ी देर बाद पहाड़ सरकना बंद हो गए। वहां हमारे जैसे करीब 35-40 लोग और रहे होंगे। वे सब श्रीलंका के ही थे।

ये वही जगह है, जहां ग्रीस फंसे हुए थे। ये फोटो उन्होंने अपनी कार से लिया है।

ये वही जगह है, जहां ग्रीस फंसे हुए थे। ये फोटो उन्होंने अपनी कार से लिया है।

मेरा तो दिल ही बैठ गया… ड्राइवर सहित मैं और पत्नी भीग चुके थे। ड्राइवर ने हम दोनों से कार में बैठने कहा। जैसे ही उसने बताया कि अब यहां से निकलने में कितने दिन लग जाएंगे, कह नहीं सकते। ये सुन मेरा तो दिल बैठने लगा। हर सांस आखिरी सी लगने लगी। ईशा तो कुछ कह ही नहीं रही थी। नेटवर्क न होने के कारण हम किसी को अपने फंसे होने की कोई सूचना ही नहीं दे पा रहे थे। आधी रात गुजर गई। भूख-प्यास से बेहाल थे। ड्राइवर भी हमारी हालत देख परेशान था। बारिश थी कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। सच कहूं तो इतनी तेज बारिश तो मैंने अपने जीवन में देखी ही नहीं थी। रात ऐसे ही गुजर गई।

ड्राइवर ने बताया कि पहाड़ी से नीचे करीब दो किलोमीटर दूर नदी में बाढ़ आई हुई है। पुल पर करीब 10 फीट पानी है। अब रास्ता कब खुलेगा कह नहीं सकते।

ये दूसरा फोटो भी ग्रीस प्रेमानी ने हमें उपलब्ध कराया है।

ये दूसरा फोटो भी ग्रीस प्रेमानी ने हमें उपलब्ध कराया है।

न कुछ खाने को था, न पीने को… दूसरे दिन बारिश और तेज हो गई। हमारे पास न पीने को पानी था, न खाने के लिए कुछ। पूरा दिन कार में बैठे-बैठे ही गुजर गया। प्यास लगी तो कांच से हाथ बाहर निकालकर चुल्लू में जो पानी आया, वही पिया। 24 और 25 नवंबर के दिन और रात भी ऐसे ही निकल गए। बारिश कम होने से नदी का पानी कम हो गया था। सुबह ड्राइवर ने बताया कि दोपहर तक रास्ता खुल सकता है।

26 को मुश्किल से रेस्क्यू टीम पहुंची। रास्ते की मिट्टी हटाई गई। हमारी कार दोपहर करीब तीन बजे वहां से चली। रास्ते भर बड़ा डरावना सा नजारा था। मकान-पेड़ गिरे हुए थे। रास्ते में हजारों मवेशी मरे हुए पड़े थे। जहां तक नजर जा रही थी, वहां सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा था।

ग्रीस जिस जगह पर फंसे हुए थे, वहां पहाड़ से इस तरह पानी सड़क पर आ रहा था।

ग्रीस जिस जगह पर फंसे हुए थे, वहां पहाड़ से इस तरह पानी सड़क पर आ रहा था।

ढाई दिन बाद पहुंचे होटल आखिरकार मैं और मेरी पत्नी 26 नवंबर की शाम को कोलंबो कैंडी पहुंच गए, लेकिन अभी भी यहां हालत ठीक नहीं हुए। बारिश का सिलसिला जारी है। मैं जल्द से जल्द अपने देश आना चाहता हूं, लेकिन फ्लाइट्स कैंसल हैं। न जाने कब यहां से निकल सकूंगा?

आखिरी में ग्रीस प्रेमानी कहते हैं, ‘ये मेरा और मेरे परिवार का दूसरा जीवन है। ये सब संभव हुआ… हमारे रामराजा सरकार की वजह से ’…।



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