When he asked for wages, he was beaten with sticks, then he felt trapped. | मजदूरी मांगी तो लाठियों से पीटा, तब लगा फंस गए: कमरे में बंद कर 14-15 लोग पहरा देते, भतीजे की मौत के बाद भी घर नहीं जाने दिया – pratapgarh (Rajasthan) News
26 दिसंबर को राजस्थान पुलिस महाराष्ट के सोलापुर पहुंची और बंधक मजदूरों को जमींदार के चंगुल से छुड़ाया।
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बीमार हालत में भी काम करवाया। परिवार में कोई बीमार हो गया तो भी घर नहीं जाने दिया। जो भी मजदूर घर जाने की बात कहते उनको इकट्ठा कर एक कमरे में रखा जाता और वहां पहरे के लिए 14-15 लोग लाठी-डंडे लेकर खड़े कर देते। जो मजदूर भाग गए उनके बचे हुए साथियों से पैसे वसूले।

यह कहना है उन मजदूरों का जिनसे सोलापुर (महाराष्ट्र) के जाबुड़ गांव में बंधक बनाकर काम करवाया जा रहा था। प्रतापगढ़ (राजस्थान) की घंटाली पुलिस ने 26 दिसंबर की देर रात 950 किलोमीटर दूर जाकर इनका रेस्क्यू किया था।
मामला सामने आने के बाद दैनिक भास्कर (डिजिटल) रिपोर्टर इन मजदूरों के गांव पहुंचा। सबसे पहले हम जिला मुख्यालय से 90 किलोमीटर दूर घंटाली थाना क्षेत्र के जेथलिया गांव पहुंचे। यहां हमारी मुलाकात गणेश से हुई।

महाराष्ट्र से वापस लौटने के बाद भी मजदूरों के चेहरों पर मायूसी छाई रही। अब उन्हें भविष्य की चिंता सता रही है।
जब इच्छा हुई, मजदूरी के लिए उठा ले जाते गणेश ने बताया- 2 महीने पहले हमारे घर घंटाली के मालिया निवासी बंशीलाल आया था। बंशीलाल ने हमसे कहा कि गन्ने के खेत में कटाई के काम के लिए इंदौर जाना है। इसके लिए मैं, लक्ष्मण और मोनिका मजदूरी के लिए मान गए। वह हमें यहां टेम्पो से महाराष्ट्र ले गया।
यहां पहुंचते ही हमें गन्ने के खेतों में कटाई के काम में लगा दिया। जमींदार के लोग हमसे बेहरमी से काम करवाने लगे। मजदूरी का कोई समय नहीं था, जब इच्छा हुई हमें उठा दिया और काम करवाना शुरू कर दिया। हम मजदूरी के पैसे मांगते तो मारपीट करते। बीमार होते तो इलाज भी नहीं करवाते। रात 1-2 बजे तक हमसे मजदूरी करवाते थे।

प्रतापगढ़ के मजदूरों को इंदौर में काम करने का कहकर महाराष्ट्र ले जाया गया। वहां गन्ने के खेतों में दिन-रात काम करवाया जाता था।
मर गए तो गड्ढा खोदकर यहीं दफना दिया जाएगा मजदूरों को संभालने वाले लोग बोलते थे कि अगर कोई मर भी गया तो उन्हें यहीं गड्ढा खोदकर दफना देंगे। हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। पाटिल नाम के व्यक्ति ने हम पर बहुत ही जुल्म किए हैं। जमींदार के 4-5 लोग और इसमें शामिल हैं। उनके नाम हमें पता नहीं हैं।
बेटे की सलामती के लिए मांगी मन्नत इसी बीच पास में बैठी गणेश की मां जवली ने बताया कि घटना का पता चलते ही घर पर सभी लोग घबरा गए थे। बेटे के सही सलामत घर आने के लिए सभी गांव वालों के साथ प्रसिद्ध स्थान देवक माता जाने की मन्नत मांगी थी। अब बेटा सही सलामत घर आया है, तो सभी गांवों वालों को लेकर देवक माता के जाकर आए हैं।

सुबह 4 से रात 12 बजे तक काम करवाते जेथलिया के बाद हम यहां से 20 किलोमीटर दूर स्थित कुंवारी गांव पहुंचे। कुंवारी की रहने वाली रिता ने बताया- हमारे गांव से मेरे अलावा महिला मजदूरों में राजू, मंजू, सीमा, कविता हैं। साथ ही पुरुष मजदूरों में शंकर, सुनिल, केशुराम मजदूरी करने गए थे। वे हमें सुबह 4:00 बजे उठाते और रात को 12:00 जाने देते थे। भागने की कोशिश करते तो लाठियां लेकर 14 से 15 लोग खड़े रहते थे। पांच-पांच दिन तक कमरे में बंद कर बाहर से ताला लगा देते थे।

बीमार होने पर भी काम करवाया, मारपीट की कुंवारी गांव के ही शंकर ने बताया- मैं और मेरी बहन वहां पर गए थे। मैं वहां पहुंचते ही बीमार हो गया। मैं काम नहीं करता तो मेरे साथ मारपीट करते थे। कमरे से घसीटते हुए बाहर लेकर आते और लाठियों से मारपीट करते थे। मुझसे जबरदस्ती वहां के लठैत पैर दबवाते और मालिश करवाते थे।
कुंवारी गांव से दो भाई गए, एक पहले ही दिन भागा कुंवारी गांव से हम यहां से 20 किलोमीटर दूर चिकली गांव पहुंचे। चिकली गांव के महिपाल ने बताया- मैं और मेरे भाई ईश्वरलाल को इंदौर में गन्ना काटने की बात कहकर बंशीलाल यहां से ले गया था। रात को मैं सो गया। सवेरे जब नींद खुली तो पता चला कि हमें तो महाराष्ट्र में हूं। मेरे साथ 10 लोग काम कर रहे थे। मेरे भाई समेत 9 लोग मौका देखकर पहले ही दिन भाग गए। शेष बचे 52 लोगों के साथ मैं वहां काम कर रहा था।

साथी मजदूरों के भागने पर महिपाल के पिता ने 55 हजार रुपए ट्रांसफर किए। तब जाकर महिपाल से मारपीट बंद की गई।
जमींदार के लोगों ने भागने वाले मजदूरों की रकम मुझसे मंगवाई। मना करने पर मारपीट की। मैंने मेरे पिता को फोन किया। जिसके बाद पिता ने जमीन बेचकर पैसों की व्यवस्था की और उन्हें 55 हजार रुपए दिए तब जाकर उन्होंने मारपीट बंद की। इस दौरान अगर कोई घर जाने की बात कहता तो पहले ऐसे लोगों की लिस्ट बनाते और गाड़ी में बैठाकर कहीं दूर ले जाते और मारपीट करते थे।

घर जाने के लिए कहा तो विटा, धूलेश्वर और सूरजमल की लाठियों से पिटाई की गई। इस दौरान साथी मजदूर ने चुपके से वीडियो बना लिए थे।
महिपाल ने मारपीट का वीडियो दिया महिपाल ने एक वीडियो भी भास्कर रिपोर्टर को सौंपा। इसमें पीपलखूंट थाने के गांव कूड़ा पड़ा की विटा, धूलेश्वर और सूरजमल को गन्ने के खेत में लाठियों से पीटा जा रहा है। महिपाल ने बताया कि एक साथी मजदूर ने चुपके से ये वीडियो बनाया था। मजदूरों का कसूर बस इतना था कि उन्होंने काम छोड़ने की इच्छा जताई थी।
प्रतापगढ़ एसपी बी.आदित्य ने बताया- 22 दिसंबर को घंटाली थाने में एक मजदूर के परिजन ने शिकायत दर्ज कराई थी। महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के अकलूज के जाबुड़ गांव में मजदूरों को बंधक बनाकर काम कराने का जिक्र किया गया था। घंटाली थानाधिकारी सोहनलाल के नेतृत्व में टीम कुछ मजदूरों के परिजनों के साथ वहां पहुंची। अलग-अलग स्थानों से 53 मजदूरों का रेस्क्यू किया था। पुलिस ने घंटाली के बंशीलाल, महाराष्ट्र के सीताराम पाटिल, अलवर के खान नामक व्यक्ति पर मामला दर्ज कर लिया है।
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प्रतापगढ़ के आदिवासी समुदाय के लोगों को महाराष्ट्र में बंधक बनाकर काम करवाया जा रहा था। इन्हें 500 रुपए डेली की दिहाड़ी और फ्री रहने-खाने का लालच देकर महाराष्ट्र ले जाया गया और अलग-अलग जगह जमींदारों के हवाले कर दिया गया। (पढ़ें पूरी खबर)