फुटवियर ब्रांड के नाम में जुड़ा ‘एआई’, शेयर उछले 582%:सिलिकॉन वैली का स्टेटस सिंबल रहा ऑलबर्ड्स ब्रांड अब ‘जीपीयू’ के कारोबार में उतरा
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कभी दुनिया के सबसे आरामदायक और ‘इको-फ्रेंडली’ जूते बनाने वाली कंपनी ऑलबर्ड्स ने बुधवार को कॉरपोरेट जगत का सबसे चौंकाने वाला ‘यू-टर्न’ लिया। कंपनी अपने जूतों के बिजनेस समेटेगी और एआई चिप बनाने के काम में उतरेगी। इस घोषणा के बाद वॉल स्ट्रीट पर कंपनी के शेयरों में 582% से अधिक की ऐतिहासिक उछाल देखी गई। नवंबर 2021 के बाद से ऑलबर्ड्स का शेयर लगातार दबाव में था। लेकिन बुधवार को जैसे ही कंपनी ने ‘जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर’ में उतरने का ऐलान किया, इसके शेयर रॉकेट की तरह चढ़े। मंगलवार की क्लोजिंग (2.5 डॉलर) के मुकाबले यह शेयर 14.5 डॉलर पर बंद हुआ। हालांकि, उछाल के बावजूद कंपनी की मार्केट वैल्यू 15 करोड़ डॉलर (करीब 1,397 करोड़ रुपए) से कम है, जो कभी 4 अरब डॉलर (37,245 करोड़ रुपए) थी। पर 2021 की लिस्टिंग के मुकाबले इसकी वैल्यू अब भी 90% कम है। रिपोर्ट के मुताबिक, ऑलबर्ड्स अब ‘न्यूबर्ड एआई’ के नाम से अपनी नई पहचान बनाएगी। कंपनी ने हाल ही में अपने फुटवियर एसेट्स और ब्रांडिंग को महज 39 मिलियन डॉलर में ‘अमेरिकन एक्सचेंज ग्रुप’ को बेच दिया। अब कंपनी गुप्त निवेशक के साथ 5 करोड़ डॉलर (करीब 465 करोड़ रुपए) का सौदा करके ‘हाई-परफॉरमेंस जीपीयू एसेट्स’ खरीदेगी। यानी जो कंपनी कभी ऊन से बने टिकाऊ जूते बेचती थी, अब वह टेक स्टार्टअप को कंप्यूटिंग पावर किराए पर देने का काम करेगी। ऑलबर्ड्स की पहचान ऊन से बने इको-फ्रेंडली जूतों से थी ऑलबर्ड्स की पहचान दुनिया भर में ऊन से बने इको-फ्रेंडली जूतों और ‘बी कॉर्प’ सर्टिफिकेशन (पर्यावरण मानकों वाली कंपनी) से थी। लेकिन एआई डेटा सेंटर्स चलाने में भारी बिजली व पानी की खपत होती है। इसीलिए कंपनी ने चार्टर से ‘पर्यावरण संरक्षण’ व ‘पब्लिक बेनिफिट’ जैसे शब्दों को हटाने का फैसला किया है। अगले माह शेयरधारकों से मंजूरी ली जाएगी। रिटेल एनालिस्ट हिथा हर्जोग का कहना है कि सिर्फ नाम में एआई जोड़ने से शेयर का इतना उछलना इसे एक ‘मीम स्टॉक’ जैसा बनाता है। अभी तक कंपनी ने कोई एआई उत्पाद या कमाई नहीं दिखाई है। बराक ओबामा की पहली पसंद थे कभी ये जूते 2014 में शुरू हुई ऑलबर्ड्स एक समय सिलिकॉन वैली के टेक वर्कर्स और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की पहली पसंद थी। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी का नया तरीका बिजनेस बदलाव से ज्यादा उसे खत्म करने का तरीका है। जब भी कोई कंपनी डूबने लगती है, वह नई तकनीक का सहारा लेती है। 2017 में सॉफ्ट ड्रिंक बनाने वाली ‘लॉन्ग आइलैंड आइस्ड टी’ ने नाम बदलकर ‘लॉन्ग ब्लॉकचेन’ रखा था, जिससे शेयर 380% उछले थे। बाद में कंपनी डीलिस्ट हुई और इनसाइडर ट्रेडिंग की बात सामने आई।
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