March 29, 2026

States do not have money for development | राज्यों की 80% तक कमाई वेतन-पेंशन, फ्री स्कीम में खर्च: विकास के लिए पैसा नहीं; राजस्थान को कर्ज चुकाने के लिए कर्ज की जरूरत

0
download-2_1767138352.jpg


मुंबई2 मिनट पहलेलेखक: गुरुदत्त तिवारी

  • कॉपी लिंक
तस्वीर AI जनरेटेड है। - Dainik Bhaskar

तस्वीर AI जनरेटेड है।

एक दशक से मुफ्त की योजनाएं (फ्री स्कीम) और सब्सिडी राज्यों की सत्ता पाने का ‘शर्तिया नुस्खा’ है। ले​किन राज्यों की बिगड़ती वित्तीय सेहत इस नुस्खे का बड़ा साइड इफेक्ट बनकर सामने आ रही है। राज्यों के पास बिजली, सड़क और आवास के लिए पैसा ही नहीं है।

उनकी कमाई और खर्च का लेखाजोखा बताता है कि सब्सिडी, वेतन, पेंशन और ब्याज की अदायगी जैसे अहम खर्चों के बाद राज्यों के हाथ अपनी कमाई का 20-25% हिस्सा ही बच पा रहा है। पंजाब जैसे राज्य के हाथ तो खर्च के लिए 7% रा​शि ही बची।

हालांकि, इस साल पंजाब को ₹90 हजार करोड़ का मूलधन भी चुकाना है। इसलिए इस बची राशि के साथ मूलधन चुकाने के लिए पंजाब को भारी भरकम कर्ज की जरूरत होगी। पंजाब अक्टूबर 2025 में ₹20 हजार करोड़ का कर्ज बाजार से ले चुका है।

राजस्थान को इस बार ₹1.50 लाख करोड़ कर्ज का मूलधन चुकाना है। वह 32 हजार करोड़ रुपए कर्ज ले चुका है, लेकिन बकाया तो कर्ज लेने की सीमा से भी ज्यादा है। उसे कर्ज चुकाने के लिए भी कर्ज लेने की जरूरत पड़ेगी।

बिहार चुनावी वादे पूरे करने में दिवालिया हो सकता है

मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, बिहार जैसे राज्यों का कर्ज उनकी जीडीपी की तुलना में एक तिहाई के करीब है या ज्यादा है। ऐसे में इन पर आने वाले सालों में मूलधन की अदायगी का बोझ और बढ़ सकता है।

बिहार में चुनावी वादे पूरे करने पर आने वाला बोझ राज्य के पूंजीगत व्यय का 25 गुना हो सकता है। राज्य दिवालिया हो सकता है।

महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों का अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा केवल वेतन, पेंशन और अन्य जरूरी खर्च में चला जाता है। विकास के लिए एक छोटी राशि ही मिलती है।

राजस्थान, समेत कई राज्यों में 45 गीगावॉट की सौर, पवन ऊर्जा क्षमता अटकी हुई हैं, क्योंकि सरकारें बिजली खरीद समझौते पर हस्ताक्षर तक नहीं कर पा रही हैं।

सारे बेहाल: बंगाल पर ब्याज का बोझ​ शिक्षा बजट से ज्यादा, MP पर बढ़ रहा कर्ज

  • बंगाल: कमाई का 21.2% हिस्सा तो ब्याज चुकाने में जाता है। यह शिक्षा-सेहत (18.7%) के साझा बजट से ज्यादा।
  • राजस्थान: कर्ज व ब्याज के बढ़ते बोझ के कारण स्वास्थ्य बजट पर खर्च स्थिर है।
  • मध्य प्रदेश: लाड़ली बहना जैसी योजनाओं के चलते कर्ज के ब्याज का बोझ बढ़ता जा रहा है।
  • कर्नाटक: गारंटी योजनाएं ब्याज अदायगी का बोझ पिछले साल के मुकाबले बढ़ा रही हैं।
  • महाराष्ट्र: जून में 903 विकास प्रोजेक्ट की मंजूरी रद्द। अधिकांश सिंचाई, बांध से जुड़ी थीं।

पुरानी सरकार की योजनाएं बंद करने से राहत संभव

रिटायर्ड आईएएस और स्टेट फाइनेंस के एक्सपर्ट अजीत केसरी बताते हैं, ‘मुफ्त की योजना या सब्सिडी की घोषणा करते समय ये देखना जरूरी है ​कि आय के संसाधन कितने हैं। नई योजनाओं के साथ सत्ता में आई सरकारें पुरानी सरकार की योजनाएं बंद नहीं करतीं।

सरकार को डर होता है कि कहीं लोग नाराज न हो जाएं। असम सरकार ने पुरानी सरकार की योजनाएं खत्म कर दी थीं। दूसरी सरकार भी ऐसे कदम उठाएं तो भी कुछ बोझ कम हो सकता है।’

——————————–

यह खबर भी पढ़ें…

भारत अब विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था:केंद्र का दावा- जापान को पीछे छोड़ा; 2030 तक जर्मनी से भी आगे निकलेंगे

केंद्र सरकार ने मंगलवार को बताया कि जापान को पीछे छोड़ते हुए भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 4.18 ट्रिलियन डॉलर (करीब ₹374.5 लाख करोड़) आंका गया है। केंद्र का अनुमान है कि मौजूदा रफ्तार बनी रही तो 2030 तक भारत जर्मनी को भी पीछे छोड़ देगा। फिलहाल अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। चीन दूसरे और जर्मनी तीसरे नंबर पर है। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed