The Election Commission said it has full authority to conduct SIR. | चुनाव आयोग बोला- उसे SIR कराने का पूरा अधिकार: सुप्रीम कोर्ट में कहा- कोई विदेशी वोटर लिस्ट में न रहे ये हमारी जिम्मेदारी, संविधान में इसका जिक्र
नई दिल्ली6 मिनट पहले
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चुनाव आयोग (EC) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उसे वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेसिव रिविजन (SIR) कराने का पूरा अधिकार है। आयोग ने यह भी बताया कि उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है कि कोई भी विदेशी नागरिक वोटर लिस्ट में शामिल न हो।
सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें कई राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। इन याचिकाओं में चुनाव आयोग की शक्तियों, नागरिकता की पहचान और वोट देने के अधिकार से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।
चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने CJI सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच के सामने दलीलें पेश कीं।
वोटर लिस्ट को सही और साफ रखना हमारा काम
द्विवेदी ने कहा कि संविधान के अनुसार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और जज जैसे सभी प्रमुख पदों पर नियुक्ति के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य शर्त है।
भारत का संविधान नागरिक-केंद्रित है, इसलिए हर अहम पद पर केवल भारतीय नागरिक ही रह सकता है। इसी तरह चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वोटर लिस्ट में सिर्फ योग्य भारतीय नागरिकों के नाम ही दर्ज हों।
वकील ने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग राजनीतिक दलों की बयानबाजी का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं है। हमारा मुख्य काम वोटर लिस्ट को सही और साफ रखना है।
संविधान के अनुच्छेद 324 में शक्तियों का उल्लेख
- द्विवेदी ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 324 चुनाव आयोग को चुनावों पर नियंत्रण, निर्देशन और निगरानी की शक्ति देता है। यह शक्ति कानूनों के कारण खत्म नहीं हो जाती, बल्कि हर मामले के अनुसार इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
- उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 324, 325, 326 और रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपुल एक्ट की धारा 16, चुनाव आयोग के अधिकारों को वोटर लिस्ट रिविजन से नहीं रोकते।
SIR प्रक्रिया NRC जैसी नहीं
- उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया NRC जैसी नागरिकता तय करने वाली प्रक्रिया नहीं है। NRC में सभी लोग शामिल होते हैं, जबकि मतदाता सूची में केवल 18 वर्ष से ऊपर के भारतीय नागरिक ही शामिल होते हैं।
- द्विवेदी ने कहा कि अगर वोटर लिस्ट में विदेशी हैं तो उन्हें बाहर करना जरूरी है। यह चुनाव आयोग का राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारी है।
अब इस मामले में आगली सुनवाई 8 जनवरी को होगी।

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