Tharoor said – the country loses because of the Prime Minister’s defeat | थरूर बोले- प्रधानमंत्री की हार से भारत की हार: विदेश नीति पार्टी नहीं देश की होती है; पाकिस्तान से खतरे को हल्के में न लें
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नई दिल्ली31 मिनट पहले
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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को इंडिया टुडे से बातचीत में पाकिस्तान की राजनीति, अर्थव्यवस्था, चीन के प्रभाव और क्षेत्रीय सुरक्षा हालात पर राय रखी।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा कि विदेश नीति भाजपा या कांग्रेस की नहीं, भारत की होती है। अगर राजनीति में कोई प्रधानमंत्री की हार में खुशी महसूस करता है, तो वह दरअसल भारत के हार में खुशी मना रहा होता है। उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू के शब्दों को याद करते हुए कहा, “अगर भारत मर गया, तो कौन जिएगा?”
थरूर ने शुक्रवार को इंडिया टुडे से बातचीत की। इस दौरान थरूर ने कहा कि भारत को पाकिस्तान से आने वाले सुरक्षा खतरों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। पाकिस्तान अपनी सैन्य रणनीति बदल रहा है और अब हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक तथा छिपकर हमला करने की नीति पर जोर दे रहा है।
थरूर ने कहा- पाकिस्तान पहले ड्रोन, रॉकेट और मिसाइल हमलों का सहारा ले चुका है और अब वह और ज्यादा खतरनाक तकनीकों की ओर बढ़ रहा है। पाकिस्तान की यह नई सैन्य नीति ऐसी नहीं है, जिसे भारत नजरअंदाज कर सके।
पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति पर बात करते हुए थरूर ने उसे एक बेहद समस्याग्रस्त देश बताया। उन्होंने कहा कि वहां नाम मात्र की नागरिक सरकार है, असली ताकत सेना के हाथ में है। नीति निर्धारण में सेना का दबदबा रहता है और उसी के हिसाब से फैसले होते हैं।

थरूर की 7 बड़ी बातें….
- पाकिस्तान की जीडीपी ग्रोथ करीब 2.7 फीसदी है, जबकि भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7 फीसदी या उससे अधिक है। पाकिस्तान की आर्थिक हालत बेहद नाजुक है। अंतरराष्ट्रीय और पश्चिमी देशों से मिलने वाली मदद उसे कुछ समय के लिए सहारा देती है, लेकिन यही कमजोरी भविष्य में सैन्य रोमांच को बढ़ावा दे सकती है।
- पाकिस्तान अब उन क्षेत्रों में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है, जहां भारत पहले से मजबूत है। खासतौर पर टेक्सटाइल और कृषि जैसे सेक्टरों में पाकिस्तान की गतिविधियां बढ़ रही हैं, जिससे क्षेत्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
- पाकिस्तान ने अमेरिका को खनिज संसाधनों तक पहुंच का प्रस्ताव दिया है और अपनी क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ा कारोबार भी एक ऐसी कंपनी को सौंपा है, जिसका संबंध जैकरी विटकॉफ और डोनाल्ड ट्रम्प के बेटों से बताया जा रहा है।

- दुनिया तेजी से बदल रही है और वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल का दौर चल रहा है। ऐसे में सवाल यह नहीं है कि किसे काबू में किया जाए, बल्कि यह है कि उन देशों से कैसे निपटा जाए, जिन्हें नियंत्रित करना आसान नहीं है।
- बांग्लादेश इस समय कई समस्याओं से जूझ रहा है। वहां ऊर्जा संकट है, महंगाई बढ़ रही है और निवेशकों का भरोसा कमजोर हो रहा है। बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच रक्षा समझौतों पर चर्चा यह संकेत देती है कि बांग्लादेश भारत को दुश्मन के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।
- भारत ने बांग्लादेश के लिए बंदरगाह, रेल और ऊर्जा ग्रिड से जुड़ी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजनाएं प्रस्तावित की हैं, जो बांग्लादेश के हित में हैं। हालांकि, यह सब देश में स्थिरता पर निर्भर करता है। भारत के लिए एक शांत और स्थिर बांग्लादेश बेहद जरूरी है, क्योंकि अस्थिरता उसे भारत की “सॉफ्ट अंडरबेली” बना सकती है।
- कुछ लोग खुले तौर पर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश से अलग करने की धमकी दे रहे हैं और अलगाववादी तत्वों को पनाह दे रहे हैं। जमात-ए-इस्लामी जैसी इस्लामिक ताकतों ने हालात को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है।

थरूर के पिछले 2 बयान
25 दिसंबरः अवैध प्रवासियों पर सरकार का एक्शन सही
थरूर ने 25 दिसंबर को देश में गैरकानूनी तरीके से रहने वाले लोगों (अवैध प्रवासियों) के खिलाफ सरकार के एक्शन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा और इमिग्रेशन व्यवस्था को ठीक से संभालना सरकार की जिम्मेदारी है। पूरी खबर पढ़ें…
4 नवंबर- भारत में पॉलिटिक्स फैमिली बिजनेस
थरूर ने 4 नवंबर को भारत की वंशवादी राजनीति की आलोचना करते हुए एक लेख में कहा था- भारत में राजनीति फैमिली बिजनेस बन गई है। जब तक राजनीति परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रहेगी, तब तक लोकतांत्रिक सरकार का असली मतलब पूरा नहीं हो सकेगा। पूरी खबर पढ़ें…

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थरूर बोले-पहली वफादारी देश के लिए, पार्टी के लिए नहीं:दूसरे दलों के साथ मिलकर काम करना चाहिए, इसे गद्दारी समझ लिया जाता है

कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने कहा कि किसी भी नेता की पहली वफादारी देश के प्रति होनी चाहिए, पार्टी के प्रति नहीं। थरूर 20 जुलाई को कोच्चि में ‘शांति, सद्भाव और राष्ट्रीय विकास’ पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। पूरी खबर पढ़ें…