Warren Buffett Retirement Interesting Facts; Net Worth | Berkshire Hathaway | अखबार बेचकर शुरुआत, अब 97 लाख करोड़ का साम्राज्य: वॉरेन बफेट 34 लाख करोड़ कैश क्यों रखते हैं, आज 95 की उम्र में रिटायरमेंट
निवेश के जादूगर वॉरेन बफेट आज 95 की उम्र में रिटायर हो रहे हैं। 60 साल पहले जब उन्होंने बर्कशायर हैथवे की कमान संभाली, तो कंपनी के एक शेयर की कीमत 18 डॉलर थी। आज एक शेयर की कीमत 8 लाख डॉलर से भी ज्यादा है। यानी 60 साल में 45,000 गुना की बढ़ोतरी।
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इस दौरान अमेरिका ने 11 राष्ट्रपति देखे, दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियां डूबी-उभरीं, बाजारों ने कई बार सांस रोकी, लेकिन बफेट नहीं बदले। न उनका तरीका, न उनकी फिलॉसफी। उनकी बर्कशायर हैथवे 34 लाख करोड़ कैश के साथ आज दुनिया की सबसे बड़ी इन्वेस्टमेंट कंपनी है और बफेट दुनिया के 10वें सबसे अमीर शख्स।
वॉरेन बफेट को सिर्फ आंकड़ों में नहीं मापा जा सकता। हमने 5 चैप्टर्स में उनकी जिंदगी के अहम पहलुओं को पिरोया है…

साल 1929 और अमेरिका का ओमाहा शहर। स्टॉक ब्रोकर हॉवर्ड बफेट अपनी पत्नी लैला और बेटी डोरिस के साथ अच्छी जिंदगी जी रहे थे। तभी अमेरिका में महामंदी का दौर शुरू हुआ और स्टॉक मार्केट क्रैश हो गया। हॉवर्ड का काफी नुकसान हुआ और परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया। इसी बीच 30 अगस्त 1930 को उनके घर वॉरेन बफेट का जन्म हुआ।
पिता के कारण कम उम्र से ही बफेट बिजनेस और इन्वेस्टमेंट में दिलचस्पी लेने लगे। लाइब्रेरी में उन्हें अमेरिकी बिजनेस राइटर फ्रांसेस मिनकर की किताब ‘वन थाउसैंड वेस टू मेक 1000 डॉलर’ मिली, जिससे उन्होंने पैसे कमाने के तरीके सीखे और अपनाए।
6 साल की उम्र में च्विंगम बेची, 13 साल में टैक्स भरा
महज 6 साल की उम्र में वॉरेन ने दादा की किराने की दुकान से खरीदे च्विंगम पड़ोसियों को बेचकर मुनाफा कमाया। फिर वे कोका-कोला की बोतलें बेचने लगे। 6 बोतल के एक सेट से वे 5 सेंट कमाते। बाद में उन्होंने अखबार, गोल्फ बॉल, पॉपकॉर्न और मूंगफली बेची। जब 11 साल के हुए तो वॉरेन न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज घूमने गए।
1942 में पिता हॉवर्ड अमेरिकी कांग्रेस के मेंबर चुने गए। हालांकि वॉरेन ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ अखबार बेचते रहे, जिससे उन्हें हर महीने 175 डॉलर की कमाई होती। इसी साल उन्होंने बड़ी बहन डोरिस के साथ 120 डॉलर के 3 शेयर खरीदे। ये शेयर अमेरिकी पेट्रोलियम कंपनी सिटीज सर्विस के थे। 3 महीने बाद शेयर का भाव गिरने लगा तो बहन इन्हें बेचने को कहने लगी, लेकिन वॉरेन ने इंतजार करने का फैसला किया। 4 महीने बाद इन शेयरों से 5 डॉलर का मुनाफा हुआ।

बीचोबीच वॉरेन बफेट खड़े हैं, उनके आगे मां लैला बैठी हैं। एक तरफ छोटी बहन बर्टी और दूसरी ओर बड़ी बहन डोरिस खड़ी हैं।
13 साल की उम्र में उन्होंने पहला इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया। हाई स्कूल के दौरान 14 साल के वॉरेन ने करीब 40 एकड़ खेती की जमीन खरीदी, जिसे किराए पर चढ़ा दिया। 17 साल के वॉरेन से अपनी सेविंग्स से कुछ पिनबॉल मशीनें खरीदीं और नाई की दुकानों पर लगवा दी।
छोटी बहन की रूममेट से पहली नजर में प्यार, फिर शादी
किस्सा 1950 की गर्मियों का है। वॉरेन छोटी बहन बर्टी से मिलने कोलंबिया गए थे। वहीं बर्टी ने अपनी रूममेट सुसैन थॉम्पसन से उनकी मुलाकात कराई। उन्हें पहली नजर में प्यार हो गया, लेकिन सुसैन को कोई दिलचस्पी नहीं थी।
फिर भी वॉरेन सुसैन से दोस्ती बढ़ाने की कोशिश करते रहे। जल्द ही वॉरेन सुसैन के पिता और साइकोलॉजी के प्रोफेसर विलियम डॉक थॉम्पसन के करीबी बन गए। धीरे-धीरे सुसैन को भी वॉरेन का साथ पसंद आने लगा। 2 साल की मशक्कत के बाद सुसैन ने वॉरेन से शादी के लिए हामी भरी। 19 अप्रैल 1952 को वॉरेन बफेट और सुसैन ने शादी कर ली।

शादी के दौरान सुसैन और वॉरेन बफेट।

1956 में वॉरेन ने एक इन्वेस्टमेंट पार्टनरशिप शुरू की। नाम रखा- बफेट एसोसिएट्स लिमिटेड। इसमें उन्होंने दोस्तों और परिवारवालों को जोड़ा। वॉरेन को कम उम्र से ही भरोसा था कि वैल्यू-इन्वेस्टमेंट का तरीका बहुत ज्यादा रिटर्न देगा।
वॉरेन बताते हैं, ‘प्रो. ग्राहम ने मुझे ‘निवेश के दो नियम’ सिखाए, जिन्हें मैं हमेशा से अपना रहा हूं। पहला नियम- कभी पैसा मत गंवाओ और दूसरा नियम- पहले नियम को कभी मत भूलो।’ प्रो. ग्राहम वैल्यू इन्वेस्टिंग के जनक हैं। उनकी इसी थ्योरी और सीख से वॉरेन आज दुनिया के सबसे बड़े निवेशक हैं।

बफेट एसोसिएट्स लिमिटेड के अहम किरदार बिल स्कॉट, वॉरेन बफेट (बीच में) और जॉन हार्डिंग।
भरोसा टूटने पर खरीदी डूबती टेक्सटाइल कंपनी
बात दिसंबर 1962 की है। अमेरिकी टेक्सटाइल कंपनी बर्कशायर हैथवे घाटे में चल रही थी। दिन-ब-दिन क्लॉथ मिलें बंद हो रही थीं। तभी नौजवान इन्वेस्टर वॉरेन बफेट ने डूब रही कंपनी के शेयर प्राइस में एक पैटर्न देखा और उन्हें खरीदने लगे। धीरे-धीरे उनके पास बर्कशायर हैथवे के 7% शेयर हो गए, लेकिन कंपनी को घाटे में जाता देख वॉरेन को लगा कि पैसा डूब जाएगा।
1964 में बर्कशायर हैथवे के CEO स्टैंटन ने वॉरेन से 11.5 डॉलर पर कंपनी के शेयर खरीदने की पेशकश की। ये फायदे का सौदा था। वॉरेन राजी हो गए, लेकिन कुछ दिन बाद जब दस्तावेज मिले, तो उन पर शेयर का दाम 11.375 डॉलर लिखा था। पैसों का फर्क छोटा था, लेकिन वॉरेन को भरोसा टूटने पर गुस्सा आया। उन्होंने शेयर बेचने की बजाय और खरीदना शुरू किया और कंपनी के नए मालिक बन गए। वहीं स्टैंटन और उनके बेटे ने कंपनी के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया।
डूबती कंपनी को बचाने के लिए वॉरेन ने कई कोशिशें की, लेकिन नाकामी हाथ लगी। फिर उन्होंने बर्कशायर हैथवे को टेक्सटाइल कंपनी के बजाय होल्डिंग कंपनी बना दिया। इसके बाद कंपनी इंश्योरेंस, एनर्जी, रेल, डेयरी जैसे तमाम सेक्टर में काम करने लगी। आज कंपनी के 189 बिजनेस हैं।
वॉरेन के सीईओ रहते बर्कशायर हैथवे ने एपल, कोका-कोला और बैंक ऑफ अमेरिका समेत 41 कंपनियों में 25 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा निवेश किए। अगस्त 2024 में बर्कशायर हैथवे एक ट्रिलियन डॉलर यानी 90 लाख करोड़ रुपए की मार्केट कैप वाली अमेरिका की पहली नॉन-टेक कंपनी बनी। बर्कशायर हैथवे के पास करीब 34 लाख करोड़ रुपए नकद हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है।


बर्कशायर हैथवे के पास 381 बिलियन डॉलर यानी करीब 34 लाख करोड़ रुपए कैश है। उन्होंने यह रकम न कहीं निवेश की है, न उससे सोना खरीदा है, न फिक्स्ड डिपॉजिट किया है और न ही बैंक में जमा किया है।
इस रकम का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी ट्रेजरी बिल के रूप में हैं। अमेरिकी ट्रेजरी बिल, करेंसी नोट की तरह कैश ही माना जाता है। महंगाई के चलते हर साल इस मोटी रकम की वैल्यू 2% से 4% कम हो जाती है, फिर भी वॉरेन ऐसा करते क्यों हैं?
दरअसल, वॉरेन दशक में एक बार मिलने वाले मौके का इंतजार करते हैं। जैसे- 2020 की कोरोना महामारी, 2008 का लेमन ब्रदर्स क्राइसिस और 2000 का Dot.com Bubble क्राइसिस।
ऐसे मौकों पर जब ज्यादातर कंपनियां कंगाल होने लगती हैं तब वॉरेन 40% से 50% डिस्काउंट पर स्टॉक खरीदते हैं। इसके लिए वे कैश का इस्तेमाल करते हैं।
2020 में शेयरहोल्डर्स की एक मीटिंग में उन्होंने कहा था, ‘अगले 20-30 सालों में ऐसा दो या तीन बार होगा, जब सोने की बारिश हो रही होगी। तब हमें सिर्फ उसे समेटने के लिए बाहर जाना होगा, लेकिन यह कोई नहीं जानता कि ऐसा कब होगा।’
वॉरेन शेयर बाजार को Overvalued मानते हैं। यानी शेयर बाजारों में होने वाली उछाल असली नहीं। वे मानते हैं कि कभी न कभी शेयर बाजार क्रैश हो सकते हैं। इसलिए भी बफेट की कंपनी ने इतनी बड़ी रकम शेयर बाजार में निवेश करने के बजाय कैश रखी है।
ये ट्रेंड अमेरिका की अन्य कई बड़ी कंपनियों में भी दिखता है, जिन्होंने दूसरी कंपनियों के शेयर के बजाय सरकारी बॉन्ड्स में इन्वेस्ट कर रखा है।

वॉरेन बफेट को ताश खेलने का शौक हैं। वे इस गेम में बिल गेट्स को अपना सबसे बड़ा कॉम्पिटिटर मानते हैं।
50 साल की उम्र के बाद कंपाउंडिंग से कमाई 99% संपत्ति
11 साल की उम्र से इन्वेस्टमेंट करने वाले वॉरेन बफेट ने अपनी 99% संपत्ति 50 साल की उम्र के बाद कमाई है, खासकर 60-70 की उम्र के बाद। दरअसल, वॉरेन ने पैसा कमाने के लिए दो तरकीब अपनाई…
1. वैल्यू इन्वेस्टिंग: वॉरेन ने अपने गुरु प्रो. बेंजामिन ग्राहम की वैल्यू इन्वेस्टिंग की थ्योरी अपनाई। इसके मुताबिक, केवल वही स्टॉक या कंपनी खरीदनी चाहिए, जो अपनी एक्चुअल वैल्यू यानी असली कीमत से सस्ती हो। वॉरेन का फोकस हमेशा कंपनी की इंटरनल वैल्यू, कैश फ्लो और लॉन्ग टर्म बिजनेस क्वालिटी पर रहा, न कि शॉर्ट टर्म मार्केट प्राइस पर।
2. कंपाउंडिंग: वॉरेन ने न सिर्फ पैसे से पैसा कमाया, बल्कि कमाए हुए पैसे से भी पैसा बनाया। इसे ही कंपाउंडिंग कहते हैं। मान लीजिए कि वॉरेन ने किसी कंपनी में 10 साल के लिए 10 हजार रुपए लगाए। हर साल उन्हें 10% रिटर्न मिला, जो उसी कंपनी में इन्वेस्ट होता रहा तो 10 साल बाद उन्हें कुल 25,937 रुपए मिले। यानी हर साल मिलने वाले 10% रिटर्न ने भी पैसा कमाया।
भले ही इन थ्योरीज से ज्यादा पैसा कमाने में ज्यादा वक्त लगता है, लेकिन ये जरूर है कि कम पैसे से भी ज्यादा मुनाफा बनाया जा सकता है। शुरुआती 20-30 साल में कमाई धीरे-धीरे बढ़ती है, लेकिन इसके बाद के 10-20 साल में कमाई का ग्राफ तेजी से ऊपर गया। वॉरेन के साथ यही इफेक्ट 50 की उम्र के बाद हुआ।


वॉरेन बफेट पैसा बनाने के लिए ये 4 वेल्थ मंत्र बताते हैं…
1. जब लोग सतर्क हों, तब लालची बन जाओ
- वॉरेन कहते हैं, ‘मेरी खरीदारी का एक सीधा नियम है- जब दूसरे लालची हों तब खुद सतर्क रहो और जब दूसरे डरे हुए हों तब लालची बनो।’
- जब कभी शेयर मार्केट में लगातार गिरावट आती है, तो लोग सतर्क हो जाते हैं और पैसा निकालने लगते हैं। वहीं जब उछाल आता है, तो हर कोई शेयर खरीदने में जुट जाता है।
- वॉरेन मानते हैं कि निवेश का सबसे अच्छा समय वही है, जब लोग मार्केट से पैसा निकालने लगें या शेयर खरीदने से बचे क्योंकि तब आप कम दाम में शेयर खरीद कर मुनाफा उठा सकते हैं।
- 2008 में उन्होंने कहा था कि भविष्य में बेरोजगारी बढ़ेगी। शेयर मार्केट में गिरावट आएगी। लोग पैसा निकाल रहे होंगे, तब मैं अमेरिकी शेयरों में पैसा लगाऊंगा।
2. बुरी खबर ही निवेशक की अच्छी दोस्त
- वॉरेन कहते हैं कि पैसा कमाने वालों को अच्छी खबर का इंतजार नहीं करना चाहिए। अंग्रेजी में कही उनकी बात काफी मशहूर हैं, ‘If you wait for the robins, spring will be over.’ यानी अगर चिड़ियों के आने का इंतजार करेंगे, तो बसंत जा चुकी होगी।
- वॉरेन मानते हैं कि बुरी खबरें ही निवेशक की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं। ये भविष्य का एक ऐसा हिस्सा खरीदने का मौका देती हैं, जिसका दाम कम और फायदा ज्यादा होता है।’
- अमेरिकी शेयर मार्केट के डॉव जोन्स इंडेक्स के एग्जांपल से वॉरेन समझाते हैं, ‘पिछली सदी में महामंदी, विश्वयुद्ध, महामारी जैसी एक दर्जन से ज्यादा परिस्थितियां आईं। इस दौरान डॉव जोन्स में काफी उतार-चढ़ाव आया। कुछ ने बुरी खबरें देखकर पैसा निकाल लिया और नुकसान उठाया। कुछ टिके रहे और उन्होंने पैसा बनाया। इस दौरान डॉव 66 से बढ़कर 48,442 हो गया।’
3. वही चीज खरीदें, जिसकी समझ हो
- वॉरेन कहते हैं कि जिस बिजनेस को आप समझ नहीं सकते, उसमें पैसा मत लगाइए। पैसा वहीं लगाओ या वही चीज खरीदो, जिसकी समझ हो।
- यानी अगर आपको ये नहीं पता है कि IT, फार्मा, बैंक, रियल एस्टेट जैसा कोई सेक्टर या प्रोडक्ट पैसा कैसे कमाते हैं, तो उसमें पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है।
- निवेश करने से पहले सीखिए कि कंपनी क्या करती है, कमाई कैसे होती है, कर्ज कितना है, रिस्क क्या है, खर्च कितना है? इसके बाद ही उसमें निवेश कीजिए।
- वॉरेन कहते हैं कि फाइनेंस की बेसिक जानकारी बेहद जरूरी है। सबसे पहले कंपनी को समझो। फिर पैसा लगाओ। इसके साथ अपनी स्किल्स बढ़ाओ। नई चीजें सीखो।
4. लंबे समय के लिए निवेश करो और छोड़ दो
- वॉरेन कहते हैं, ‘मैं शेयर मार्केट में छोटे समय के उतार-चढ़ाव को देखकर न तो कोई अनुमान लगाता हूं और न ही पैसा लगाता हूं। मुझे कोई अंदाजा नहीं है कि एक महीने या साल में शेयर की कीमत घटेगी या बढ़ेगी।’
- वॉरेन हमेशा लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टिंग की बात करते हैं। यानी ऐसी कंपनी चुने, जिस पर आप कम से कम 10 साल के लिए निवेश कर सकते हैं। उन्होंने खुद 50 साल की उम्र के बाद अपनी 99% संपत्ति बनाई है।
- वॉरेन कहते हैं कि शेयर के चढ़ते-घटते दाम से परेशान होकर बार-बार उन्हें खरीदने-बेचने से न तो सही मुनाफा होता है और न ही मन शांत रहता है। अच्छी कंपनी चुनें और सही दाम पर शेयर खरीदें और लंबे समय तक उसे होल्ड करें।


बर्कशायर हैथवे कंपनी की सालाना बैठक में 3 मई 2025 को वॉरेन बफेट ने कहा, ‘2025 के अंत में मैं CEO के पद से रिटायरमेंट ले लूंगा और मेरे बाद कंपनी की जिम्मेदारी ग्रेग एबेल संभालेंगे।’
वॉरेन चाहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें शांति और सुकून भरा जीवन बिताने का समय मिले। वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में कम दिखेंगे। वे ओमाहा के उसी घर में रहेंगे, जहां वे 67 साल से रह रहे हैं। हालांकि उन्होंने किसी नई जगह रहने या जाने की बात नहीं की है।
दरअसल, 1958 में वॉरेन ने ओमाहा शहर में एक घर खरीदा। तब इसकी कीमत 31,500 डॉलर थी, आज के हिसाब से 3.2 करोड़ रुपए। 6280 वर्ग फीट में बने इस घर में 5 बेडरूम और 2 बाथरूम हैं।
वॉरेन बर्कशायर हैथवे के शेयर होल्डर्स के लिए सालाना खत लिखते थे, लेकिन रिटायरमेंट के बाद वे ऐसे खत नहीं लिखेंगे। हालांकि थैंक्सगिविंग मैसेज देना जारी रखेंगे। क्रिसमस पर दोस्तों, करीबियों और परिवारवालों को गिफ्ट और लेटर देते रहेंगे।

99% संपत्ति और बर्कशायर हैथवे के सभी शेयर करेंगे दान
वॉरेन बफेट के पास करीब 15 हजार करोड़ डॉलर यानी करीब 13 लाख करोड़ रुपए की कुल संपत्ति है। 2006 में उन्होंने एक ‘गिविंग प्लेज’ यानी परोपकारी शपथ ली थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे अपनी 99% संपत्ति दान कर देंगे।
उन्होंने कहा, ‘बर्कशायर हैथवे के अपने सभी शेयर धीरे-धीरे परोपकारी संस्थाओं को दान कर दूंगा। मेरी संपत्ति का 99% से ज्यादा हिस्सा मेरे रहते या न रहते दान कर दिया जाएगा। पैसों के हिसाब से ये नंबर तो बहुत बड़ा दिख रहा होगा, लेकिन लोग हर रोज इससे कहीं ज्यादा दान कर देते हैं।
वॉरेन ने ये भी बताया कि इससे उनके 3 बच्चों की जिंदगी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्हें पहले ही पर्सनल यूज के लिए अच्छी-खासी रकम मिल चुकी है और भविष्य में भी मिलती रहेगी।

बर्कशायर हैथवे की एक मीटिंग के दौरान वॉरेन बफेट अपने बच्चों के साथ। सबसे बाएं हॉवर्ड, सुसैन और सबसे दाएं पीटर।
वॉरेन ने मृत्यु के 10 साल बाद पूरी संपत्ति दान करने के लिए बनाया ट्रस्ट
पिछले दो दशकों में वॉरेन 60 अरब डॉलर दान कर चुके हैं। वॉरेन चाहते थे कि उनका किया ज्यादातर दान बिल गेट्स के ‘गेट्स फाउंडेशन’ में जाए। इसमें उन्होंने 40 अरब डॉलर दिए भी हैं, लेकिन हाल ही में उन्हें लगा कि कुछ नया किया जाना चाहिए। वे बिल गेट्स के खर्चीले रवैए से भी काफी असहज थे।
ऐसे में वॉरेन ने अपनी संपत्ति दान करने के लिए एक चैरिटेबल ट्रस्ट बनाया है, जिसका मैनेजमेंट उनके 3 बच्चे सुसैन, हॉवर्ड और पीटर करेंगे। यह ट्रस्ट वॉरेन की मृत्यु के बाद अगले 10 साल में उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा अलग-अलग संस्थाओं को दान कर देगा। इसमें एक शर्त है कि तीनों भाई-बहनों को रजामंदी से तय करना होगा कि पैसा किसे दिया जाए। वे हर साल करीब 50 करोड़ डॉलर दान करेंगे। इसका ज्यादातर हिस्सा बच्चों से जुड़ी संस्थाओं को जाएगा।
वॉरेन तीनों बच्चे लोगों की मदद करते हैं। सुसैन सोशल जस्टिस, एजुकेशन और हेल्थ पर, हॉवर्ड फूड, क्राइम और इंटरनेशनल हेल्प को लेकर और पीटर आदिवासियों की बेहतरी और भुखमरी रोकने के लिए काम करते हैं।
वॉरेन ने कहा, ‘मुझे भरोसा है कि मेरे बच्चे मेरे जाने के बाद ढंग से काम करेंगे। तीनों मिलकर काम करेंगे और सही फैसला लेंगे।’

ग्राफिक्स- दृगचंद्र भुर्जी
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References-
1. द स्नोबॉल: वॉरेन बफेटट एंड द बिजनेस ऑफ लाइफ – एलिस श्रोएडर
2. बफेटट: द मेकिंग ऑफ एन अमेरिकन कैपटलिस्ट – रोजर लोवेनस्टीन
3. बफेटटोलॉजी – मैरी बफेटट एंड डेविड क्लार्क
4. फोर्ब्स, न्यूयॉर्क टाइम्स, ब्लूमबर्ग, बिजनेस इंसाइडर जैसे न्यूजआउटलेट्स की रिपोर्ट