March 31, 2026

Starmer Chair Threat | Epstein Files Controversy; Shabana Mahmood PM Hope

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लंदन1 घंटे पहले

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अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े विवादों के कारण ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की कुर्सी खतरे में है। अब उनकी अपनी लेबर पार्टी के एक धड़े ने ही इस्तीफे की मांग कर दी है। हालांकि स्टार्मर अभी पद छोड़ने से इनकार कर रहे हैं।

इस बीच, नए प्रधानमंत्री पद की होड़ में गृह मंत्री शबाना महमूद के साथ ही स्वास्थ्य मंत्री वेस्ट स्ट्रीटिंग और पूर्व उपप्रधानमंत्री अंगेला रेनर का नाम सामने आ रहा है।

कश्मीरी मूल की शबाना महमूद PoK के मीरपुर से हैं। वह ब्रिटेन की गृह मंत्री बनने वाली पहली मुस्लिम महिला हैं। अगर वह प्रधानमंत्री बनती हैं, तो ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री भी होंगी।

दरअसल, ब्रिटेन में एपस्टीन फाइल से जुड़े विवाद की वजह से पीएम स्टार्मर के सबसे भरोसेमंद सहयोगी और डाउनिंग स्ट्रीट के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी को इस्तीफा देना पड़ा है।

मैकस्वीनी पर आरोप है कि उन्होंने यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन का समर्थन करने वाले पीटर मंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत बनाकर भेजा था। मैकस्वीनी ने भी माना है कि यह नियुक्ति गलत थी।

अमेरिका में ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर के साथ पीटर मंडेलसन। मंडेलसन पर आरोप है कि जेफ्री एपस्टीन को बच्चों के यौन शोषण के मामलों में सजा होने के बाद भी मंडेलसन उसके संपर्क में रहे और उसका समर्थन किया।

अमेरिका में ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर के साथ पीटर मंडेलसन। मंडेलसन पर आरोप है कि जेफ्री एपस्टीन को बच्चों के यौन शोषण के मामलों में सजा होने के बाद भी मंडेलसन उसके संपर्क में रहे और उसका समर्थन किया।

स्टार्मर को चुनौती देने के लिए 20% सदस्यों का समर्थन जरूरी

लेबर पार्टी के नियमों के अनुसार, अगर कोई कीर स्टार्मर के खिलाफ चुनौती देना चाहता है, तो इसके लिए कुछ सख्त शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है कि चुनौती देने वाले उम्मीदवार को पार्टी के संसदीय सदस्यों से कम से कम 20% का समर्थन हासिल करना जरूरी है।

यह नियम 2021 में पार्टी कॉन्फ्रेंस में बदलाव के बाद लागू हुआ था। पहले यह सीमा सिर्फ 10% थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 20% कर दिया गया है ताकि कोई भी आसानी से लीडरशिप चुनौती न दे सके और पार्टी में स्थिरता बनी रहे।

अभी लेबर पार्टी के कुल सांसदों की संख्या लगभग 404-405 के आसपास है, इसलिए किसी भी चुनौती को आगे बढ़ाने के लिए कम से कम 81 लेबर सांसदों का लिखित समर्थन जुटाना पड़ता है।

इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच होम मिनिल्टर शबाना महमूद को उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है। 45 साल की शबाना महमूद पहले न्याय मंत्री और लॉर्ड चांसलर रह चुकी हैं।

शबाना महमूद ब्रिटेन की पहली महिला मुस्लिम सांसदों में शामिल

बर्मिंघम में पाकिस्तानी माता-पिता के यहां जन्मी शबाना महमूद ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है। वह पेशे से बैरिस्टर हैं। 2010 में रुशानारा अली और यास्मिन कुरैशी के साथ वह ब्रिटेन की पहली महिला मुस्लिम सांसदों में शामिल हुईं।

लेबर पार्टी में वे कीर स्टार्मर की करीबी सहयोगी मानी जाती हैं और पार्टी के दक्षिणपंथी (राइट-विंग) गुट से जुड़ी हैं। वे इमिग्रेशन (प्रवासन) नीतियों पर काफी सख्त रवैया रखती हैं और कहती हैं कि ब्रिटेन में रहना एक विशेषाधिकार है।

2010 में संसद पहुंचने के कुछ ही महीनों बाद उन्हें पार्टी की अहम जिम्मेदारी दे दी गई थी। बाद में वह लेबर पार्टी की राष्ट्रीय चुनाव अभियान की जिम्मेदार बनीं और पार्टी की चुनावी रणनीति में उनकी बड़ी भूमिका रही।

अब जानिए पीएम कीर स्टार्मर की कुर्सी खतरे में क्यों है…

मैकस्वीनी के बाद स्टार्मर पर पद छोड़ने का दबाव

मैकस्वीनी को स्टार्मर का सबसे मजबूत सहारा माना जाता था। उन्हें प्रधानमंत्री का ‘दिमाग’ कहा जाता है और सत्ता तक पहुंचाने में उनकी बड़ी भूमिका रही। उनके जाने के बाद लेबर पार्टी के सांसद पूछ रहे हैं कि अब स्टार्मर कितने दिन टिक पाएंगे।

पार्टी के वामपंथी धड़े ने सीधे प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग कर दी है। सांसद ब्रायन लीशमैन ने कहा कि पार्टी की दिशा बदलनी है और इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री से होनी चाहिए। सांसद किम जॉनसन ने माना कि स्टार्मर के लिए हालात संभालना मुश्किल हो गया है, जबकि रैचेल मास्केल ने कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है।

PM स्टार्मर देश को संबोधित कर सकते हैं

इस पूरे विवाद के बीच पीएम स्टार्मर देश को संबोधित करने की तैयारी कर रहे हैं। वे राजनीति को साफ करने की बात रखेंगे और यह संकेत देंगे कि वह इस्तीफा नहीं देने जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि नीतियों में कोई बदलाव नहीं होगा। प्रधानमंत्री आज लेबर सांसदों की बैठक में भी बात रखेंगे।

इधर, पार्टी के अंदर लीडरशिप की रेस तेज हो गई है। उपप्रधानमंत्री एंजेला रेनर और स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग के नाम चर्चा में हैं। विदेश मंत्री डेविड लैमी ने साफ किया है कि उन्होंने मंडेलसन की नियुक्ति का विरोध किया था। ऊर्जा मंत्री एड मिलिबैंड को संभावित किंगमेकर बताया जा रहा है।

स्टार्मर के समर्थक चेतावनी दे रहे हैं कि बड़ी चुनावी जीत के सिर्फ 18 महीने बाद प्रधानमंत्री को हटाने से देश और पार्टी दोनों में भारी अस्थिरता आ सकती है। वर्क एंड पेंशन सेक्रेटरी पैट मैकफैडन ने कहा कि इससे आर्थिक और राजनीतिक अराजकता फैल सकती है।

ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर के साथ मॉर्गन मैकस्वीनी। तस्वीर पिछले साल मई की है।

ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर के साथ मॉर्गन मैकस्वीनी। तस्वीर पिछले साल मई की है।

स्टार्मर ने मंडेलसन को झूठा बताया था

इससे पहले स्टार्मर ने 5 फरवरी को मंडेलसन को झूठा बताया था। उन्होंने कहा कि उन्हें मंडेलसन ने झूठ बोला था और उन्होंने उस झूठ पर भरोसा करके उन्हें राजदूत बनाया। मुझे इस फैसले पर गहरा अफसोस है।

स्टार्मर ने अपने भाषण में कहा कि अब उन्हें समझ आया है कि मंडेलसन और एपस्टीन के रिश्ते कितने गहरे और अंधेरे थे। उन्होंने लेबर सांसदों और एपस्टीन के पीड़ितों से माफी मांगते हुए कहा कि उन्हें इस नियुक्ति पर अफसोस है।

स्टार्मर ने यह भी कहा कि वह सुरक्षा जांच से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करना चाहते हैं, लेकिन पुलिस जांच के चलते ऐसा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि राजनीतिक फायदा कितना भी बड़ा क्यों न हो, वह पीड़ितों को न्याय मिलने के रास्ते में कोई कदम नहीं उठाएंगे।

इस पूरे विवाद के बाद ब्रिटेन की उधारी लागत भी बढ़ गई है, क्योंकि निवेशकों को डर है कि स्टार्मर सरकार टिक पाएगी या नहीं।

स्टार्मर पर गलती का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने आरोप

विपक्षी कंजर्वेटिव नेता केमी बेडेनोक ने कहा कि असली जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की है। उनका आरोप है कि स्टार्मर हर बार गलती का ठीकरा दूसरों पर फोड़ देते हैं।

PM स्टार्मर के कार्यकाल में दूसरे चीफ ऑफ स्टाफ का इस्तीफा है। इससे पहले 2024 के चुनाव के बाद सू ग्रे को हटाया गया था।

मैकस्वीनी के इस्तीफे के बाद जिल काथबर्टसन और विध्या अलकेसन को कार्यवाहक चीफ ऑफ स्टाफ बनाया गया है।

वहीं, मैकस्वीनी के करीबी मानते हैं कि उन्हें हटाना बड़ी गलती थी। एक नेता ने कहा, यह अपनी ही टीम के सबसे मजबूत खिलाड़ी को बाहर करने जैसा है। कुछ सांसदों को डर है कि उनके जाने से पार्टी और ज्यादा वामपंथी रास्ते पर चली जाएगी।

एपस्टीन फाइल्स के कारण ब्रिटेन ने 10 दिन में 3 इस्तीफे

ब्रिटेन में एपस्टीन फाइल्स के हालिया खुलासों के कारण अब तक तीन प्रमुख लोगों ने इस्तीफा दिया है। इनमें अमेरिकी राजदूत पीटर मैंडेलसन, प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैक्स्वीनी के अलावा स्टार्मर के कम्युनिकेशंस डायरेक्टर टिम एलन भी शामिल हैं।

मैंडेलसन ने 2 फरवरी को लेबर पार्टी की सदस्यता और हाउस ऑफ लॉर्ड्स से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले उन्हें सितंबर 2025 में अमेरिकी राजदूत पद से बर्खास्त किया गया था। मैक्स्वीनी ने 8 फरवरी 2026 को इस्तीफा दे दिया।

वहीं, टिम एलन ने 9 फरवरी को पद छोड़ दिया। उन्होंने बयान जारी करते हुए कहा- मैंने फैसला किया है कि मैं पद छोड़ दूं, ताकि एक नई टीम बनाई जा सके। एलन ने यह इस्तीफा एपस्टीन फाइल्स से जुड़े घोटाले के चलते दिया है।

दरअसल, एपस्टीन से जुड़े नए दस्तावेजों में दिखाया कि मैंडेलसन ने एपस्टीन के साथ संपर्क 2008 की सजा के बाद भी बनाए रखा। कुछ रिपोर्ट्स में $75,000 से ज्यादा पैसे के ट्रांसफर और 2009 में सरकारी जानकारी लीक करने के आरोप लगे।

एलन लंबे समय से राजनीतिक कम्युनिकेशंस के क्षेत्र में थे। 1990s में पूर्व PM टोनी ब्लेयर के डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी रहे और पीटर मैंडेलसन के साथ भी काम किया था। स्टार्मर के कार्यकाल में यह चौथा कम्युनिकेशंस चीफ का इस्तीफा है। एलन का इस्तीफा टीम में बदलाव और राजनीतिक दबाव का नतीजा माना जा रहा है।

भारतीय मूल के दूसरे प्रमुख नेताओं के बारे में जानिए…

ब्रिटेन के PM रह चुके ऋषि सुनक

ऋषि सुनक अपनी पत्नी अक्षता मूर्ति और बेटियों के साथ।

ऋषि सुनक अपनी पत्नी अक्षता मूर्ति और बेटियों के साथ।

ऋषि सुनक ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री हैं। इन्होंने 2022 से 2024 तक पद संभाला था। उनका जन्म 12 मई 1980 को इंग्लैंड में हुआ था। 1960 के दशक में उनके माता-पिता भारत से ब्रिटेन आकर बस गए। 2015 में वे सांसद चुने गए।

2018 में वे लोकल गवर्नमेंट मिनिस्टर बने। 2022 में लिज ट्रस के इस्तीफे के बाद वे प्रधानमंत्री बने, ब्रिटेन के पहले ब्रिटिश एशियन और हिंदू पीएम के रूप में इतिहास रचा।

42 साल की उम्र में वे 1812 के बाद सबसे युवा पीएम थे। उनके कार्यकाल में अर्थव्यवस्था, इमिग्रेशन और यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। 2024 के चुनाव में हार के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम गवर्नर बने जोहरान ममदानी

जोहरान ममदानी भारतीय मूल के गवर्नर हैं।

जोहरान ममदानी भारतीय मूल के गवर्नर हैं।

जोहरान ममदानी एक प्रमुख अमेरिकी राजनीतिज्ञ हैं। वे वर्तमान में न्यूयॉर्क शहर के गवर्नर हैं। उनका जन्म 18 अक्टूबर 1991 को युगांडा की राजधानी कंपाला में हुआ था।

वे प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी फिल्म निर्देशक मीरा नायर के बेटे हैं। सात साल की उम्र में वे न्यूयॉर्क शहर चले आए और यहीं बड़े हुए। वे डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका के सदस्य हैं और प्रगतिशील विचारधारा के समर्थक हैं।

2021 से 2025 तक वे न्यूयॉर्क राज्य विधानसभा के सदस्य रहे, जहां उन्होंने किराया नियंत्रण, बेहतर सार्वजनिक परिवहन और मजदूर वर्ग के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।

2025 में उन्होंने न्यूयॉर्क मेयर चुनाव जीतकर इतिहास रचा। वे शहर के पहले मुस्लिम और 100 साल से अधिक समय में सबसे युवा गवर्नर बने। उनका कार्यकाल 1 जनवरी 2026 से शुरू हुआ, जिसमें वे किराए पर रोक, निःशुल्क बस सेवा, किफायती आवास और शहर को अधिक सस्ता बनाने पर जोर दे रहे हैं।

ट्रिनिडाड एंड टोबैगो की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी कमला प्रसाद-बिसेसर

कमला प्रसाद-बिसेसर के साथ पीएम मोदी। वे जुलाई 2025 में त्रिनिदाद-टोबैगो के दौरे पर गए थे। इस दौरान उन्होंने महाकुंभ का जल भेंट किया था।

कमला प्रसाद-बिसेसर के साथ पीएम मोदी। वे जुलाई 2025 में त्रिनिदाद-टोबैगो के दौरे पर गए थे। इस दौरान उन्होंने महाकुंभ का जल भेंट किया था।

कमला प्रसाद-बिसेसर ट्रिनिडाड एंड टोबैगो की पहली महिला प्रधानमंत्री, अटॉर्नी जनरल और विपक्ष की नेता रह चुकी हैं, साथ ही राष्ट्रमंडल राष्ट्रों की पहली महिला अध्यक्ष भी। उनका जन्म 22 अप्रैल 1952 को दक्षिणी ट्रिनिडाड के ग्रामीण इलाके सिपारिया में हुआ था।

उनके माता-पिता लिलराज और रीता प्रसाद, दोनों ही भारतीय मूल के हिंदू थे। कमला के पूर्वज ब्रिटिश इंडेंटर्ड लेबर सिस्टम के तहत भारत से कैरिबियन द्वीपों में लाए गए थे।

राजनीतिक करियर की शुरुआत में कमला ने UWI में लेक्चरर के रूप में काम किया और एक कॉलेज में कंसल्टेंट लेक्चरर रहीं। वे 1987 में राजनीति में आईं और नेशनल कांग्रेस (UNC) पार्टी की सदस्य बनीं।

1995 में वे पहली बार संसद सदस्य चुनी गईं और 1996-2001 तक अटॉर्नी जनरल रहीं। 2010 में वे ट्रिनिडाड एंड टोबैगो की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं, जो 2015 तक रहीं।

इस दौरान उन्होंने राष्ट्रमंडल की चेयरपर्सन के रूप में काम किया और महिलाओं के अधिकार, शिक्षा और आर्थिक विकास पर जोर दिया। 2015 में चुनाव हारने के बाद वे विपक्ष की नेता बनीं और 2025 में फिर से प्रधानमंत्री बनीं।

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