April 6, 2026

पंजाबी सिंगर दीपा दोसांझ का निधन:इंग्लैंड में आया हार्ट अटैक, जालंधर के रहने वाले; ढोला वे ढोला गीत से मिली थी पहचान

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जालंधर के दोसांझ कलां के रहने वाले और पंजाबी सिंगर दीपा दोसांझ का हार्ट अटैक आने से निधन हो गया। ढोला वे ढोला गीत से फेम दीपा इन दिनों इंग्लैंड के लीसेस्टर में रहे थे।
मशहूर पंजाबी सिंगर और कंपोजर सुखशिंदर शिंदा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर गायक दीपा दोसांझ के निधन पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने पोस्ट शेयर कर लिखा, आज पंजाबी संगीत जगत ने एक सच्चा रत्न खो दिया। दीपा दोसांझ पंजाबी संगीत जगत और यूके भांगड़ा इंडस्ट्री से जुड़े थे। 90 के दशक के सुपरहिट सिंगर रहे हैं। दीपा ने ढोला वे ढोला जैसे सदाबहार गीतों के जरिए घर-घर में पहचान बनाई थी। जानकारी के अनुसार दीपा दोसांझ का निधन अचानक हेल्थ बिगड़ने के कारण हुआ। सोशल मीडिया और संगीत हलकों में उनके निधन का कारण दिल का दौरा बताया जा रहा है। हालांकि परिवार की ओर से अभी कारण की पुष्टि नहीं की गई है। उनके अचानक निधन से न केवल उनके फैंस बल्कि पूरा पंजाबी कलाकार भाईचारा सदमे में है। जालंधर के दोसांझ कलां से था गहरा नाता
दीपा दोसांझ मूल रूप से पंजाब के जालंधर जिले के मशहूर गांव दोसांझ कलां से ताल्लुक रखते थे। हालांकि वे लंबे समय से ब्रिटेन में बस गए थे, लेकिन उन्होंने अपनी गायकी में हमेशा पंजाब की मिट्टी की महक को जिंदा रखा। गौरतलब है कि इसी गांव से मशहूर ग्लोबल स्टार दिलजीत दोसांझ भी आते हैं। दीपा ने दिलजीत से पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोसांझ नाम को बड़ी पहचान दिला दी थी। 90 के दशक के अंत में संगीत की दुनिया में आए
दीपा दोसांझ को उनके हाई-पिच गायन और पारंपरिक बोलियों के लिए जाना जाता था। उन्होंने 90 के दशक के अंत में संगीत की दुनिया में कदम रखा और ढोला वे ढोला एल्बम से रातों-रात स्टार बन गए। उनके नसीबा, जी करदा, वधाइयां और दीपा बोलियां जैसे गाने आज भी शादियों और पार्टियों की जान हैं। उन्होंने बड़े म्यूजिक प्रोड्यूसर्स के साथ मिलकर यूके भांगड़ा सीन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देने वालों का लगा तांता
दीपा के निधन की खबर फैलते ही फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (ट्विटर) पर प्रशंसकों और साथी कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि देना शुरू कर दिया है। प्रशंसकों का कहना है कि दीपा दोसांझ की आवाज ने एक पूरे दौर को नई पहचान दी थी और उनके जाने से पंजाबी लोक संगीत के एक युग का अंत हो गया है।



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