Uttarakhand Faces Dry December: No Rain or Snowfall Impacts Tourism | बारिश और बर्फबारी की कमी से सूखा हिमालय: पूरे उत्तराखंड में दिसंबर में नहीं हुई बारिश, ग्लेशियर और फसलों पर पड़ेगा इफेक्ट – Dehradun News
बारिश और बर्फबारी ना होने से पहली बार दिसंबर में कुछ ऐसी दिख रहीं थी हंसलिंग की चोटियां।
सर्दियों में बारिश और बर्फबारी के लिए पहचाना जाने वाला उत्तराखंड इस बार दिसंबर महीने में पूरी तरह सूखा रहा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक राज्य के किसी भी जिले में दिसंबर के दौरान बारिश या बर्फबारी दर्ज नहीं हुई। हिमपात न होने से पहाड़ी
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IMD के आंकड़ों के अनुसार, मानसून के बाद अक्टूबर से दिसंबर के बीच राज्य में कुल मिलाकर 24 प्रतिशत वर्षा की कमी रही। दिसंबर में देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, अल्मोड़ा, चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ समेत सभी जिलों में बारिश का प्रतिशत शून्य रहा, जबकि सामान्य तौर पर इस महीने औसतन करीब 17.5 मिमी बारिश होती है। पिछले सालों की बात करें तो 2022 में 99%, 2018 में 92%, 2016 में 82%, 2023 में 75% और 2021 में 14% बारिश हुई थी। किसी भी वर्ष में पूरे राज्य में बारिश या बर्फबारी का पूर्ण अभाव नहीं देखा गया। इसके विपरीत, दिसंबर 2024 में 89% अधिक बारिश दर्ज की गई, जो शीतकालीन वर्षा में वर्ष-दर-वर्ष होने वाली तेज परिवर्तनशीलता को दर्शाती है।

केदारनाथ और तुंगनाथ की ये तस्वीर दिसंबर की है, जब बर्फबारी और बारिश ना होने से पहाड़ियां काली दिखने लगी थीं।
10 साल बाद दिसंबर में बारिश-बर्फबारी नहीं
मौसम विभाग के अनुसार पिछले कई दशकों में ऐसा पहली बार हुआ है जब पूरे राज्य में दिसंबर के दौरान बारिश या बर्फबारी बिल्कुल नहीं हुई। इससे पहले हर साल किसी न किसी हिस्से में शीतकालीन वर्षा या हिमपात दर्ज किया जाता रहा है।
पश्चिमी विक्षोभ कमजोर पड़ने से बिगड़ा मौसम चक्र
देहरादून स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (RMC) के निदेशक सीएस तोमर ने बताया कि दिसंबर में सूखे का मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ का कमजोर रहना है। आमतौर पर चार से पांच पश्चिमी विक्षोभ उत्तराखंड में सर्दियों की बारिश और हिमपात लाते हैं, लेकिन इस बार सिस्टम बनने के बावजूद उनका असर राज्य में कमजोर रहा और वे दक्षिण दिशा की ओर बढ़ गए।
उत्तर भारत के अन्य पहाड़ी राज्यों में भी कम बर्फ
सीएस तोमर के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ कमजोर रहने का असर हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी देखने को मिला। इन राज्यों में भी पिछले वर्षों की तुलना में कम बारिश और बर्फबारी दर्ज की गई है।
रबी और सेब की फसल पर संकट
बारिश और हिमपात न होने से राज्य की रबी और सेब की फसल प्रभावित होने की आशंका है। कम तापमान वाली फसलों के लिए बर्फबारी को सबसे अनुकूल माना जाता है, लेकिन इस बार उसके अभाव में फसलों की ग्रोथ प्रभावित हो सकती है।
पहाड़ी इलाकों में पानी संकट की चेतावनी
वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक मनीष मेहता कहते हैं, बारिश और बर्फबारी न होने से आने वाले समय में पहाड़ी क्षेत्रों में पानी का संकट गहरा सकता है। क्योंकि बर्फबारी न होने से ग्लेशियर तेजी से पिघलेंगे। दरअसल, बर्फबारी ग्लेशियर पर कंबल पर का काम करती है और इन्हें तेजी से पिघलने से रोकती है। ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने के कारण उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भू-जल पुनर्भरण प्रभावित होगा और पानी की कमी हो सकती है।

ये तस्वीरें पिथौरागढ़ में स्थित पंचाचूली चोटियों की है जो दिसंबर में कुछ इस तरह दिख रहीं थीं।
जनवरी में भी राहत की उम्मीद कम
मौसम विभाग का कहना है कि मौजूदा सिस्टम के अनुसार जनवरी में भी पश्चिमी विक्षोभ कमजोर रह सकते हैं। अगले सात दिनों तक बारिश या बर्फबारी की कोई ठोस संभावना नहीं है।
खेती और बागवानी पर सीधा असर
राज्य में करीब 57,716 हेक्टेयर में सब्जियों की खेती होती है। दिसंबर में गेहूं, टमाटर, मिर्च, आलू, मटर, पत्ता गोभी और सरसों की फसलें तैयार होती हैं, लेकिन बारिश न होने से पाले का असर बढ़ गया है। वहीं, 1,650 हेक्टेयर में हो रही फूलों की खेती भी खतरे में है। उद्यान विभाग के मुताबिक दिसंबर रबी फसलों का फ्लॉवरिंग समय होता है और बारिश के अभाव में उपज में 40 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है।