March 26, 2026

Two loco trains collide in a tunnel in Chamoli, 50 injured | चमोली में सुरंग में टकराई दो लोको ट्रेनें, 59 घायल: THDC विद्युत परियोजना का काम चल रहा था, बिहार-झारखंड के मजदूर शामिल – Chamoli News

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अस्पताल में बैठे मजदूर, कुछ को हल्की चोटें आई हैं।

चमोली जिले के पीपलकोटी स्थित THDC जल विद्युत परियोजना क्षेत्र में बनी सुरंग के अंदर मंगलवार रात करीब 10 बजे दो लोको ट्रेनें आपस में टकरा गईं, जिसमें 59 मजदूर घायल हो गए हैं। जिनमें से 5 की हालत गंभीर बनी हुई है।

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बताया जा रहा है कि ट्रेनें करीब 108 मजदूरों को कार्यस्थल तक ले जा रही थीं, तभी किसी तकनीकी समस्या के कारण दोनों आपस में टकरा गईं। घायलों में उड़ीसा, बिहार और झारखंड के मजदूर शामिल हैं।

घटना की सूचना मिलते ही परियोजना प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा। 17 लोगों को पीपलकोटी में स्थित विवेकानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया है और 42 लोग गोपेश्वर जिला अस्पताल में भर्ती हैं।

मौके पर पहुंचे डीएम सौरभ कुमार के अनुसार हादसा शिफ्ट चेंज के दौरान हुआ है, गंभीर रूप से घायल हुए लोगों के हाथ-पैर में फ्रैक्चर आया है।

घटना से जुड़ी PHOTOS…

हादसे के बाद मौके पर पहुंचे सीआईएसएफ के जवान।

हादसे के बाद मौके पर पहुंचे सीआईएसएफ के जवान।

एंबुलेंस से सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया।

एंबुलेंस से सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया।

घायल मजदूरों को अस्पताल ले जाते लोग।

घायल मजदूरों को अस्पताल ले जाते लोग।

घायल मजदूरों को लाते उनके साथी।

घायल मजदूरों को लाते उनके साथी।

टक्कर से ट्रेन के अंदर ही गिरे मजदूर

हादसा परियोजना क्षेत्र के टीवीएम साइड पर हुआ। टक्कर इतनी तेज थी कि कई मजदूर ट्रेन के भीतर गिर पड़े और उन्हें गंभीर चोटें आईं हैं, हालांकि ज्यादातर मजदूरों को हल्की चोटें लगी हैं। घटना के बाद सुरंग के अंदर ही अफरातफरी का माहौल बन गया और परियोजना प्रबंधन तुरंत घटनास्थल पर पहुंचा। सभी घायलों को अस्पताल में पहुंचा दिया गया है।

जानिए क्या है विष्णुगाड़‑पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना…

2013 में काम हुआ था शुरू विष्णुगाड़‑पीपलकोटी हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। यह परियोजना अलकनंदा नदी पर बनाई जा रही है, जो गंगा नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है। विष्णुगाड़‑पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना का निर्माण करीब 2013‑2014 से शुरू हुआ, जब सिविल कार्यों और भूमि अधिग्रहण के साथ परियोजना का ठेका EPC कंपनियों को दिया गया। इसके बाद धीरे‑धीरे बांध, टनल और पावर हाउस जैसे बड़े ढांचे का निर्माण शुरू हुआ।

444 मेगावाट है परियोजना की क्षमता परियोजना का मुख्य उद्देश्य बिजली उत्पादन करना है। इसके लिए नदी में 65 मीटर ऊंचा डायवर्जन बांध बनाया गया है, जिससे पानी को नियंत्रित तरीके से टर्बाइन तक ले जाया जाएगा। जलाशय की कुल क्षमता 3.63 मिलियन घन मीटर है, जिसमें से लगभग 2.47 मिलियन घन मीटर सक्रिय रूप से बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल होगा। परियोजना में पानी को पावर हाउस तक पहुंचाने के लिए टनल और पाइपलाइन सिस्टम बनाया गया है। इसमें 3 इंटेक टनल, 3 डी-सिल्टिंग चैंबर, हेड रेस टनल, सर्च शाफ्ट और 2 प्रेशर शाफ्ट शामिल हैं। पावर हाउस में दो भूमिगत हॉल हैं – मशीन हॉल और ट्रांसफॉर्मर हॉल, जहां टर्बाइन और ट्रांसफॉर्मर लगाए जाएंगे। परियोजना की कुल क्षमता 444 मेगावाट है। इससे सालाना लगभग 1657 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन होगा। इस बिजली का 13% उत्तराखंड राज्य को निशुल्क दी जाएगी और 1% स्थानीय क्षेत्र के विकास में उपयोग होगा।

कई तकनीकी काम हुए पूरे साल 2025 में परियोजना में कई तकनीकी काम पूरे हुए। 16 जनवरी 2025 को यूनिट‑2 में डीटी लाइनर (पानी की नलिकाओं को मजबूत करने वाली लाइनिंग) का निर्माण पूरा किया गया। इसके बाद 22 फरवरी 2025 को ईओटी क्रेन का यूनिट‑1 तक विस्तार किया गया, जिससे भारी मशीनों और उपकरणों को पावर हाउस तक आसानी से पहुंचाया जा सके।

TRT लाइनिंग और सर्विस बे का चल रहा विस्तार वर्तमान में परियोजना में TRT लाइनिंग (मुख्य पानी के मार्ग की लाइनिंग) और सर्विस बे का विस्तार चल रहा है। साथ ही, मशीन हॉल और ट्रांसफॉर्मर हॉल में टर्बाइन और ट्रांसफॉर्मर के इंस्टॉलेशन और टेस्टिंग के काम भी जारी हैं। ये सभी कार्य परियोजना को दिसंबर 2026 तक चालू करने के लक्ष्य के अनुरूप किए जा रहे हैं।

उत्तर भारत में बिजली की कमी होगी पूरी परियोजना से उत्तर भारत में बिजली की कमी को पूरा करने, रोजगार पैदा करने, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और वन्य जीवन के संरक्षण जैसे फायदे भी होंगे। परियोजना का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक पूरा करना है।

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